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West Bengal Elections: नंदीग्राम के रण में ममता बनर्जी का उतरना साबित होगा बड़ा जोखिम या कई निशाने पर नज़र

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है. 
(फाइल फोटो: Shutterstock)

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है. (फाइल फोटो: Shutterstock)

West Bengal Election: जानकार कहते हैं 'बनर्जी ने इस चुनावी जंग को डेविड बनाम गोलियथ की जंग की तरह बना दिया है, जहां वे बीजेपी (BJP) की बड़ी चुनावी व्यवस्था और आर्थिक ताकत के सामने खड़ी हुईं हैं.' उन्होंने संकेत दिए कि बनर्जी के फैसले के पीछे प्रशांत किशोर की प्लानिंग भी हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 6, 2021, 10:01 AM IST
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(राजीव कुमार)
कोलकाता. नंदीग्राम विधानसभा सीट (Nandigram Assembly seat) से चुनाव लड़ने के ऐलान के साथ पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने सबसे बड़ा चुनावी फैसला ले लिया है. उनके इस ऐलान के बाद बीते दो महीनों से नंदीग्राम और भवानीपुर को लेकर जारी कयासबाजी पर विराम लग गया है. जनवरी में बनर्जी ने नंदीग्राम से लड़ने की घोषणा कर दी थी. खास बात है कि बीते शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने अपने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. राज्य में 8 चरणों में चुनाव होने हैं.

बीती 18 जनवरी को ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में रैली की थी. तब उन्होंने कहा था 'क्या होगा अगर मैं नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ूं. यह कैसा रहेगा....' सीएम ने कहा था, 'नंदीग्राम मेरे दिल के करीब है. मैं अपना नाम भूल सकती हूं, लेकिन नंदीग्राम को नहीं भूल सकती. नंदीग्राम के लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए, आज मैं ऐलान कर रही हूं कि आगामी चुनाव में मैं नंदीग्राम से लड़ना चाहती हूं.'

खास बात है कि नंदीग्राम सीट हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी के पाले में हैं. सीएम बनर्जी के इस ऐलान के अगले दिन अधिकारी ने भी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री 50 हजार मतों से हारेंगी या वे राजनीति छोड़ देंगे. नंदीग्राम सीट पर अधिकारी परिवार का खासा प्रभाव है. शुभेंदु ममता सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री रह चुके हैं.
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर करीबी निगाह रखने वाले एक विश्लेषक बताते हैं, 'केवल नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला कर ममता जंग को सीधे बीजेपी के दरवाजे पर ले गईं हैं.' वे कहते हैं, 'दीदी ने यह फैसला लेने से पहले जमीनी स्तर पर जरूर पर्याप्त जानकारी हासिल की होगी.' अब सवाल है कि क्या बनर्जी की तरफ से नंदीग्राम एक जोखिम भरा कदम है, क्योंकि नेता ऐसा राजनीतिक दांव कम ही खेलते हैं?



बनर्जी की राजनीति को लंबे समय से देख रहे वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक को लगता है, 'ममता ने नंदीग्राम की एक चाल से कई चिड़िया मार दी हैं.' भौमिक कहते हैं, 'पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का राजनीतिक जड़ों में वापस लौटना उनकी गरीब समर्थक छवि को जाहिर करेगा.' इसके अलावा उनका यह फैसला अधिकारी के वर्चस्व वाली सीट पर दोबारा दावा पेश करना भी है.

अधिकारी परिवार को पूर्व मेदिनीपुर और पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया और बांकुरा समेत कई पड़ोसी जिलों में खासा प्रभाव है. भौमिक ने बताया 'बनर्जी ने इस चुनावी जंग को डेविड बनाम गोलियथ की जंग की तरह बना दिया है, जहां वे बीजेपी की बड़ी चुनावी व्यवस्था और आर्थिक ताकत के सामने खड़ी हुई हैं.' उन्होंने संकेत दिए कि बनर्जी के फैसले के पीछे प्रशांत किशोर की प्लानिंग भी हो सकती है. सीट पर दूसरे चरण में 1 अप्रैल को मतदान होने हैं.

नंदीग्राम में 35-40 फीसदी मुस्लिम वोटर्स और बड़ी संख्या में दलित आबादी है. इन्हें टीएमसी का वोटर माना जाता है. सभी की नजरें नंदीग्राम की युद्धभूमि में होंगी. वह सीट जिसने ममता को साल 2011 में सत्ता तक पहुंचाया था.
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