खाने की कीमत के साथ-साथ रेस्त्रां के मेन्यू कार्ड में पोषण वैल्यू भी देख पाएंगे ग्राहक

खाने की कीमत के साथ-साथ रेस्त्रां के मेन्यू कार्ड में पोषण वैल्यू भी देख पाएंगे ग्राहक
फोटो साभारः ANI

खाने के शौकीन लोगों अक्सर तरह-तरह के खाने का स्वाद लेने के लिए रेस्त्रां (Resturant) जाते हैं. रेस्त्रां में खाने में तो मजा आता है, लेकिन इस बात की शिकायत रहती है कि हमने कितनी कैलोरी ली इसके बारे में नहीं पता होता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 8:07 PM IST
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नई दिल्ली. खाने के शौकीन लोगों अक्सर तरह-तरह के खाने का स्वाद लेने के लिए रेस्त्रां (Resturant) जाते हैं. रेस्त्रां में खाने में तो मजा आता है, लेकिन इस बात की शिकायत रहती है कि हमने कितनी कैलोरी ली इसके बारे में नहीं पता होता. अगर आपके मन में भी रेस्त्रां में खाना खाते हुए ये शिकायत रहती है तो ये खबर आपके लिए है. अगली बार आपको रेस्त्रां के मेन्यू कार्ड में सिर्फ खाने की कीमत ही नहीं बल्कि उसमें कैलोरी कितनी है इसके बारे में भी लिखा होगा.

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अपने 'ईट राइट इनिशिएटिव' के तहत नियमों को लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत फूड चेन ज्वाइंट से कहा जाएगा कि वह अपने खाने के पोषक मूल्य की जानकारी दें. शीर्ष खाद्य नियामक FSSAI अधिनियम में लेबलिंग विनियमन के लिए एक संशोधन ला रहा है जिसके तहत रेस्त्रां मालिकों को भोजन का आकार देना और विटामिन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और कुल कैलोरी सहित पौष्टिक मूल्य की जानकारी देना अनिवार्य होगा.

इन लोगों पर लागू होगा यह नियम
शुरुआत में यह नियम खाद्य व्यापार ऑपरेटरों (FBO) के लिए 10 से अधिक खाद्य श्रृंखला प्रतिष्ठानों या उन FBO के लिए प्रस्तावित किए जा रहे हैं, जिनके पास शीर्ष खाद्य विनियमन एजेंसी द्वारा जारी केंद्रीय लाइसेंस है. FSSAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, 'प्रति दिन एक व्यस्क को 2000 किलो कैलोरी की आवश्यकता होती है.' इसके बारे में सभी रेस्त्रां को जानकारी देना अनिवार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा "बड़े रेस्त्रां मालिकों के लिए खाद्य पदार्थों में कैलोरी मान (प्रति सेवारत और सेवारत आकार) की उपस्थिति का उल्लेख करना अनिवार्य होगा. उन्हें मेनू कार्ड या टेबल पर एक पुस्तिका पर इसे प्रदर्शित करना होगा.



इन चीजों की भी देनी होगी जानकारी
रेस्त्रां के मालिकों को खाद्य पदार्थों में मौजूद आठ एलर्जीन - ग्लूटेन, क्रस्टेशियंस, दूध और दूध से बने उत्पाद, अंडे, मछली और मछली उत्पाद, ग्राउंड नट या ट्री नट्स, सोयाबीन और सल्फाइट्स की मौजूदगी के बारे में भी बताना होगा.





पहली बार लागू होगा ऐसा नियम

ऐसा पहली बार है कि पके हुए भोजन के संबंध में एफएसएसएआई द्वारा ऐसा संशोधन लागू किया जा रहा है. एफएसएसएआई के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमारा विचार लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ भोजन प्रदान करना है. स्वस्थ भोजन खाने के बारे में चेतना बढ़ रही है. ये नियम 'खाओ' के तहत किए जा रहे हैं, फिलहाल, यह सभी एफबीओ के लिए स्वैच्छिक होगा. उन्होंने कहा, पोषण संबंधी जानकारी की घोषणा करते हुए, हम उन्हें 25 प्रतिशत सहनशीलता की सीमा दे रहे हैं.


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