जामिया यूनिवर्सिटी के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किए गए दानिश सिद्दीकी

दानिश के शव को जामिया विश्वविद्यालय के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. (AP Photo/Altaf Qadri)

सिद्दीकी को वर्ष 2018 में समाचार एजेंसी रॉयटर के लिए काम करने के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और गत शुक्रवार को पाकिस्तान की सीमा से लगते अफगानिस्तान के कस्बे स्पीन बोल्दक में उनकी हत्या कर दी गई थी

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    नई दिल्ली. अफगानिस्तान में मारे गए फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी (Danish Siddiqui) को जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. सिद्दीकी का पार्थिव शरीर रविवार शाम को काबुल से दिल्ली लाया गया और बाद में उसे जामिया नगर स्थित उनके आवास पर लाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन करने के लिए उनके परिवार और दोस्तों सहित भारी भीड़ जमा हो गई. सिद्दीकी के जनाजे को कंधा देने के लिए भी लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा.

    भीड़ को देखते हुए इलाके में तैनात पुलिस कर्मी लोगों से कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करने का आग्रह करते रहे. सिद्दीकी के शव को कब्रिस्तान ले जाया गया जहां रात करीब सवा दस बजे नमाज-ए-जनाजा के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. उनके समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि देने के लिए मातम मनाने वालों का तांता लगा रहा. सिद्दीकी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व छात्र थे.

    सिद्दीकी को वर्ष 2018 में समाचार एजेंसी रॉयटर के लिए काम करने के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और गत शुक्रवार को पाकिस्तान की सीमा से लगते अफगानिस्तान के कस्बे स्पीन बोल्दक में उनकी हत्या कर दी गई थी. हत्या के समय वह अफगान विशेष बल के साथ जुड़े थे.

    कई गोलियां लगने से हुई थी मौत
    अफगानिस्तान में मारे गए पुलित्जर पुरस्कार विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी (Danish Siddiqui) की मौत बंदूक की कई गोलियां लगने से हुई थी. काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को सिद्दीकी मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद इस बात की पुष्टि की थी.

    इससे पहले दिन में विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कुलपति ने फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के परिवार की उनके शव को विश्वविद्यालय के कब्रिस्तान में दफनाने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है. यह कब्रिस्तान विशेष तौर पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, उनके जीवनसाथी और नाबालिग बच्चों के लिए बनाया गया है.’’

    सिद्दीकी ने इस विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और उनके पिता अख्तर सिद्दीकी विश्वविद्यालय में शिक्षा संकाय के डीन थे.

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