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राममंदिर निर्माण के लिए पहला पत्‍थर रखने वाले दलित कामेश्‍वर चौपाल ने कहा, 'राम के बिना रोटी नहीं'

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Updated: November 5, 2019, 12:35 PM IST
राममंदिर निर्माण के लिए पहला पत्‍थर रखने वाले दलित कामेश्‍वर चौपाल ने कहा, 'राम के बिना रोटी नहीं'
कामेश्‍वर चौपाल ने कहा कि समाज के हर वर्ग को एकसाथ आगे बढ़कर राममंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए.

अयोध्‍या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने से पहले कामेश्‍वर चौपाल ने कहा कि सभी धर्मों और संप्रदायों के सहयोग से जन्‍मभूमि पर ही राममंदिर बनाया जाना चाहिए. कामेश्‍वर चौपाल ने 1989 में मंदिर का पहला पत्‍थर रखा था. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के 17 नवंबर को रिटायर होने से पहले इस मामले का फैसला दे दिया जाएगा.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 12:35 PM IST
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इरम आगा

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) अगले दो हफ्तों में कभी भी अयोध्‍या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर फैसला सुना सकता है. मामले के सभी पक्षकार (All Parties) अंतिम निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस बीच एक व्‍यक्ति ऐसा भी है जो राममंदिर निर्माण की उलटी गिनती गिन रहा है. ढांचा ध्‍वस्‍त किए जाने से तीन साल पहले 9 नवंबर, 1989 में राममंदिर निर्माण (Ram Temple) के लिए पहला पत्‍थर रखने वाले दलित परिवार के कामेश्‍वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) का कहना है कि मेरे लिए यह फैसला बहुत अहमियत रखता है. इतने साल बीतने के बाद भी राममंदिर के लिए मेरी भावनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है. News18.com से खास बातचीत में 63 साल के कामेश्‍वर चौपाल ने कहा कि मेरे मन में जन्‍मभूमि पर राममंदिर निर्माण के अलावा कोई दूसरा विचार है ही नहीं.

पूरे समाज के सहयोग से होना चाहिए राममंदिर का निर्माण
कामेश्‍वर चौपाल ने कहा कि राममंदिर निर्माण पूरे समाज के सहयोग से होना चाहिए. जब मैं पूरा समाज कह रहा हूं तो इसका मतलब सभी संप्रदाय (Sects) और धर्म (Religion) से है. इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी शामिल हैं. सभी को एकसाथ आगे बढ़कर राममंदिर निर्माण में सहयोग करना चाहिए. इससे पूरी दुनिया में संदेश जाएगा कि भारत में सभी धर्मों और संप्रदायों के साथ समानता का व्‍यवहार किया जाता है. यहां सभी धर्मों को बराबर सम्‍मान दिया जाता है. साथ ही सभी धर्म एकदूसरे की संवदेनाओं (Sentiments) का बराबर ध्‍यान रखते हैं. भारत को प्राचीन काल में विश्‍व गुरु इसीलिए माना गया क्‍योंकि हमने दुनिया के सामने एकता और अखंडता का उदाहरण पेश किया. राममंदिर निर्माण के फैसले के इंतजार में बहुत समय गुजर गया. इस बीच मैंने राम की संवेदनाओं को समाज तक ले जाने की कोशिश की.

कांग्रेस सरकारों ने भी किया राममंदिर निर्माण के लिए काम
चौपाल कहते हैं कि राम यथार्थ हैं. राम देश के प्राण तत्‍व हैं. हम उम्‍मीद करते हैं कि राममंदिर निर्माण के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए सभी साथ आएंगे. हम अपने सपने को साकार करने के लिए दूसरे रास्‍ते भी अपना सकते थे, लेकिन हमें न्‍याय व्‍यवस्‍था (Judiciary) पर भरोसा है. हमें भारत के लोकतंत्र (Democracy) और संविधान (Constitution) पर पूरा विश्‍वास है. जब उनसे पूछा गया कि राममंदिर निर्माण को लेकर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार के रुख में क्‍या अंतर है तो उन्‍होंने कहा कि सिर्फ बीजेपी (BJP) सरकारों ने ही इस दिशा में काम नहीं किया है.

कामेश्‍वर चौपाल कहते हैं कि राममंदिर निर्माण के लिए सिर्फ बीजेपी ने ही काम नहीं किया है. इस दिशा में कांग्रेस समेत सभी सरकारों ने कोशिशें की हैं.

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कामेश्‍वर चौपाल कहते हैं कि राममंदिर निर्माण के लिए कांग्रेस (Congress) समेत बाकी सभी सरकारों ने भी काम किए हैं. पीवी नरसिम्‍हा राव (PV Narsimha Rao) सरकार में शिलान्‍यास हुआ, जबकि राजीव गांधी (Rajiv gandhi) सरकार ने मंदिर के ताले खुलवाए. मैंने पूर्व पीएम राव और राजीव गांधी की कोशिशों को भी देखा है. मामला कोर्ट में है और किसी भी सरकार या राजनीतिक दल के दायरे से बाहर है.

कांग्रेस ने सत्‍ता के लोभ में राम के अस्तित्‍व को नकार दिया
राममंदिर या रोजगार (Jobs) के सवाल पर कामेश्‍वर चौपाल ने कहा कि इस देश में राम और रोटी दोनों चाहिए. राम रहेंगे तभी रोटी बचेगी. केवल राम ही हमें रोटी दे सकते हैं. वर्षों देश गुलाम (Slave) रहा. कोई हमारे लिए काम नहीं करता था. फिर एक दिन बंकिमचंद्र चटर्जी (Bankimchandra Chatterjee) ने आजादी के लिए वंदेमातरम (Vande Mataram) लिखा. तब तक हमने भारत माता नहीं देखी थीं, लेकिन एक गीत से लोगों की भावनाएं जाग गईं. युवाओं में जोश भर गया और हमने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी. राम का भी ऐसा ही प्रभाव है और वे हमें शक्ति देते हैं. राम नहीं रहेंगे तो रोटी के लाले पड़ जाएंगे. कांग्रेस ने राम को मिथ्‍या (Myth) कहा. महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने हमें रघुपति राघव राजा राम दिया और कांग्रेस को सत्‍ता तक पहुंचाया. उसी कांग्रेस ने सत्‍ता के लोभ में राम के अस्तित्‍व को ही नकार दिया और वोट के लिए तुष्टिकरण की राजनीति की.
(पूरी बातचीत अंगेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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First published: November 5, 2019, 12:05 PM IST
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