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राजनाथ की अगुवाई में श्रीनगर पहुंची सर्वदलीय टीम, घाटी में बवाल

पिछले करीब दो महीने से सुलग रही घाटी को देशभर से अमन का पैगाम लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंचा। इस दल में देश के 20 राजनीतिक दलों के करीब 30 सदस्य शामिल हैं।

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    नई दिल्ली। पिछले करीब दो महीने से सुलग रही घाटी को देशभर से अमन का पैगाम लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर पहुंच गया। इस दल में देश के 20 राजनीतिक दलों के करीब 30 सदस्य शामिल हैं। इस दल की अगुवाई केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद कर रहे हैं। बात दें कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खड़गे, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी और एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हैं।

    लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल के यहां पहुंचने से पहले ही जमकर बवाल हुआ। प्रदर्शनकारियों ने शोपियां में मिनी सचिवालय को फूंक दिया। इस दौरान पुलिस-सुरक्षाबलों से झड़प में 100 प्रदर्शनकारी घायल हुए जिनमें 5 की हालत गंभीर है।

    ये दल पिछले करीब 2 महीने से सुलग रही घाटी में एक बार फिर अमन-चैन के रास्ते तलाशेगा। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के लिए हुर्रियत के नेताओं को भी बुलाया गया है। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादी नेताओं को एक चिट्ठी लिखकर बातचीत का न्यौता भेजा है।

    हुर्रियत ने किया इनकार

    महबूबा ने चिट्ठी सैयद अली शाह गिलानी, यासीन मलिक, मीर वाइज उमर फारूक के अलावा कई और नेताओं को भेजी है, लेकिन उन्होंने बातचीत के लिए आने से इनकार कर दिया है। हालांकि जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार राहुल जलाली का मानना है कि हुर्रियत को बातचीत के लिए बुलाना एक सही पहल है और हुर्रियत के लिए भी ये एक बड़ा मौका है।

    पैलेट की जगह पावा शेल गन

    इस दल के पहुंचने से पहले ही सरकार ने घाटी में विवादित पैलेट गन की जगह 1000 पावा शेल गन भेजी, जिससे ये संदेश जाए कि सरकार पेलेट गन को धीरे-धीरे खत्म करने की ओर है। पिछले करीब 2 महीने से भड़की हिंसा को खत्म करने के लिए 20 दलों के 30 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार की रात वापस लौटेगा। उम्मीद यही है कि ये कोशिश रंग लाएगी और घाटी में ये सूनसान सड़कें फिर गुलजार होंगी।

    जम्मू-कश्मीर के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दौरे की पूर्व संध्या पर शनिवार को सरकार ने कहा था कि प्रतिनिधिमंडल दल के सदस्य अलगाववादियों सहित समाज के किसी भी हिस्से से बातचीत करने के लिए स्वतंत्र होंगे, हालांकि सरकार ने इस दो दिवसीय दौरे के दौरान सभी दलों से एक स्वर में अपनी बात रखने का अनुरोध भी किया।

    एक सूत्र के मुताबिक- सरकार चाहती है कि सभी दल न सिर्फ कश्मीर घाटी में शांति बहाली के एकमात्र उद्देश्य को व्यक्त करें बल्कि सभी एक स्वर में अपनी बात रखें। गौरतलब है कि कश्मीर घाटी दो महीने से अस्थिरता और हिंसा के दौर से गुजर रही है।

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