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Modi @8: कोरोना से निपटना पीएम मोदी की एक बड़ी सफलता, क्यों खास हैं ये 3 साल

 पीएम नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी (फ़ाइल फोटो)

Modi @8: पीएम की देखरेख में देश के कई शहरों में अस्थायी हॉस्पिटल बनाये जाने लगे. कोरोना महामारी में इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू की गईं. पीएम की देखरेख में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दवाइयों को लेकर मॉनिटरिंग की.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. पीएम ने आज अपने दूसरे कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लिए हैं. नरेंद्र मोदी पिछले 20 सालों से देश के संवैधानिक पद पर हैं. पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर फिर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर. लेकिन देश के प्रधानमंत्री के तौर पर उनका दूसरा कार्यकाल सारे कार्यकाल से खासा अलग है. दूसरे कार्यकाल के अभी 8 महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि देश के सामने एक बड़ी चुनौती दस्तक दे चुकी थी. इस चुनौती से निपटने के लिए ना तो देश तैयार था और ना ही देश की सरकार. देश के लिए ये चुनौती नई थी.

ये चुनौती थी कोरोना महामारी की. भारत में सबसे पहले कोरोना वायरस से संक्रमण का मामला 30 जनवरी 2020 को दक्षिण भारत के केरल में सामने आया था. और इस कोरोना वायरस संक्रमण से पहली मौत 12 मार्च, 2020 को कर्नाटक के कलबुर्गी में हुई थी. लेकिन देखते ही देखते इस महामारी के चपेट में पूरा देश आ गया. इस महामारी से लोगों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ. देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए यह कठिन वक़्त था.

ऐसे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमर कसी. हर स्थिति से निपटने के लिए पीएम ने बैठकों का दौर शुरू किया. सबसे पहले पीएम ने टास्क फोर्स का गठन किया. पूरे मामले को पीएम खुद मॉनिटर करने लगे. लगातार मामले बढ़ रहे थे. महामारी शहरों से गांव तक पहुंचती जा रही थी. ऐसे में पीएम की देखरेख में महामारी से निपटने की शुरुआत हुई. पीएम ने दो स्तरों पर इस चुनौती से निपटने का प्लान बनाया. एक महामारी से दो चार हो रहे लोगों को बचाने और आगे लोगों का इस महामारी से बचाव हो सके इसकी कार्ययोजना शुरू हुई. इस दौरान पीएम को कई कठोर फैसले भी लेने पड़े. पीएम ने 24 मार्च 2020 से देश मे पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया.

स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने पर रहा जोर
पीएम की देखरेख में देश के कई शहरों में अस्थायी हॉस्पिटल बनाये जाने लगे. कोरोना महामारी में इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू की गईं. पीएम की देखरेख में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दवाइयों को लेकर मॉनिटरिंग की. दवा कंपनियों के साथ लगातार बैठकें की गयीं और जरूरत की सभी दवाइयां समय पर उपलब्ध कराई गईं. उस वक़्त ना तो देश मे पीपीई किट थी और ना पर्याप्त मात्रा में वेंटिलेटर. कोरोना वायरस के सामने आने से पहले भारत में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट या पीपीई किट नहीं बनते थे. महामारी की शुरुआत के कुछ दिनों के बाद ही भारत ने रोजाना 200000 से अधिक पीपी किट बनाने शुरू कर दिए. अगर बात जनवरी 2020 की करें तो इस समय तक देश में सिर्फ 2,75,000 किट ही उपलब्ध थे और यह सभी आयातित थे. उसके बाद स्थितियां अचानक बदलीं. कोरोना महामारी आने के सिर्फ 60 दिनों के अंदर ही भारत ने जिस तरीके से पीपीई किट बनाने में महारत हासिल की, यह पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बेहतरीन झलक है.

वैक्सीन पर रहा जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर जहां मेडिकल फैसिलिटी को मजबूत करने में जुटे हुए थे, वहीं इसकी रोकथाम के लिए इस महामारी की वैक्सीन जल्द से जल्द देश में आ जाए, इसकी कवायद जोरों पर थी. भारत बायोटेक जैसी देशी कंपनी को जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने का जिम्मा सौंपा गया. हालांकि पीएम देश की सीरम जैसे कई कंपनियों को भी वैक्सीन के लिए लगातार प्रोत्साहित करते रहे. पीएम ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों का दौरा तक किया. आलम ये थे कि इस महामारी के एक साल के भीतर देश में वैक्सीन का निर्माण हो गया. 16 जनवरी 2021 से देश मे कोरोना वैक्सीन का महाअभियान शुरू हुआ. देश के सभी लोगों को वैक्सीन देना भी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन पीएम ने वैज्ञानिक तरीक़े से सभी लोगों को वैक्सीन लगाने का निर्णय किया. आज तकरीबन 90 फीसदी लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगायी जा चुकी है.

प्रधानमंत्री गरीबकल्याण अन्न योजना
कोरोना महामारी की वजह से लोगों के सामने एक और मुसीबत थी. लॉकडाउन और बिगड़ती अर्थव्यवस्था की वजह से कई लोगों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गयी. ऐसे में पीएम ने गरीबों को मुफ्त अनाज देने की ठानी. कोरोनाकाल में गरीब लोगों के लिए महामारी से भी बड़ी मुसीबत थी पलायान और अन्न की कमी. इस बीच सरकार ने कोविड की पहली लहर के दौरान 26 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की. राशन कार्ड पर 4 लोगों के नाम होने पर चारों सदस्यों को 5-5 किलो गेहूं और चावल देने का फैसला किया गया. जिससे देश के करोड़ों गरीबों को लाभ मिला.

Tags: PM Modi

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