जयपुर: तीन मरीजों की मौत पर जांच कमेटी का दावा- Oxygen की कमी से नहीं, बीमारी से हुई थी डेथ

जिला हॉस्पिटलों में 100, 150 और 300 सिलेंडर प्रतिदिन की क्षमता वाले तथा जयपुर व अन्य बड़े शहरों 800 से 1000 सिलेंडर क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट लगाए जायंगे.

जिला हॉस्पिटलों में 100, 150 और 300 सिलेंडर प्रतिदिन की क्षमता वाले तथा जयपुर व अन्य बड़े शहरों 800 से 1000 सिलेंडर क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट लगाए जायंगे.

कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में ऑक्सीजन के कम दबाव के कारण मरीजों की मौत के मामले में आरयूएचएस की सफाई सामने आई है. इस मामले में की गई जांच में विशेषज्ञ डाक्टरों के पैनल ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें तीन मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं मानी गई.

  • Share this:

जयपुर. प्रदेश के सबसे बड़े कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में ऑक्सीजन ( oxygen) के कम दबाव के कारण मरीजों की मौत के मामले में आरयूएचएस (RUHS) की सफाई सामने आई है. इस मामले में की गई जांच में विशेषज्ञ डाक्टरों के पैनल ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें तीन मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं मानी गई. कमेटी के मुताबिक तीनों मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, उनकी हालत बिगड़ी तो बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देश पर प्रदेश के प्रमुख कोविड डेडीकेटड सेंटर राजस्थान स्वास्थ्य विश्विद्यालय, आयुर्विज्ञान (आरयूएचएस) में 14 मई को एक साथ 3 मरीजों की हुई मौत के कारणों की जांच करवाई गई. चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया ने जांच के लिये चिकिसकों की 5 सदस्यीय समिति का गठन किया. समिति में अधीक्षक डॉ अजीत सिंह, डॉ पी एस लाम्बा, डॉ पवन सिंघल, डॉ वेदपाल सिंह व डॉ हेमेंद्र भारद्वाज शामिल थे. समिति द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि मौत का कारण गंभीर बीमारी थी. कम दबाव होता तो सभी पर प्रभाव पड़ता.

डॉ अजित सिंहआरयूएएचएस के अधीक्षक डॉ अजीत सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन का दबाव सामान्य था.  इन मरीजों की मौत के वक्त आरी/सारी में 24 मरीज वेंटीलेर या ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. आरयूएचएस में 200 मरीज वेंटीलेटर पर, 60 मरीज एचएफएनसी पर तथा 442 मरीज ऑक्सीजन लाइन पर थे. यदि ऑक्सीजन का दबाव कम होता तो सभी मरीजों पर इसका प्रभाव पड़ता.

तीनों मरीज गंभीर बीमारी से थे ग्रसित
आरयूएएचएस के अधीक्षक डॉ अजीत सिंह ने बताया जिन तीन मरीजों की मौत हुई वो तीनों मरीज बहुत गंभीर थे. चिकित्सक व स्टॉफ उन्हें कई दिनों से बचाने का प्रयास कर रहे थे. एक मरीज के परिजन ने जब ऑक्सीजन सेचुरेशन में उतार चढ़ाव देखा तो वह घबरा गया और उसने शोर मचाना प्रारंभ कर दिया. मरीजों की गंभीर स्थिति देखते हुए वहां मौजूद स्टॉफ व चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया. उनके लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन सिंलेंडर की व्यवस्था भी की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. आरयूएचएस प्रभारी ने कहा कि उक्त घटना की पूर्ण जांच की गई है और जिम्मेदारों से लिखित में पूरी रिपोर्ट प्राप्त की गई है. इससे यह स्पष्ट हुआ है कि 14 मई को हुई तीन मरीजों की मौत ऑक्सीजन का दबाव कम होने से नहीं हुई है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज