क्यों कोरोना से ठीक होने के बाद भी कुछ मरीजों को होती है हार्ट से जुड़ी दिक्कतें?

अध्ययन और विशेषज्ञों का ये भी दावा है कि कोविड-19 से ठीक होने वाले कुछ लोगों में पीओटीएस (पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम) होने की भी संभावना होती है.

अध्ययन और विशेषज्ञों का ये भी दावा है कि कोविड-19 से ठीक होने वाले कुछ लोगों में पीओटीएस (पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम) होने की भी संभावना होती है.

Decoding Long Covid: डॉक्टर के मुताबिक कोविड बीमारी हृदय को प्रभावित करती है. कोरोना के गंभीर मरीज़ों के हार्ट को करीब 20-25% तक नुकसान पहुंचता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 11, 2021, 11:19 PM IST
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(सिमांतनी डे)

नई दिल्ली. कोरोना (Coonavirus) की दूसरी लहर का असर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है. पिछले महीने हर रोज़ करीब 4 लाख नए केस सामने आ रहे थे. लेकिन अब इन दिनों हर दिन संक्रमितों की संख्या एक लाख से कम आ रही है. हालांकि चिंता की बात ये है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोग कई दिक्कतों से परेशान हैं. ऐसी परेशानियों को डॉक्टर 'लॉन्ग कोविड' का नाम दे रहे हैं. यानी वो बीमारियां जो कोरोना के बाद लोगों को परेशान करती हैं. न्यूज़ 18 आज से मरीज़ों की इन्हीं परेशानियों को लेकर एक नई सीरीज़ की शुरुआत कर रहा है. इसके तहत कोरोना से होने वाली बीमारियों के बारे में डॉक्टरों की राय और उससे जुड़े समाधान के बारे में चर्चा की जाएगी.

इस सीरीज़ की पहली कड़ी में हम कोरोना के बाद हार्ट से जुड़ी दिक्कतों के बार में चर्चा करेंगे. आज बेंगलुरू के फोर्टिस अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर राजपाल सिंह कोविड -19 से ठीक होने के बाद हृदय संबंधी जटिलताओं के बारे में बात कर रहे हैं.

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हार्ट को होता है नुकसान

News18 के साथ बातचीत में डॉक्टर सिंह ने कहा, 'कोविड बीमारी हृदय को प्रभावित करती है. कोरोना के गंभीर मरीज़ों के हार्ट को करीब 20-25% तक नुकसान पहुंचता है. इस बात के प्रमाण हैं कि कोरोना का प्रभाव हृदय पर लंबे समय तक रहता है. इससे मरीजों में हार्ट अटैक की आशंका रहती है.'

क्या है हार्ट पर असर के लक्षण



डॉक्टर सिंह ने बताया कि मरीज़ों में हृदय गति रुकने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. जैसे कि भारी काम के दौरान सांस लेने में तकलीफ, बिस्तर पर लेटने में परेशानी या पैरों में सूजन. इसके अलावा, सीने में दर्द, अचानक धड़कन बढ़ना या घटना. या चक्कर आना हो सकता है. यदि कोविड रोगियों के ठीक होने में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो 'इंतजार करने' या घरेलू उपचार की कोशिश करने के बजाय, तुरंत एक डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.


ऐसे रखें ध्यान

अध्ययन और विशेषज्ञों का ये भी दावा है कि कोविड-19 से ठीक होने वाले कुछ लोगों में पीओटीएस (पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम) होने की भी संभावना होती है. POTS सीधे रोगी के हृदय को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन हृदय गति को बढ़ा सकता है, जिससे आगे चलकर ब्रेन फॉग और हल्का सिरदर्द हो सकता है. डॉक्टर ने आगे बताया, 'उपचार के संदर्भ में, रक्त को पतला करने वाली दवाओं और थक्कारोधी के शुरुआती उपयोग से इन सीक्वेल को रोकने और उनका इलाज करने में मदद मिल सकती है. यह आवश्यक है कि ऐसे लक्षणों का अनुभव करने वाले किसी प्रशिक्षित हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें जो उनका उचित मूल्यांकन और उपचार कर सके.'

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