VVIP के लिए विशेष रूप से निर्मित बी777 विमान के आने में तकनीकी वजह से देरी

VVIP के लिए विशेष रूप से निर्मित बी777 विमान के आने में तकनीकी वजह से देरी
बी777 विमानों को एयर इंडिया के नहीं, बल्कि वायुसेना के पायलट उड़ायेंगे (सांकेतिक फोटो)

वैसे ऐसी संभावना थी कि वीवीआईपी की यात्रा (VVIP Trip) के लिए ही निर्धारित ये दोनों विमान जुलाई तक मिल जाते लेकिन कोविड-19 (Covid-19) के चलते उनकी आपूर्ति में कुछ सप्ताह की देरी हुई.

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नई दिल्ली. अमेरिका (America) से लाये जा रहे वीवीवाईपी विमान (VVIP Planes) के आने में तकनीकी कारणों (technical issues) से देरी हो गयी है. एयर इंडिया (Air India) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इस विमान को राष्ट्रपति (President), उपराष्ट्रपति (Vice-President) और प्रधानमंत्री (Prime Minister) के लिए उपयोग में लाया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि यह विमान इस माह के शुरू में भारत पहुंचना था और एयर इंडिया के अधिकारी (Air India Officers) विमान निर्माता बोइंग (Boeing) से इस विमान को हासिल करने के लिए इस माह के प्रारंभ में अमेरिका गये थे.

अधिकारियों के अनुसार, अति विशिष्ट जनों (VVIPs) के लिए विशेष रूप से बनाये गये दूसरे विमान बी777 (Aircraft B777) के सितंबर में बोइंग से मिल जाने की संभावना है. वैसे ऐसी संभावना थी कि वीवीआईपी की यात्रा (VVIP Trip) के लिए ही निर्धारित ये दोनों विमान जुलाई तक मिल जाते लेकिन कोविड-19 (Covid-19) के चलते उनकी आपूर्ति में कुछ सप्ताह की देरी हुई.

VVIP यात्रा के दौरान बी777 विमानों को एयर इंडिया के नहीं, वायुसेना के पायलट उड़ायेंगे
एक अधिकारी ने बताया कि वीवीआईपी की यात्रा के दौरान इन दोनों बी777 विमानों को एयर इंडिया के नहीं, बल्कि वायुसेना के पायलट उड़ायेंगे.
फिलहाल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एयर इंडिया के बी 747 में यात्रा करते हैं . उसे एयर इंडिया के पायलट ही उड़ाते हैं और एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड उनका रखरखाव करता है.



केवल अतिविशिष्ट व्यक्तियों के सफर के लिए ही किया जाएगा नये विमानों का उपयोग
नये विमानों का उपयोग केवल अतिविशिष्ट व्यक्तियों के सफर के लिए ही किया जाएगा. इन बी 777 विमानों में अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘‘लार्ज एयरक्राफ्ट इन्फ्रारेड काउंटर मीजर्स’’ और ‘‘सेल्फ प्रोटेक्शन सूट्स’’ होगी.

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फरवरी में अमेरिका इन दोनों रक्षा प्रणालियों (विमानों) को 19 करोड़ डॉलर के मूल्य पर भारत को बेचने पर राजी हुआ था.
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