रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए रूसी और भारतीय सैनिकों को याद किया

मास्को में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
मास्को में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

भारत के रक्षा मंत्री राजना​थ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने कहा कि वह रूस के रक्षा मंत्रालय के बुलावे पर यहां आए हैं. उन्होंने कहा कि रूस के लिहाज से यह बहुत ही महत्वपूर्ण मौका है और दुनिया के लिए इसका सांकेतिक महत्व है.

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मास्को. रूस की राजधानी मास्को में 75वीं विजय दिवस परेड (Victory Day Parade) में शामिल होने पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री राजना​थ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने कहा कि वह रूस के रक्षा मंत्रालय के बुलावे पर यहां आए हैं. उन्होंने कहा कि रूस के लिहाज से यह बहुत ही महत्वपूर्ण मौका है और दुनिया के लिए इसका सांकेतिक महत्व है. गौरतलब है कि यहां रूस के विजय दिवस पर भारत की तीनों सेनाएं- थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान भी मार्च में शामिल होंगे. यह परेड 24 जून यानि कल मास्को में आयोजित होनी है. गौरतलब है कि यह साल नाजियों पर विजय की 75वीं वर्षगांठ है और यह जर्मनी के आत्मसमर्पण के जश्न के रूप में मनाया जाता है.

'द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत के लाखों सैनिकों ने भाग लिया था'

राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं द्वितीय विश्वयुद्ध में मारे गए रूसी सैनिकों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत के भी लाखों सैनिकों ने भाग लिया था और हमारे सैनिक भी मारे गए थे.



 



उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रसार के बाद भारत की ओर से पहला प्रतिनिधिमंडल रूस के लिए गया. यह भारत और रूस के बीच विशेष संबंधों को दर्शाता है.

कोरोना वायरस के चलते परेड की तारीख बदली गई

भारत का रूस के साथ गहराते हुए सैन्य संबंधों के मद्देनजर चीन की चिंताएं बढ़ सकती हैं. रूस हर साल विक्टरी डे परेड का आयोजन करता है. इसका आयोजन हर साल नौ मई को होता है लेकिन इस साल यह कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते टल गई है और यह अब 24 जून को होना तय हुई है.

1945 से हो रहा है इस परेड का आयोजन

इस परेड का आयोजन 1945 से होता चला आ रहा है. दरअसल हिटलर की नाजी सेना ने रूस की लाल सेना के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को पिछले साल ही इस जश्न में शामिल होने का न्योता दिया था. पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात व्लादिवोस्तोक में हुई थी. इस परेड में शामिल होने के लिए तीनों सेनाओं के करीब 75-80 जवान 19 जून को मास्को विशेष विमान से पहुंच जाएंगे.

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गलवान घाटी संघर्ष के बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए भारत के साथ बनी सहमति: चीन

भारत और चीन के बीच वर्तमान में सीमा विवाद को लेकर तनाव चल रहा है जबकि चीन के साथ रूस के गहरे सैन्य और राजनीतिक संबंध हैं. इस परेड से संभव है कि चीन को आघात लग सकता है. चीन और अमेरिका के बीच इस समय तनातनी की स्थिति बनी हुई और भारत के अमेरिका के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं. यही वजह है कि भारतीय सेनाओं का मास्को में दमखम का प्रदर्शन करना अच्छा नहीं लग सकता है.
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