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DDC Poll 2020: कश्मीर घाटी की इन महिला उम्मीदवारों पर टिकी सबकी निगाहें, जानिए

DDC Poll 2020: कश्मीर घाटी की इन महिला उम्मीदवारों पर टिकी सबकी निगाहें, जानिए

गुप्कर अलायंस की उम्मीदवार परमीत कौर और 23 वर्षीय वकील से राजनेता रूकैया फैयाज की फाइल फोटो.

गुप्कर अलायंस की उम्मीदवार परमीत कौर और 23 वर्षीय वकील से राजनेता रूकैया फैयाज की फाइल फोटो.

District Development Council Elections 2020: नेहरू ने इलाके में बिजली की स्थिति में सुधार के अलावा सड़कों, पुलियों की मरम्मत जैसे मुद्दों के निवारण का वादा किया है. आरती नेहरू का कहना है कि आजादी के इतने सालों बाद भी गांव बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं.

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    श्नीनगर/नई दिल्ली. आमतौर पर उत्तरी कश्मीर के पहाड़ी इलाके इस मौसम में रंग और उत्साह नहीं देखने को मिलते हैं. हालांकि हर साल की सर्दियां इस बार काफी अलग हैं. जिला विकास परिषद (District Development Council) (डीडीसी) चुनावों के कारण डांगीवाचा जिले की महिलाओं में काफी खलबली है. चुनाव में लोगों को वोट देने के लिए कश्मीरी महिला आरती नेहरू (Aarti Nehru) लगातार कोशिश कर रही हैं. गांव के लोग उन्हें वोट दें और वो आगे बढ़े नेहरू इसकी तमाम कोशिश कर रही हैं.

    नेहरू ने इलाके में बिजली की स्थिति में सुधार के अलावा सड़कों, पुलियों की मरम्मत जैसे मुद्दों के निवारण का वादा किया है. आरती नेहरू का कहना है कि आजादी के इतने सालों बाद भी गांव बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं. इतने सालों से यहां कुछ भी नहीं बदला है और वो बदलाव चाहती हैं इसलिए इन चुनावों में जीत दर्ज करना चाहती हैं. लोगों को संबोधित करते हुए टूटी हुई कश्मीरी में वो कहती हैं कि हमारे प्रतिनिधियों ने गरीब लोगों की मदद के लिए काफी कुछ किया है और मैं अब बदलाव का एजेंट बनना चाहती हूं.

    मजबूरी में लड़ रही हूं चुनाव
    उत्तर प्रदेश के निवासी से शादी करने वाली आरती नेहरू ने कहा कि ग्रामीणों की खराब हालत ने उन्हें डीडीसी के चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया. वह दोस्तों और पड़ोसियों के साथ फिर से जुड़ने के लिए अपने पैतृक गांव में गए. उन्होंने कहा चुनावों में मेरे नामांकन दर्ज करने से काफी खुश थे. लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, मैं एक स्वतंत्र के रूप में चुनाव लड़ रही हूं. कोई तार जुड़ा हुआ है और मुझे इस बारे में झूठ नहीं बोलना है. मुझे उम्मीद है कि लोग मुझे एक मौका देंगे. नेहरू ने कहा कि भारी मुस्लिम आबादी उनके लिए मतदान करते समय कोई भेदभाव नहीं करेगी. कश्मीर में धर्म कोई मायने नहीं रखता. यह एकमात्र स्थान है जहां कोई धार्मिक पक्षपात नहीं है.

    खास बात ये रही कि जो लोग इन चुनावों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे वो नेहरू को देखने आए और भीड़ में एक बुजुर्ग शख्स ने हाथ उठाते हुए कहा कि वो वोट देंगे. इसके बाद कई लोगों ने एक के बाद एक हाथ उठाकर वोट देने की बात कही.

    नेहरू दिल्ली में रहती हैं और पति के साथ मिलकर अपना बिजनेस चलाती हैं. हालांकि जब भी उन्हें वक्त मिलता है तो परिवार और दोस्तों से मिलने के लिए डांगीवाच जाती हैं, लेकिन इस बार वो चुनाव में भाग लेने और यहां पर विकास करने के लिए दिल्ली से आई हैं. वो कहती हैं कि वो बचपन से ही राजनीति में रूचि रखती हैं. पिछले दिनों नामांकन भरने के बाद उन्होंने गांव में कई घरों में जा-जाकर लोगों को बताया कि ये चुनाव विकास और स्थानीय मुद्दों के प्रति सरकार को जागरूक करने के लिए कितने जरूरी हैं.

    रुकाया फैयाज से है कांटे का मुकाबला
    इन चुनावों में नेहरू का मुबाकला 23 साल की वकील से राजनेता बनीं रुकाया फैयाज से है. फैयाज का कहना है कि वो विशेष रूप से महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहती हैं. ग्रामीणों को संबोधित करते हुए रुकाया फैयाज अक्सर कहती हैं कि वो महिलाओं को शिक्षा, कमाई और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए काम करना चाहती हैं.

    आर्टिकल 370 जैसे मुद्दों पर बात नहीं...
    फैयाज ने कहा कि उन्होंने एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट की स्थापना की है, जो युवा गाँव की लड़कियों को हस्त-कला जैसे व्यवसाय में प्रशिक्षित करता है. इसके अलावा, वह गरीब परिवारों का समर्थन करती है. "मैं एक बहुत गरीब परिवार से आती हूं और उन मुद्दों से वाकिफ हूं. एक वकील होने के नाते, मुझे पता है कि कैसे आरटीआई दाखिल करना और अधिकारियों को जवाबदेह बनाना है. मेरे कहने के बाद, हमारे गांवों में बहुत सारी केंद्रीय योजनाएं शुरू की गईं. फैयाज ने कहा कि वह आर्टिकल 370 जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दों के बारे में बात नहीं करती क्योंकि यह उससे परे है. “यह बड़े नेताओं के लिए है. मैंने खुद को छोटे स्थानीय मुद्दों तक सीमित कर लिया है.

    आदिवासी बेल्ट पर टिकी हैं निगाहें
    पीपुल्स कॉन्फ्रेंस से जुड़ी और गुप्कर गठबंधन की संयुक्त उम्मीदवार परमीत कौर पर भी ग्रामीणों की निगाहें हैं. तीन बच्चों की मां परमीत कौर का ध्यान आदिवासी बेल्ट पर है. नामांकन दाखिल करने के बाद से ही कौर लगातार मेहनत कर रही हैं वो चाहती हैं आदिवासियों का विकास पहले हो, वो गांव के साथ कदम ताल बैठा सकें और मुख्यधारा से खुद को जोड़ सकें.

    उनके बच्चों की अच्छे स्कूलों, अच्छी शिक्षा तक कोई पहुंच नहीं है. उन्हें लंबी दूरी तक चलना पड़ता है क्योंकि पहाड़ियों के लिए सड़क-लिंक नहीं हैं. सर्दियों में एक साथ हफ्तों तक बिजली गुल रहती है. वे सबसे वंचित समुदाय से हैं इसलिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना अपना लक्ष्य मानती हैं.

    Tags: BJP, Jammu kashmir, Jammu Kashmir Election, Jammu kashmir news, PDP

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