होसबोले में है गजब की सांगठनिक क्षमता, ABVP को नॉर्थ-ईस्ट और अंडमान तक पहुंचाया

दत्तात्रेय होसबोले (फ़ाइल फोटो)

दत्तात्रेय होसबोले (फ़ाइल फोटो)

दत्तात्रेय होसबोले (Dattatreya Hosabale) को आरएसएस में जबदस्त सांगठनिक क्षमता के लिए पहचाना जाता है. होसबोले ही वो नेता हैं जिनकी वजह से देश के उत्तर-पूर्वी इलाकों और अंडमान निकोबार जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का विस्तार हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 6:53 PM IST
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नई दिल्ली. दत्तात्रेय होसबोले (Dattatreya Hosabale) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह चुने गए हैं. कर्नाटक (Karnataka) के निवासी होसबोले को आरएसएस में जबदस्त सांगठनिक क्षमता (Organisational Skills) के लिए पहचाना जाता है. होसबोले ही वो नेता हैं जिनकी वजह से देश के उत्तर-पूर्वी इलाकों (North-East) और अंडमान निकोबार (Andaman-Nicobar) जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का विस्तार हुआ.

होसबोले 1968 में 13 वर्ष की उम्र में संघ के स्वयंसेवक बने और 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े. अगले 15 वर्षों तक ये परिषद के संगठन महामंत्री रहे. ये सन 1975-77 के जेपी आन्दोलन में भी सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष आपने ‘मीसा’ कानून के तहत जेल भी गए.

गुवाहाटी में युवा विकास केन्द्र के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही

1978 में नागपुर नगर सम्पर्क प्रमुख के रूप में विद्यार्थी परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता हुए. विद्यार्थी परिषद् में आपने अनेक दायित्वों का निर्वहण करते हुए परिषद् के राष्ट्रीय संगठन-मंत्री के पद के पद पर रहे. गुवाहाटी में युवा विकास केन्द्र के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वोत्तर भारत में विद्यार्थी परिषद् के कार्य-विस्तार का पूरा श्रेय भी उन्हें दिया जाता है.
आरएसएस की रणनीतिक पैठ और मजबूत होने वाली है

उदारवादी चेहरे की पहचान रखने वाले होसबोले को अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद माना जा रहा है कि आरएसएस की रणनीतिक पैठ और मजबूत होने वाली है. उम्मीद की जा रही है होसबोले के साथ ही युवा चेहरों को आरएसएस के भीतर और ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती है. जिससे देशभर में संगठन के प्रचार-प्रसार को मजबूती मिलेगी.
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