कोरोना की तीसरी लहर से पहले दो खास डिवाइस तैयार, वायरस का पता लगाने में मिलेगी मदद

हवा में कोरोना वायरसकी मौजूदगी का पता लगाने और वायरस को मारने को लेकर दो तकनीक तैयार की गई हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus in India: बिजली और बैटरी से चलने वाले इस डिवाइस की कीमत 5 हजार के करीब है और बाजार में उतारने को लेकर सीएसआईआर ने 5 कंपनियों के साथ साझेदारी भी की है.

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नई दिल्ली. सीएसआईओ (Central Scientific Instruments Organization) की चंडीगढ़ लैबोरेटरी ने हवा में कोरोना वायरस (Coronavirus) की मौजूदगी का पता लगाने और वायरस को मारने को लेकर दो तकनीक तैयार की हैं. एक एयर सैंपलर है तो दूसरी अल्ट्रा वायलेट लैंप तकनीक. ये डिवाइस घर, स्कूल, दफ्तर, मॉल से लेकर बड़े- बड़े हॉल में लगाए जा सकते हैं.

हवा में कोरोना का पता लगाने वाला उपकरण का नाम पैन सीएसआईआर एयर सैंपलर है. इस छोटे से डिवाइस में एयर कंप्रेशर लगा है जो हवा को खींचता है और अंदर एक मेंब्रेन है जिस पर हवा में मौजूद कोरोना वायरस जमा हो जाते हैं. बिजली और बैटरी से चलने वाले इस डिवाइस की कीमत 5 हजार के करीब है और बाजार में उतारने को लेकर सीएसआईआर ने 5 कंपनियों के साथ साझेदारी भी की है.



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सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) के निदेशक जितेंद्र जे जाधव ने कहा कि एयर सैंपलर जाली से हवा खींच लेता है. हवा में जो भी पार्टिकल्स हैं इसमें एक मेंब्रेन लगा है उसमें चिपक जाते हैं. ये तकनीक सीएसआईओ की चंडीगढ़ लैब ने बनाई है. शाम को लैब में ले जाकर मेंब्रेन को चेक करना होता है कि इस पार्टिकल में कोई वायरस है या नहीं. अगर वायरस पाया गया तो जहां पर भी लोग थे जहां सैंपलर रखा था उन लोगों को अलर्ट कर सकते हैं.

एयर प्यूरीफायर है दूसरी तकनीक
वहीं, दूसरी तकनीक एयर प्यूरीफायर की है. इन अल्ट्रा वायलेट लैंप्स में लगी ट्यूब वायरस को मार देती है. इस यूवी लैंप्स को सप्लाई डक्ट में ही काटकर फिट किया जाता है. इसको फिलहाल रेलवे के एक कोच, एसी बस, ऑडिटोरियम, सीएसआईआर के कई दफ्तरों में लगाया गया है. इसकी कीमत जगह के हिसाब से 3 हजार से लेकर करीब 20 हजार रुपये है.

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जाधव ने बताया कि एयर प्यूरीफायर अल्ट्रा वायलेट बेस्ड है. बंद कमरे में एसी हमेशा हवा को सर्कुलेट करता रहता है और डक्टिंग सिस्टम में जब हवा वापस भेजना चाहती है तो यूवी लाइट से एयर प्यूरीफायर हवा को पूरा क्लीन करता है. उससे कमरे में वायरस न जाकर सिर्फ ताजी हवा अंदर जाती है.

केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तहत आने वाले CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के मुताबिक आने वाले दिनों में ये डिवाइस कोरोना की लड़ाई में कारगर साबित हो सकती है.

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