कश्मीर के लोगों के लिए 'लाइफ लाइन' बनी CRPF की हेल्पलाइन, हर रोज आ रहे हैं हजारों कॉल

5 अगस्त से अब तक 34,274 कॉल मददगार हेल्पलाइन को मिल चुकी है, ज्यादातर लोगों ने अपने परिवार का हालचाल जानने के लिए इस हेल्पलाइन पर कॉल किया.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 1:03 PM IST
कश्मीर के लोगों के लिए 'लाइफ लाइन' बनी CRPF की हेल्पलाइन, हर रोज आ रहे हैं हजारों कॉल
5 अगस्त के बाद जितनी भी कॉल सीआरपीएफ की इस हेल्पलाइन को मिली उनमें से 1227 इमरजेंसी कॉल थे.
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 1:03 PM IST
श्रीनगर: 5 अगस्त 2019 से कश्मीर (Kashmir) में धारा 370 (Article 370) हटा ली गई है जिसके बाद से राज्य में कानून व्यवस्था कायम करने के लिए अलग-अलग तरीके की पाबंदियां लगाई गई है. इससे मोबाइल सर्विस में पाबंदी लगाना और भीड़ इकट्ठा होने देना प्रमुख कदम हैं. इन बदले हुए हालात में जम्मू कश्मीर में लोगों के सीआरपीएफ (CRPF) की मददगार हेल्पलाइन संचार का माध्यम बनी. देश के अलग-अलग हिस्सों से और यहां तक कि विदेश से भी इस हेल्पलाइन पर लोगों ने फोन किया और अपनों का हाल जाना या फिर अपनों तक मदद पहुंचाई.

34 हज़ार से ज्यादा लोगों को मदद
5 अगस्त से अब तक 34,274 कॉल मददगार हेल्पलाइन को मिल चुकी है, ज्यादातर लोगों ने अपने परिवार का हालचाल जानने के लिए इस हेल्पलाइन पर कॉल किया.  इन फोनकॉल में से करीब 18000 कॉल देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रीनगर में सीआरपीएफ की मददगार हेल्पलाइन पर आई थी. जबकि करीब 16000 कॉल इस हेल्पलाइन ने अलग-अलग जगह किया. इस हेल्पलाइन पर पिछले 1 महीने में विदेशों से भी 270 कॉल आए हैं जिसमें लोगों ने सीआरपीएफ की हेल्पलाइन के इस नंबर पर कॉल करके अपने परिजनों का हाल जाना.

इमरजेंसी कॉलर को तुरंत मदद

5 अगस्त के बाद  जितनी भी कॉल सीआरपीएफ की इस हेल्पलाइन को मिली उनमें से 1227 इमरजेंसी कॉल थे. यानी तुरंत इसे सुलझाया गया या फिर मदद पहुंचाई गई. इसमें जरूरतमंद लोगों को अस्पताल ले जाना, एयर टिकट की डिलीवरी में मदद करना, और खाने का सामान जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना  शामिल हैं. यही नहीं 123 जरूरतमंद मरीजों को सीआरपीएफ की मददगार हेल्पलाइन के जरिए मदद पहुंचाई गई है.

घाटी में अब हालात सामान्य हो रहे हैं


हर रोज 800 से 1000 इनकमिंग कॉल 
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पिछले एक महीने में जबसे घाटी में धारा 370 हटी है उसके बाद से ज्यादातर कॉल इस हेल्पलाइन पर इनकमिंग ही रही है. दरअसल इस दौरान घाटी में इंटरनेट और फोन सेवा पर पूरी तरह पाबंदी थी. शुरुआती 10 दिनों में हर रोज 800 से 1000 इनकमिंग कॉल इस हेल्पलाइन पर आती थी. अब जबकि हालात सामान्य करने के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं उसके बाद इस हेल्पलाइन पर हर रोज इनकमिंग कॉल की संख्या घटकर 300 से 400 हो गई है.

कश्मीर के लोगों की मदद के लिए बनाई गई ये हेल्पलाइन कई तरीके से लोगों तक इन हालात में पहुंचने का काम कर रही है.  कानून व्यवस्था संभालने के साथ-साथ सीआरपीएफ के जवान जो की घाटी में अलग-अलग जगहों पर तैनात हैं वो कश्मीर के लोगों के साथ भी बातचीत करने का और उनकी दिक्कत समझने का प्रयास कर रहे हैं.  उनकी जरूरत की बातें इस हेल्पलाइन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा अगर कश्मीर के लोगों का कोई परिजन जो कि भारत या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से में रह रहे है और उनकी मदद करना चाह रहा है तो वह इस हेल्पलाइन पर तुरंत फोन करके अपने घर वालों के बारे में हाल चाल जान सकता है. तीसरा तरीका है सीआरपीएफ द्वारा मदद पहुंचाए गए लोगों का रिकॉर्ड रखना.

5 अगस्त से अब तक 34,274 कॉल मददगार हेल्पलाइन को मिल चुकी है


इलाज के लिए मिले पैसे
अनंतनाग के रहने वाले अब्दुल गनी डार कहते हैं, पिछले 1 महीने से जब घाटी में सब कुछ बंद था तब सीआरपीएफ में उनके बच्चों के इलाज के लिए ₹25000 की मदद की और यह सीआरपीएफ की मददगार हेल्पलाइन के जरिए ही हो सका.

कश्मीर में सीआरपीएफ की बहुत बड़े स्तर पर तैनाती है. 16 जून 2017 से शुरू की गई इस हेल्पलाइन में अब तक करीब 450000 कॉल आई हैं जिसमें से 370000 इनकमिंग है जबकि 80000 आउटगोइंग कॉल हैं.. पिछले करीब सवा 2 सालों में इस हेल्पलाइन ने 4500 हजार मरीज जिनको किडनी से संबंधित परेशानी है कीमोथेरेपी की जरूरत है या फिर कोई किसीऑपरेशन की दरकार है उनको यह मदद इस हेल्पलाइन के जरिए पहुंचाई जा रही है.

(शंकर आनंद के इनपुट के साथ)

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First published: September 10, 2019, 12:27 PM IST
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