Home /News /nation /

Cyclone Jawad: किसने दिया है नए चक्रवाती तूफान जवाद को नाम, जानें- कैसे रखे जाते हैं तूफानों के नाम

Cyclone Jawad: किसने दिया है नए चक्रवाती तूफान जवाद को नाम, जानें- कैसे रखे जाते हैं तूफानों के नाम

दक्ष‍िणी भारत के आंध्र प्रदेश और ओडिशा में एक नए चक्रवाती तूफान जवाद आने का पूर्वानुमान जताया गया है.(सांकेतिक तस्वीर)

दक्ष‍िणी भारत के आंध्र प्रदेश और ओडिशा में एक नए चक्रवाती तूफान जवाद आने का पूर्वानुमान जताया गया है.(सांकेतिक तस्वीर)

Cyclone Jawad To Hit Andhra Pradesh and Odisha Coast: दरअसल, तूफानों के नाम एक समझौते के तहत रखे जाते हैं. इस पहल की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में एक संधि के माध्यम से हुई. अटलांटिक क्षेत्र में ह्यूरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है. यह मियामी स्थित नेशनल हरिकेन सेंटर की पहल पर शुरू हुई थी. खास बात यह है कि साल 1953 से अमेरिका केवल महिलाओं के नाम पर तो ऑस्ट्रेलिया केवल भ्रष्ट नेताओं के नाम पर तूफानों का नाम रखते थे. हालांकि 1979 के बाद से एक मेल व फिर एक फीमेल नाम रखा जाता है.

अधिक पढ़ें ...

    नई द‍िल्‍ली. देश के कई राज्‍यों में एक बार फ‍िर नए चक्रवाती तूफान जवाद (Cyclone Jawad) आने की संभावना है. प‍िछले साल जहां अम्‍फान तूफान ने दक्ष‍िण भारत के कई राज्‍यों में भारी तबाही मचाई थी, वहीं इस साल मई में भी पश्‍च‍िम बंगाल, ओड‍िशा, महाराष्‍ट्र व गुजरात आद‍ि को प्रभाव‍ित करने वाले ताउते और यास तूफान ने राज्‍यों को प्रभाव‍ित क‍िया था. पर अब दक्ष‍िणी भारत के आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट (Andhra Pradesh and Odisha Coast) में एक नए चक्रवाती तूफान जवाद (Cyclone Jawad) आने का पूर्वानुमान जताया गया है. संभावना है कि आज शाम या कल तक आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटवर्ती इलाकों (coastal areas) में आने की संभावना है. इसका बड़ा असर भारी बार‍िश के रूप में देखने को मिलेगा.

    आइये हम जानते हैं कि आख‍िर इस तरह के तूफानों का नाम क‍िस आधार पर और कैसे रखा जाता है और इनके नाम रखने के पीछे क‍िस तरह का मतलब न‍िकाला जाता है…

    सऊदी अरब ने दिया है नाम
    चक्रवाती तूफान जवाद (Cyclone Jawad) को नाम सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने द‍िया है. इसका अरबी में मतलब उदार या दयालु माना गया है. इसल‍िए अभी तक इस तूफान के नाम के मुताब‍िक इसके अपने दूसरे तरह के तूफानों की तरह ज्‍यादा तबाही वाला या व‍िनाशकारी नहीं होने की संभावना जताई गई है. हालांकि ताजा पूर्वानुमान में इसके ताकतवर चक्रवाती तूफान बनाने की संभावना जताई गई है.

    ये भी पढ़ें: Cyclone Jawad: आज शाम से ‘जवाद’ मचा सकता है कहर, भीषण चक्रवाती तूफान बनने के आसार!

    साल 2004 में शुरू हुई यह व्‍यवस्‍था
    जानकारी के अनुसार, साल 2004 में हिन्द महासागर क्षेत्र में यह व्यवस्था तक शुरू हुई, जब भारत की पहल पर 8 तटीय देशों भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड ने इसको लेकर समझौता किया. इंग्लिश अल्‍फाबेट्स के अनुसार, सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया गया है. इन आठ देशों के किसी हिस्से में जैसे ही चक्रवात पहुंचता है, लिस्‍ट में मौजूद अलग सुलभ नाम चक्रवात का रख दिया जाता है.

    इसका मकसद तूफान की आसानी से पहचान करना होता है. इससे राहत एवं बचाव अभियानों में भी काफी मदद मिलती है. तूफानों में किसी भी नाम को दोहराया नहीं जाता है. अब तक चक्रवात के करीब 60 से ज्‍यादा नामों को लिस्‍ट किया जा चुका है.

