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प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद वापस लिया गया छोटी बचतों पर ब्याज में कटौती का फैसला- रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्री और निर्मला सीतारमण  (PTI Photo/Atul Yadav)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्री और निर्मला सीतारमण (PTI Photo/Atul Yadav)

लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की प्रत्येक तिमाही आधार पर समीक्षा होती है और अधिसूचित की जाती है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा बुधवार रात जब छोटी बचतों की ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया गया तो सबके होश फाख्ता हो गए. सोशल मीडिया पर लोगों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया. इसके बाद गुरुवार को सुबह ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस बाबत वित्त मंत्रालय से संपर्क कर निर्देश दिया. फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि यह फैसला भूलवश हो गया है. बंगाल में मतदान शुरू होने के करीब 54 मिनट बाद आया फैसला काफी अहम है. सीतारमण ने सुबह ट्वीट किया, ‘भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर वही रहेगी जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में थी, यानी जो दरें मार्च 2021 तक थीं। पहले दिया गया आदेश वापस लिया जाएगा.’

बुधवार को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नये वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिये लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर ब्याज दर 0.7 प्रतिशत कम कर 6.4 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) पर 0.9 प्रतिशत कम कर 5.9 प्रतिशत कर दी गयी थी.

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PMO ने दिया था दखल
बिजनेस टुडे के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि 'ब्याज दरों में बदलाव की अधिसूचना को वापस लेने का निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय से एकदम सुबह आया. इसके घंटे के दरम्यान ही नए रेट वापस ले लिए गए. यह वास्तव में एक बड़ा मुद्दा बन गया था.'

छोटी बचतों पर ब्याज की कटौती को लेकर हर तिमाही समीक्षा बैठक की जाती है. इसमें करीब एक हफ्ते तक अधिकारी वार्ता करते हैं. इस प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय के अलग-अलग विभाद, आरबीआई, डाक विभाग के अधिकारी भी शामिल होते हैं. वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद ही यह अधिसूचना जारी की जाती है. रिपोर्ट के अनुसार इस सूत्रों ने बताया कि इस बार भी पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था.

कांग्रेस ने जताई एक और  यूटर्न की आशंका
कांग्रेस ने सरकार की ओर से छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें घटाने और फिर अपने इस फैसले को वापस लिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा और सवाल किया कि दरें कम करने का आदेश करने में ‘चूक’ हुई थी या फिर विधानसभा चुनावों के चलते उसे वापस लेना पड़ा. मुख्य विपक्षी पार्टी ने यह भी कहा कि अब निर्मला को वित्त मंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘पेट्रोल-डीज़ल पर तो पहले से ही लूट थी, चुनाव ख़त्म होते ही मध्यवर्ग की बचत पर फिर से ब्याज कम करके लूट की जाएगी. जुमलों की झूठ की. ये सरकार जनता से लूट की!’ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों के बीत जाने के बाद केंद्र सरकार अपना ‘अनर्थशास्त्र’ फिर से लागू करेगी. उन्होंने ट्वीट कर सवाल किया, ‘भारत सरकार की बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने के लिए आदेश जारी करने में ‘चूक’ हुई या फिर चुनावों की वजह से इन्हें वापस लेना पड़ा?’

इससे पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘कल रात में सरकार ने आमजनों की छोटी बचत वाली स्कीमों की ब्याज दरों में कटौती कर दी थी. आज सुबह जब सरकार जागी तो उसको पता चला कि अरे ये तो चुनाव का समय है. सुबह उठते ही सारा दोष "ओवरसाइट" (चूक) शब्द पर मढ़ते हुए सरकार ने ये फैसला वापस ले लिया.’ प्रियंका ने दावा किया, ‘चुनाव है तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम भी नहीं बढ़ रहे हैं. एक बार चुनाव जाने दीजिए भाजपा अपना अनर्थशास्त्र फिर से लागू करेगी.’
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