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दुनिया में निजता और सुरक्षा की नई मिसाल पेश करेगा भारत का पर्सनल डाटा प्रोटेक्‍शन बिल

संसद के शीतकालीन सत्र में पर्सनल डाटा प्रोटेक्‍शन बिल, 2018 पर चर्चा होगी.

संसद के शीतकालीन सत्र में पर्सनल डाटा प्रोटेक्‍शन बिल, 2018 पर चर्चा होगी.

प्रस्तावित कानून (Proposed Legislation) सरकारी और निजी संस्थाओं द्वारा लोगों का व्यक्तिगत डाटा (Personal Data) प्रोसेस करने को विनियमित (Regulate) करने की छूट देने की बात करता है. हालांकि, व्‍यक्तिगत सहमति (Individual Consent) के बाद ही उसके डाटा को प्रोसेस किया जा सकेगा. इससे जुड़े विधेयक पर संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में चर्चा होगी.

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    आदित्‍य शर्मा

    नई दिल्‍ली. भारत में तकनीक नीति (Tech-Policy) पर हुए कार्यक्रम में एक अहम सवाल उठा कि आपका डाटा (Data) कितना सुरक्षित है? ये सवाल आपकी निजता (Privacy) की अहमियत को उठाने वाला था. इस सवाल की गंभीरता 'क्‍या आपका डाटा निजी है' से 'आपका डाटा कितना निजी है' तक बढ़ गई है. इस सवाल के कारण भारत में डाटा सुरक्षा (Data Protection) के जरिये डाटा प्राइवेसी की चर्चा तेज हो गई है. इससे जुड़ा एक विधेयक (Bill) संसद में पेश किया जा चुका है. पर्सनल डाटा प्रोटेक्‍शन बिल, 2018 पर संसद के जारी शीतकालीन सत्र (Winter Session) में चर्चा होगी. प्रस्तावित कानून (Proposed Legislation) सरकारी और निजी संस्थाओं द्वारा लोगों का व्यक्तिगत डाटा (Personal Data) प्रोसेस करने को विनियमित (Regulate) करने की छूट देने की बात करता है.

    पर्सनल डाटा के इस्‍तेमाल को लेकर दी गई है कुछ छूट
    विधेयक में कहा गया है कि किसी व्‍यक्ति के डाटा को उसकी सहमति (Individual Consent) के बाद या मेडिकल इमरजेंसी (Medical Emergency) में ही प्रोसेस (Process) किया जा सकता है. इसके अलावा सरकार जनकल्‍याण योजनाओं (Welfare Schemes) का लाभ देने के लिए ऐसा कर सकती है. हालांकि, बिल में यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में किसकी सुरक्षा के लिए है. विधेयक के मुताबिक, निजी डाटा के जरिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक फर्म या व्यक्ति की पहचान आसानी से की जा सकती है. इसे कोई जिम्‍मेदार कंपनी और सरकार विनियमित करेगी. बिल में डाटा के संबंध में डाटा प्रिंसिपल को कई अधिकार दिए गए हैं. व्‍यक्ति अपनी जानकारी में संशोधन करने के साथ ही डाटा फिड्यूशरी (Data Fiduciaries) के पास स्टोर डाटा को जरूरत पड़ने पर हासिल कर सकता है.

    डाटा फिड्यूशरी को रेग्‍युलेट करने को बनाई गई डीपीए
    विधेयक के मुताबिक, डाटा प्रोसेस के लिए जिम्‍मेदार संस्‍था को डाटा प्रिंसिपल (Data Principal) को प्रोसेसिंग की प्रकृति और उसके उद्देश्यों की जानकारी देनी होगी. राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी शोध और पत्रकारिता के लिए डाटा प्रोसेस करने की छूट दी गई है. बिल में अपेक्षा की गई है कि पर्सनल डाटा की एक प्रति (Copy) भारत में ही स्‍टोर की जाएगी. वहीं, कुछ अहम डाटा को सिर्फ भारत में ही स्‍टोर किया जाएगा. डाटा फिड्यूशरी को सुपरवाइज और रेग्‍युलेट (Regulate) करने के लिए बिल के तहत राष्ट्रीय स्तर की एक डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी (DPA) का गठन किया गया है. विधेयक के अनुसार, गोपनीयता भंग करने के मामले में फर्म पर 15 करोड़ का जुर्माना या टर्नओवर का 4 फीसदी जुर्माना देना होगा.

    डाटा ब्रीच से नुकसान की आशंका पर डीपीए को मिलेगी सूचना
    विधेयक में डाटा प्रोसेस करने वाली जिम्‍मेदार संस्‍था से यह अपेक्षा की गई है कि अगर डाटा ब्रीच (Data Breach) से किसी को नुकसान की आशंका है तो वह डीपीए को इसकी सूचना देगा. ये बिल पत्रकारिता, शोध या कानूनी प्रक्रिया जैसे उद्देश्यों के लिए डाटा प्रोसेस की छूट देता है. बिल के मुताबिक, लॉ एनफोर्समेंट (Law Enforcement) एजेंसीज को डाटा आसानी से उपलब्‍ध कराने के लिए भारत में पर्सनल डाटा की एक कॉपी स्टोर करना अनिवार्य होगा. डाटा प्रोसेसिंग के तहत जानकारी कलेक्‍शन, मैन्यूपुलेशन, शेयरिंग या स्टोरेज किया जाता है. डाटा प्रिंसिपल वह व्यक्ति है, जिसके डाटा को प्रोसेस किया जाता है. डाटा फिड्यूशरी वह संस्‍था या व्यक्ति है, जो डाटा प्रोसेसिंग के प्रकार और उद्देश्यों को तय करता है.

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