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सोपोर हत्या:अलगाववादियों की हड़ताल से घाटी में जीवन अस्त-व्यस्त

भाषा
Updated: June 17, 2015, 3:19 PM IST
सोपोर हत्या:अलगाववादियों की हड़ताल से घाटी में जीवन अस्त-व्यस्त
सोपोर शहर में नागरिकों के मारे जाने के विरोध में अलगाववादियों के हड़ताल के आह्वान के कारण आज कश्मीर में आम जनजीवन प्रभावित हो गया।

सोपोर शहर में नागरिकों के मारे जाने के विरोध में अलगाववादियों के हड़ताल के आह्वान के कारण आज कश्मीर में आम जनजीवन प्रभावित हो गया।

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श्रीनगरबारामुला जिले के सोपोर शहर में नागरिकों के मारे जाने के विरोध में अलगाववादियों के हड़ताल के आह्वान के कारण आज कश्मीर में आम जनजीवन प्रभावित हो गया।

मीरवाइज उमर फारूक और सैयद अली शाह गिलानी की अगुवाई वाले जेकेएलएफ, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के धड़ों की ओर से संयुक्त तौर पर आयोजित हड़ताल के कारण घाटी में दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान और स्कूल बंद रहे। घाटी में लगभग सभी अलगाववादी समूहों ने हड़ताल का समर्थन किया।

अधिकारियों ने बताया कि घाटी के अधिकतर हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सड़कों पर नहीं चलीं लेकिन राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी के कुछ हिस्सों में निजी वाहनों को सड़कों पर चलते हुए देखा गया।

उन्होंने बताया कि सड़कों से यातायात सेवाओं के नदारद रहने के कारण सरकारी कार्यालयों में लोगों की उपस्थिति कम रही। हड़ताल में कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के शामिल होने के कारण अदालतों में भी कामकाज प्रभावित रहा।



सोपोर शहर में पिछले तीन सप्ताह में उग्रवादियों ने छह लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी जिसमें पूर्व उग्रवादियों सहित अलगावादी कार्यकर्ता भी शामिल हैं। इसके कारण उत्तरी कश्मीर के शहर में रहने वाले लोगों के बीच दहशत पैदा हो गयी है।

हत्या के पीछे दो उग्रवादियों का हाथ माना जाना रहा है जिनकी गिरफ्तारी को लेकर सूचना देने वालों को पुलिस ने 10 लाख रूपए का इनाम देने की घोषणा की है। उग्रवादियों की पहचान अब्दुल कयूम नजर और इम्तियाज अहमद कांडू के रूप में हुई है।

माना जाता है कि इन्होंने हिज्बुल मुजाहिदीन सुप्रीमो सैयद सलाहुद्दीन की कमान के आदेशों को नहीं माना और लश्कर-ए-इस्लाम के छद्म नाम से गुट का संचालन किया।

नजर उर्फ नजरवाला सोपोर का रहने वाला है और माना जाता है कि हाल में दूरसंचार टावरों पर हुए हमलों के बाद वह पाकिस्तान में रह रहे सलाहुद्दीन से अलग हो गया। इन हमलों में दो लोगांे की जान चली गई थी।

खुफिया रिपोट के अनुसार, नजरवाला ने कुछ लोगों की सूची तैयार की है जिनके बारे में उसका दावा है कि वे आतंकवादी समूह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी तंत्र की कथित रूप से मदद करते है।

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First published: June 17, 2015, 3:18 PM IST
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