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crisis on the creditworthiness of indian insurance companies pays the least during natural calamities

भारतीय बीमा कंपनियों की साख पर संकट, प्राकृतिक आपदा के समय करती हैं सबसे कम भुगतान

प्राकृतिक आपदा के समय सबसे कम भुगतान करती हैं भारतीय बीमा कंपनियां (News 18)

प्राकृतिक आपदा के समय सबसे कम भुगतान करती हैं भारतीय बीमा कंपनियां (News 18)

अम्फान तूफान का डेटा बताता है कि करीब 80 फीसद क्लेम का भुगतान हो चुका है. लेकिन कुल क्लेम किए धन का महज 26 फीसद ही भुगतान हुआ. जिससे यह साफ होता है कि प्रमुख दावों का निपटारा अब तक नहीं हुआ है.

नई दिल्ली. आज भारत उन देशों में शामिल हो चुका है जो हर साल किसी न किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का शिकार होता है. इस आपदा से निपटने के लिए आपदाग्रस्त क्षेत्र के लोग अपनी फसलों, घरों और संपत्तियों का बीमा करवाते हैं. लेकिन जब आपदा के बाद भुगतान की बात आती है ये भुगतान ऊंट के मुंह में जीरा साबित होता है. हाल ही में हुए वैश्विक जलवायु बीमा के एक विश्लेषण की रिपोर्ट में निकल कर आया है कि भारतीय बीमा कंपनियां जलवायु से जुड़ी आपदा या नुकसान की भरपाई में एशिया में सबसे निम्नतम दर के साथ दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं. अगर अम्फान जैसे चक्रवात की बात की जाए तो इसके लिए जितना दावा किया गया था, भारतीय बीमा कंपनियां इसका तीन-चौथाई भुगतान करने में भी विफल रहीं. यह वह चक्रवात था जिसने 2021 पश्चिम बंगाल में सुंदरबन को तबाह करके रख दिया था.

इंटर-गवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज IPCC) की हाल में जारी की गई जलवायु रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया में जलवायु मामले में संवदेनशील देशों में शुमार है. यही नहीं आने वाले वक्त में भारत को जलवायु से जुड़ी आपदाओं की वजह से और भी ज्यादा नुकसान होने की आशंका है. एन्वायर्नमेंटल प्लेटफॉर्म क्लाइमेट ट्रेंड्स ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की. जिसमें बताया गया है कि भारतीय बीमा कंपनियां ने भुगतान के मामले में 10 फीसद से नीचे अंक हासिल करके सबसे खराब प्रदर्शन किया. बीमा कंपनियों की जानकारी का क्लाइमेट रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्कोलजर TCFD) की टास्क फोर्स ने मूल्याकंन किया. TCFD की स्थापना 2017 में जी20 आर्थिक स्थिरता बोर्ड ने की थी. भारत के अलावा जिन देशों की बीमा कंपनियों ने खराब प्रदर्शन किया उनमें कोलंबिया, कजाकिस्तान, न्यूजीलैंड, रूस, सऊदी अरब, और संयुक्त अरब अमीरात की की बीमा कंपनियां शामिल हैं. इन देशों की बीमा कंपनियों ने 10 फीसद से नीचे अंक हासिल किए थे. वहीं ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान और अमेरिका की बीमा कंपनियां 50 और 60 के बीच अंक हासिल करके शीर्ष कंपनियों में शुमार हैं.

भारतीय बीमा कंपनियां जलवायु संकट पर फैसला लेने में पिछड़ीं

एक इंश्योरेंस कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक ने कहा कि जलवायु जोखिम दिन पर दिन तेजी से बढ़ रहा है और जटिल होता जा रहा है. भारतीय बीमा कंपनियां जलवायु संकट के मामले में आकलन और निवेश को लेकर फैसला लेने में पिछड़ गईं हैं. ऐसे में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को जलवायु से जुड़े खतरों के बारे में नियमों में बेहतर बदलाव करना चाहिए. IRDAI की एक रिपोर्ट बताती है कि अम्फान से हुए नुकसान को लेकर 14,575 बीमा क्लेम किए गए. जिसकी कुल कीमत 2020-21 के दौरान करीब 1767 करोड़ रुपये थी. इसमें से 11512 क्लेम को 30 जून 2021 तक निपटा दिया गया था. जिसके तहत करीब 471 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. जो भारत में आई अब तक की किसी भी तरह की मौसमी आपदा के मामले में सबसे बड़ी रकम है.

इंश्योरेंस क्लेम हो सकता है रिजेक्ट, ध्यान रखें ये जरूरी बातें

हालांकि भारत के बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि अम्फान का डेटा बताता है कि करीब 80 फीसद क्लेम का भुगतान हो चुका है. लेकिन कुल क्लेम किए धन का महज 26 फीसद ही भुगतान हुआ. जिससे यह साफ होता है कि प्रमुख दावों का निपटारा अब तक नहीं हुआ है. बीमा के भुगतान को लेकर यह रवैया मौसम से जुड़ी दूसरी आपदाओ में भी देखने को मिलता है. बाढ़ के मामले में भी भारत में अक्सर नुकसान की बात सामने आती है. केरल में ही 2018 में बाढ़ से हुए नुकसान का महज 10 फीसद का भुगतान हुआ. कुल मिलाकर देखा जाए तो 2020-21 में भारत में करीब 70 फीसद दावे, जिनकी कुल कीमत 2,559 थी, उनका भुगतान नहीं हुआ.

Tags: Insurance, Insurance Company, Insurance Policy, Insurance Regulatory and Development Authority, Natural Disaster

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