    समझौते के तहत रखे जाते हैं तूफानों के नाम
    दरअसल, तूफानों के नाम एक समझौते के तहत रखे जाते हैं. इस पहल की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में 1953 में एक संधि के माध्यम से हुई. अटलांटिक क्षेत्र में ह्यूरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है. यह मियामी स्थित नेशनल हरिकेन सेंटर की पहल पर शुरू हुई थी. खास बात यह है कि साल 1953 से अमेरिका केवल महिलाओं के नाम पर तो ऑस्ट्रेलिया केवल भ्रष्ट नेताओं के नाम पर तूफानों का नाम रखते थे. हालांकि 1979 के बाद से एक मेल व फिर एक फीमेल नाम रखा जाता है.

    बताते चलें कि गत वर्ष मई माह में चक्रवाती तूफान अम्फान ने पश्चिम बंगाल में भारी तबाही मचाई थी. इसकी वजह से 13 मिलियन से ज्‍यादा लोग प्रभावित हुए और 1.5 मिलियन से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे. वहीं बंगाल तट पर तूफान के आने से पहले 30 लाख से ज्‍यादा लोगों को सुरक्षि‍त भी न‍िकाल ल‍िया गया था.

    भारत मौसम व‍िभाग ने जवाद तूफान के आने के आसार को लेकर कहा है क‍ि थाईलैंड तट पर एक कम दबाव का सिस्टम विकसित हो गया है और इसके बुधवार तड़के तक अंडमान सागर में प्रवेश करने की प्रबल संभावना है. व‍िभाग का कहना है कि यह निम्न दबाव का क्षेत्र मजबूत होगा, और 2 दिसंबर तक, एक अवसाद बन जाएगा और बंगाल की पूर्व-मध्य खाड़ी पर हावी हो जाएगा. सिस्टम के एक चक्रवाती तूफान में बदलने और 4 दिसंबर की सुबह के दौरान उत्तर आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट को पार करने की संभावना है.

    आईएमडी की ओर से चक्रवात विकास आवृत्ति डेटा तैयार क‍िया हुआ है, ज‍िसके मुताब‍िक 1891 और 2021 के बीच आठ बार, इस क्षेत्र में अक्टूबर और नवंबर माह के दौरान कोई चक्रवात विकसित नहीं हुआ. इन सालों में 2021, 1990, 1961, 1954, 1953, 1914, 1900 और 1895 प्रमुख रूप से शाम‍िल हैं. वहीं अक्‍टूबर माह में चार दशकों से ज्‍यादा वक्‍त में क‍िसी प्रकार का कोई चक्रवात नहीं आया है और करीब 132 सालों के के दौरान में नवंबर माह में भी 32 बार चक्रवात के ब‍िना ही रहा है.

    ये भी पढ़ें: Cyclone Jawad: ओडिशा के कुछ जिलों में IMD ने जारी किया भारी बारिश का रेड अलर्ट

    117 क‍िमी प्रत‍िघंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
    इस बीच देखा जाए तो जवाद चक्रवाती तूफान दक्षिण-पश्चिम मानसून समाप्त होने के बाद का पहला चक्रवाती तूफान है. इसके 3 दिसंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवात के विकसित होने की संभावना है. ज‍िसकी हवा की गति 117 किमी प्रति घंटे तक देखी जा सकती है और तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में व्यापक वर्षा हो सकती है. मौसम विभाग ने बुधवार से भारत के पश्चिमी तट और उत्तरी महाराष्ट्र और गुजरात में बारिश की भविष्यवाणी की है.

    इन राज्‍यों पर भी पड़ेगा चक्रवाती तूफान का बड़ा असर
    इसके अलावा ब‍िहार, झारखंड और छत्‍तीसगढ़ के राज्‍यों पर भी इस चक्रवाती तूफान का असर देखा जा सकता है. इन राज्‍यों में बार‍िश के आसार जताए गए हैं. इससे लोगों को ठंड के मौसम में बड़ी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है. वहीं सभी प्रभाव‍ित राज्‍यों की सड़कों पर व‍िज‍ीव‍िल‍िटी कम देखी जा सकती है. वाटर लॉग‍िंग की समस्‍या पैदा होने की संभावना भी जताई गई है. मौसम व‍िभाग की ओर से ओड‍िशा से समते कई राज्‍यों के ल‍िए रेड अलर्ट भी जारी किया जा चुका है.

    Tags: Cyclone, Cyclone Jawad, IMD predicted, India Meteorological Department, Skymet, Weather Update

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर