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महाराष्‍ट्र पर मंडरा रहा डूबने का खतरा, हर साल बढ़ रहा मुंबई का तापमान: रिपोर्ट

महाराष्‍ट्र पर मंडरा रहा डूबने का खतरा, हर साल बढ़ रहा मुंबई का तापमान: रिपोर्ट

भारत के कई राज्‍यों में जलवायु संबंधी घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है. 
(Photo by Appu S. Narayanan / AFP)

भारत के कई राज्‍यों में जलवायु संबंधी घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है. (Photo by Appu S. Narayanan / AFP)

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव मनीषा म्हैसकर ने राज्‍य विधानसभा के केंद्रीय हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण राज्‍य में तेजी से बिगड़ती स्थिति से जुड़ी एक रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्य ने मुआवजे और सूखा राहत में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मुआवजा राज्‍य में अचानक आई बाढ़, बेमौसम बारिश, चक्रवात, ओलावृष्टि और भूस्खलन जैसी घटनाओं के कारण होने वाली आपदाओं के कारण दिया गया है.

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    मुंबई. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब तेजी से मौसम (Weather) पर पड़ता दिखाई दे रहा है. कई राज्‍य अब इससे प्रभावित दिख रहे हैं. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) की बात करें तो पिछले पांच सालों में जिस तरह से राज्‍य में जरूरत से ज्‍यादा और बेमौसम बारिश (Untimely Rainfall) रिकॉर्ड की गई है, वह चिंता बढ़ाने वाली है. पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो महाराष्‍ट्र के 31 जिलों में 175 घटनाएं जरूरत से ज्‍यादा बारिश (Rain) की सामने आई हैं जबकि 36 जिलों में 189 से ज्यादा बार बेमौसम बारिश रिकॉर्ड की गई है. खास बात ये है कि इसके साथ ही महराष्‍ट्र में सूखे की मार भी उसे दोहरी चोट पहुंचा रही है. महाराष्‍ट्र में पिछले दस सालों में सूखे की घटनाओं में चार गुना की वृद्धि (2010-19 में 23 से बढ़कर 79) रिकॉर्ड की गई है. जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी), 2021 की रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि भारत के मौसम पर जलवायु परिवर्तन का अच्‍छा खासा असर दिखने लगा है.

    महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव मनीषा म्हैसकर ने राज्‍य विधानसभा के केंद्रीय हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के कारण राज्‍य में तेजी से बिगड़ती स्थिति से जुड़ी एक रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्य ने मुआवजे और सूखा राहत में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मुआवजा राज्‍य में अचानक आई बाढ़, बेमौसम बारिश, चक्रवात, ओलावृष्टि और भूस्खलन जैसी घटनाओं के कारण होने वाली आपदाओं के कारण दिया गया है.

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    रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और जिस तरह से राज्‍य में बेमौसम बारिश हो रही है और शहरीकरण किया जा रहा है उसके बाद महाराष्‍ट्र को उन 12 राज्‍यों की सूची में शामिल किया गया है जो जिन पर पानी में डूबने का खतरा मंडरा रहा है. इस रिपोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य के अलावा, अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की भी चेतावनी दी गई है.

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    जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल की रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 2006 और साल 2018 के बीच बढ़ते तापमान के कारण समुद्र का स्तर प्रति वर्ष 3.7 मिमी बढ़ गया है. रिपोर्ट कहती है, 2050 तक मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के प्रमुख क्षेत्रों में गंभीर रूप से बाढ़ आने की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक कोथरुड, हडपसर, औंध और विमान नगर जैसे क्षेत्रों में जरूरत से ज्‍यादा शहरीकरण, पेड़ों को काटे जाने और वायु से आर्द्रता खत्‍म करने के कारण पूरा मुंबई शहर एक हीट आइलैंड (UHI) में तब्‍दील हो गया है. यूएचआई के दौरान दिन का तापमान अधिक होता है जो भूजल स्तर में कमी के अलावा अचानक बाढ़ और बेमौसम बारिश होती है. रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के प्रमुख हिस्‍सों में साल 1991-2018 के बीच तापमान जहां 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है, वहीं पुणे के कुछ हिस्सों में 2001-2016 के बीच तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्‍तरी हुई है.

    Tags: Climate Change, Climate change in india, Climate change report, Maharashtra, Mumbai

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