चक्रवात अम्फान और लॉकडाउन ने बेरोजगार मजदूरों और इलेक्ट्रिशियनों को दिया रोजगार

चक्रवात अम्फान और लॉकडाउन ने बेरोजगार मजदूरों और इलेक्ट्रिशियनों को दिया रोजगार
चक्रवाती तूफान अम्फान की वजह से पश्चिम बंगाल में जगह जगह पर अभी भी पेड़ गिरे पड़े हैं.

सड़क पर उखड़े हुए पेड़ों को साफ करने और बिजली की आपूर्ति बहाल करने के लिए स्थानीय श्रमिकों और इलेक्ट्रिशियनों को काम पर लगाया है.

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कोलकाता. बांग्ला में कहावत है ‘करोर पॉश माश तो करोर सोर्बनाश’ (किसी का नुकसान किसी अन्य का फायदा बन जाना). इन दिनों चक्रवात प्रभावित पश्चिम बंगाल में यह कहावत चरितार्थ होती दिख रही है. एक तरफ, चक्रवात अम्फान ने दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों में तबाही मचाई है और लाखों लोगों को प्रभावित किया है तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना वायरस के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से दो महीने से लोग बेरोजगार बैठे हैं. हालांकि इन दोनों ही त्रासदी ने पश्चिम बंगाल में दिहाड़ी मजदूरों और इलेक्ट्रिशियनों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा कर दिए हैं.

पांच दिन से अधिक समय से बिना पानी या बिजली के रह रहे लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए अब राज्य सरकार ने सड़क पर उखड़े हुए पेड़ों को साफ करने और बिजली की आपूर्ति बहाल करने के लिए स्थानीय श्रमिकों और इलेक्ट्रिशियनों को काम पर लगाया है. कोलकाता नगरपालिका (केएमसी) के एक पार्षद ने बताया कि लॉकडाउन के चलते ड्यूटी पर लौट पाने में असमर्थ लोगों की वजह से कई राज्यों में श्रमिकों की कमी पड़ गई है. राज्य के हालात को फिर से सही करने के लिए और सड़कों को बाधित कर रहे पेड़ों को हटाने के लिए स्थानीय श्रमिकों की मदद लेने का फैसला किया है.

उन्होंने बताया, 'हालांकि बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम कलकत्ता बिजली आपूर्ति निगम (सीईएससी) का है, हर जगह तारें गिरीं हुई हैं इसलिए हमें उन्हें सुरक्षित ढंग से हटाने के लिए स्थानीय इलेक्ट्रिशियनों की जरूरत है.' केएमसी के अलावा, दक्षिण दमदम और उत्तरी दमदम नगर निगमों के अधिकारियों ने भी सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने के लिए दिहाड़ी मजदूरों की मदद ली है.



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