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गुजरात: कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्मदाह करने वाले दलित किसान की मौत

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Updated: February 16, 2018, 11:30 PM IST
गुजरात: कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्मदाह करने वाले दलित किसान की मौत
कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्मदाह करने वाले दलित कार्यकर्ता की मौत ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

गुजरात के पाटन जिले में, जिग्नेश मेवानी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रिय दलित एकता अधिकार मंच के कार्यकर्ता, भानु भाई वनकर की अपोलो हॉस्पिटल में जलने की वजह से मौत हो गई है.

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  • Last Updated: February 16, 2018, 11:30 PM IST
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गुजरात के पाटन जिले में आत्‍मदाह करने वाले भानु भाई वणकर की अपोलो हॉस्पिटल में मौत हो गई है. उनका बेटा अंतिम संस्कार करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत आ गया है. बता दें कि पाटन के कलेक्टर दफ्तर के बाहर उन्होंने आग लगा ली थी जिसमें वह बुरी तरह से झुलस गए थे. सूत्रों के अनुसार सरकारी योजना द्वारा आवंटित जमीन का कब्जा न मिल पाने के कारण भानु भाई ने आत्महत्या कर ली थी. इसकी पूर्व सूचना उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी दी थी.

भानु भाई जिग्नेश मेवानी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय दलित एकता अधिकार मंच के सक्रिय कार्यकर्ता थे. मेवाणी वडगाम से निर्दलीय विधायक हैं. भानुभाई की मौत से गुजरात सरकार परेशानी में पड़ सकती है. उसे एक बार फिर से दलित प्रदर्शन का सामना करना पड़ सकता है. ऊना में दलित युवकों की पिटाई के बाद सरकार को दलित आंदोलन का सामना करना पड़ा था. इस आंदोलन की अगुवानी जिग्‍नेश मेवाणी ने ही की थी.

आत्‍मदाह की कोशिश के बाद मेवाणी ने कहा था कि यह भाजपा सरकार के लिए शर्म की बात है कि दलितों को अपने अधिकारों के लिए खुदकुशी जैसा कदम उठाना पड़ रहा है. उन्‍होंने पाटन बंद का ऐलान भी किया था.

इधर, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने दलित परिवार को जमीन के आवंटन में कथित देरी पर दलित कार्यकर्ता भानू वणकर के आत्मदाह के प्रयास की जांच का आदेश दिया. उन्‍होंने घटना पर दुख भी जताया था. पाटन जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर खुद को आग लगाने के बाद 60 वर्षीय वणकर गंभीर रूप से झुलस गए थे और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

सरकारी योजना के तहत एक दलित परिवार को जमीन आवंटन में देरी के खिलाफ विरोध जताते हुए वणकर ने गुरुवार को खुद को आग लगा ली थी. पुलिस ने बताया कि चार गांवों के किसान उन्हें आवंटित हुई सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं दिए जाने का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि राजस्व विभाग को इसके लिए जरूरी शुल्क अदा करने के बाद भी उन्हें जमीन नहीं सौंपी गई है.

जिले के सामी तालुका के डूधा गांव में रहने वाली एक प्रभावित किसान हेमाबेन वनकर ने बताया कि 2015 में उन्होंने राज्य के राजस्व विभाग में एक अर्जी दाखिल कर भूमिहीन दलितों को सरकारी जमीन देने की योजना के तहत एक जमीन मांगी थी. लेकिन जमीन अंतरित करने के लिए 22,236 रुपए का शुल्क देने के बाद भी उन्हें अब तक जमीन नहीं दी गई.

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First published: February 16, 2018, 11:12 PM IST
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