रक्षा मंत्रालय ने पिनाका रॉकेट लांचर खरीदने के लिए 2580 करोड़ का समझौता किया

रक्षा मंत्रालय ने पिनाका रॉकेट लांचर खरीदने के लिए 2580 करोड़ का समझौता किया
पिनाका मिसाइलें 75 किमी दूर मौजूद दुश्मन के परखच्चे उड़ा सकती हैं (फाइल फोटो)

टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) और लार्सन एंड टूब्रो (Larsen & Toubro) के साथ अनुबंध पर दस्तखत किया गया है जबकि रक्षा क्षेत्र के सरकारी उपक्रम (public sector undertaking) भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को भी इस परियोजना का हिस्सा बनाया गया है.

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नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने छह सैन्य रेजिमेंट (Military regiments) के लिए 2580 करोड़ रुपये की लागत से पिनाका रॉकेट लांचर (Pinaka rocket launcher) खरीदने को लेकर सोमवार को दो अग्रणी घरेलू रक्षा कंपनियों (two leading domestic defence majors) के साथ समझौता किया. अधिकारियों ने बतायाा कि पिनाका रेजिमेंट (Pinaka regiments) को सैन्य बलों की संचालन तैयारियां बढ़ाने के लिए चीन और पाकिस्तान (China and Pakistan) के साथ लगती भारतीय सीमा (India's Border) पर तैनात किया जाएगा.

बता दें कि पिनाका मिसाइलें (Pinaka Missiles) 75 किमी दूर मौजूद दुश्मन के परखच्चे उड़ा देने में सक्षम हैं. टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) और लार्सन एंड टूब्रो (Larsen & Toubro) के साथ अनुबंध पर दस्तखत किया गया है जबकि रक्षा क्षेत्र के सरकारी उपक्रम (public sector undertaking) भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को भी इस परियोजना का हिस्सा बनाया गया है. बीईएमएल ऐसे वाहनों की आपूर्ति करेगी जिस पर रॉकेट लांचर (Rocket Launcher) को रखा जाएगा.

रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री ने 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री की परियोजना को मंजूरी दी
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि छह पिनाका रेजिमेंट में ‘ऑटोमेटेड गन एमिंग एंड पोजिशनिंग सिस्टम’(एजीएपीएस) के साथ 114 लांचर और 45 कमान पोस्ट भी होंगे. बयान में कहा गया कि मिसाइल रेजिमेंट का संचालन 2024 तक शुरू करने की योजना है .
इसमें कहा गया कि हथियार प्रणाली में 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परियोजना को मंजूरी दी है .



DRDO ने विकसित किया है आत्मनिर्भर बनाने वाला पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम
यह भी बता दें कि पिनाका मल्टीपल लांच रॉकेट सिस्टम (MLRS) को डीआरडीओ ने विकसित किया है.

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मंत्रालय ने बताया, ‘‘यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो ‘आत्मनिर्भर’ बनने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रदर्शित करती है.’’ डीआरडीओ, रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए नये सिरे से काम कर रहा है.
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