डिकोडिंग लॉन्ग कोविडः एक्सपर्ट से समझें महिला स्वास्थ्य और पुरुषों की प्रजनन शक्ति पर कोविड का असर

इटैलियन पुरुषों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर काफी असर डालता है. फाइल फोटो

Decoding Long Covid: डॉक्टर अंजली कुमार ने कहा कि कोविड के लंबे समय तक दिखने वाले प्रभाव में बहुत ज्यादा थकान, मांसपेशियों का कमजोर होना, हल्का बुखार और दिमागी स्तर पर फोकस करने में परेशानी, यादाश्त का कमजोर होना, मूड बदलना, सोने में परेशानी, सिरदर्द और आइसोलेशन के साथ अकेलापन महसूस करना.

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    नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अब खात्मे की ओर बढ़ रही है. लेकिन, ऐसे मरीजों की संख्या बेहद ज्यादा है, जिन्होंने लंबे समय तक इस बीमारी को झेला है. इन मरीजों में लंबे समय तक कोविड के लक्षण देखने को मिले हैं, ऐसे में डॉक्टरों ने ऐसे मामलों को 'लॉन्ग कोविड' की संज्ञा दी है. इन परिस्थितियों को अपने पाठकों को समझाने के लिए न्यूज18 ने 15 दिनों तक "डिकोडिंग लॉन्ग कोविड" सीरीज चलाने का फैसला किया है. इस सीरीज में अलग-अलग मामलों की विशेषज्ञ डॉक्टर लॉन्ग कोविड केस पर अपनी बात रखेंगे और लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए अपने सुझाव देंगे.

    इस सीरीज के पहले कॉलम में गुरुग्राम स्थित सीके बिरला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजली कुमार महिलाओं पर कोरोना संक्रमण के असर को समझा रही हैं. कुमार का कहना है कि मानव शरीर पर कोविड का लंबे समय तक असर देखने को मिल रहा है, ऐसे में महिलाओं पर कोविड का असर ज्यादा हो सकता है, क्योंकि उनकी भूमिका बहुआयामी होती है और उन्हें घर की जिम्मेदारियां भी संभालनी होती हैं.

    उन्होंने कहा, "ज्यादातर लोगों में कोविड के हल्के और मॉडरेट केस देखने को मिले हैं, जो समय के साथ ठीक हो जाते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में कोरोना का असर लंबे समय तक रहता है. ऐसे में महिलाओं में इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि उन्हें एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं. जैसे बच्चों की देखभाल, नौकरी और घर संभालना."

    डॉक्टर कुमार ने कहा कि कोविड के लंबे समय तक दिखने वाले प्रभाव में बहुत ज्यादा थकान, मांसपेशियों का कमजोर होना, हल्का बुखार और दिमागी स्तर पर फोकस करने में परेशानी, यादाश्त का कमजोर होना, मूड बदलना, सोने में परेशानी, सिरदर्द और आइसोलेशन के साथ अकेलापन महसूस करना. ये लक्षण लॉन्ग कोविड के केस में लंबे समय तक रह सकते हैं.

    कुमार ने कहा कि जिन महिलाओं को गर्भधारण के दौरान कोरोना संक्रमण हुआ, उन्हें ठीक होने के बाद भी सुस्ती, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सांस में परेशानी महसूस हो सकती है. उन्होंने कहा कि यह कोरोना संक्रमण की चिंता के चलते बढ़ भी सकती है, कि बच्चे पर कोविड का क्या असर होगा. कैसे इलाज होगा और अंत में फाइनल डिलीवरी कैसे होगी, बच्चे का ध्यान कैसे रखेंगे. इन सब चिंताओं के चलते भी महिलाओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. अंजली कुमार ने कहा कि आम तौर पर कोविड संक्रमण की शिकार महिलाओं में अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता देखने को मिली है. जैसे पीरियड का अनियमित हो जाना और प्रजनन से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं.

    उन्होंने कहा कि अस्पतालों में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ की जरूरत है, ताकि दिमागी सेहत के बारे में लोगों का ध्यान रखा जा सके. कुमार ने कहा, "सही सलाह के जरिए इन सभी समस्याओं को हल किया जा सकता है. हम इसमें ऑनलाइन टूल की भी मदद ले सकते हैं और लोगों को जानकारी देकर गाइड सकते हैं कि संक्रमण से ठीक होने के बाद किस तरह खुद का ख्याल रखना है."

    उन्होंने कहा, "हम लोगों की मदद के लिए ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप बना सकते हैं, जो महिलाओं को दूसरों के अनुभवों के जरिए सीखने में मदद कर सकती है." कुमार ने कहा कि हालिया अध्ययनों में यह सामने आया है कि कोविड-19 के चलते पुरुषों में स्तंभन दोष (Erectile Dysfunction) हो सकता है और उनकी प्रजनन शक्ति पर असर हो सकता है. मार्च 2021 में जर्नल एंड्रोलॉजी में ‘Mask up to keep it up’ प्रकाशित रिसर्च पेपर के मुताबिक कोविड संक्रमण के पीड़ित रहे पुरुषों में स्तंभन दोष का संबंध कोविड-19 से हो सकता है.

    इटैलियन पुरुषों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर काफी असर डालता है. इससे रक्त नलिकाओं संबंधी बीमारियां पैदा होती हैं, जो पुरुषों में स्तंभन दोष का कारण बन सकती है. वर्ल्ड जर्नल ऑफ मेन्स हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक इंसानों में शुरुआती संक्रमण के बाद भी कोरोना वायरस पुरुषों के लिंग में लंबे समय तक बना रहता है. अध्ययन के नतीजों में कहा गया कि कोविड के चलते endothelial cell dysfunction के मामले ज्यादा हैं और इससे पुरुषों में स्तंभन दोष की समस्या हो सकती है.

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