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CWC Meet: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए फिर राहुल की होगी मान मनौव्वल, G-23 पेश कर सकते हैं अलग उम्मीदवार

CWC Meet: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए फिर राहुल की होगी मान मनौव्वल, G-23 पेश कर सकते हैं अलग उम्मीदवार

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की फाइल फोटो (PTI)

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की फाइल फोटो (PTI)

CWC Meeting: न्यूज18 को पता लगा है कि जी-23 (G-23) के कुछ नेताओं को लगता है कि कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ उन्हें एक नॉमिनी खड़ा करना चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि प्रक्रिया लोकतांत्रिक है.

नई दिल्ली. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC Meeting) नई बैठक के लिए तैयार है. यह बैठक लंबे समय से कांग्रेस (Congress) के अध्यक्ष पद के लंबित मुद्दे को लेकर बुलाई गई है. हालांकि, इसे 2022 विधानसभा चुनाव (2022 Assembly Elections) की तैयारियों और मौजूदा सियासी उथल-पुथल पर चर्चा के रूप में दिखाया जा रहा है.

पार्टी के नए आक्रामक रूप और खासतौर से लखीमपुर खीरी में प्रियंका गांधी की गतिविधियों को लेकर बैठक का यह समय तय किया गया है. पार्टी को उम्मीद है कि यह नई आक्रामकता उसे कई संकटों से बाहर निकलने में मदद करेगी. इन संकटों में सबसे खास कांग्रेस के मुखिया के पद को माना जा रहा है. इस परेशानी को जल्द सुलझाने की मांग भी जोर पकड़ रही है. हाल ही में जी-23 समूह के अहम सदस्य कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था.

उन्होंने कहा था, ‘हम जानते हैं कि सारे फैसले कौन ले रहा है, लेकिन हम फिर भी नहीं जानते हैं.’ साफ है कि उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था, जो पार्टी नेताओं से मिलकर आखिरी फैसले ले रहे हैं. इस प्रेस वार्ता के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेता काफी असमंजस में नजर आए कि आखिर परेशानी होने पर वे किसका रुख करें. इसने ताकत के तीन केंद्र भी तैयार कर दिए हैं, जिनके मुखिया गांधी ही हैं.

कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कुछ सदस्यों को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है. सूत्र बताते हैं कि उम्मीद की जा रही है कि ये नेता एक और प्रस्ताव पारित कर सकते हैं, जिसके जरिए वे राहुल गांधी से अध्यक्ष बनने की अपील करेंगे. लंबे समय से अटके अध्यक्ष पद के चुनान कोविड पाबंदियों के चलते दो बार टले, लेकिन अब CWC इसका समय तय कर सकती है.

अब तक राहुल गांधी दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने से इनकार कर रहे हैं. इधर, सोनिया गांधी पर इस मुद्दे के जल्द निपटारे को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. निजी तौर पर देखा जाए तो राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वे इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक होते देखना चाहते हैं, जिसका मतलब है स्पष्ट चुनाव. अब यह बात उन संभावनाओं को दूर नहीं करती, जहां एक गैर-गांधी कांग्रेस का शीर्ष पद हासिल कर सकता है, लेकिन ज्यादातर लोग यह जानते हैं कि ऐसे उम्मीदवार को शायद स्वीकार ही नहीं किया जाएगा. न्यूज18 को पता लगा है कि जी-23 के कुछ नेताओं को लगता है कि कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ उन्हें एक नॉमिनी खड़ा करना चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि प्रक्रिया लोकतांत्रिक है.

CWC चुनाव के लिए रणनीतिक और बीजेपी पर निशाना साधने के लिए मुद्दों पर भी प्रस्ताव पारित करेगी. सुष्मिता देव, लुइजिन्हो फलेरियो और ललितेष त्रिपाठी जैसे कुछ बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के चलते कांग्रेस को भारी चोट लगी है. इससे बुरा यह है कि तृणमूल कांग्रेस, जिसे कांग्रेस अपना दोस्त मान रही है. वह ही कांग्रेस नेताओं को अपने पाले में लाने का काम कर रही है.

गोवा और पंजाब में आम आदमी पार्टी और टीएमसी ने सड़कों पर अपना काम शुरू कर दिया है. ऐसे में इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा. विपक्षी एकता को भी चोट पहुंची है. राहुल गांधी जैसे पार्टी के कई नेताओं को लगता है कि पार्टी को अपनी खुद की पहचान बनानी चाहिए न कि विपक्षी एकता के नाम पर समझौता करना चाहिए, क्योंकि यह एक ‘धर्म है, जिसका पालन टीएमसी और आप नहीं करते हैं.’

CWC में पार्टी के प्रस्ताव में इस बात का भी जिक्र हो सकता है कि जहां तक विपक्षी एकता की बात है, पार्टी नहीं झुकेगी. लखीमपुर खीरी जाने से पहले हुई प्रेस वार्ता में राहुल से इस बारे में सवाल किया गया था, तो उन्होंने कहा, ‘यह एकता के बारे में नहीं है. इसका मतलब है कि कांग्रेस किस चीज में विश्वास करती है और हम किसके लिए खड़े होते हैं.’

आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए परीक्षा साबित होंगे. पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी धीरे-धीरे अपने आप काम कर रहे हैं और प्रतिक्रिया मिल रही है कि राज्य में कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन हासिल कर रही है. इससे पार्टी राज्य और बीजेपी शासित उत्तराखंड में जीतने की उम्मीदें बढ़ी हैं. अगर ऐसा नहीं होता है, तो कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी और नई कांग्रेस तैयार करने की बात भी छिड़ सकती है. CWC अब और ज्यादा समय तक केवल सरसरी आवाज उठाकर नहीं बच सकती है. ऊपरी बदलाव के अलावा भी पार्टी और बहुत कुछ की जरूरत है.

Tags: Congress, CWC Meeting, Priyanka gandhi vadra, Rahul gandhi, Sonia Gandhi

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