भारत के वो खुशनसीब शहर जहां दीपावली के बाद भी हवा को मिला Good मार्क

दिवाली की रात प्रदूषण का हाल (Photo-ANI)
दिवाली की रात प्रदूषण का हाल (Photo-ANI)

एक तरफ देश के ज्यादातर शहरों में दिवाली की रात चलाए गए पटाखों की वजह से हवा में जहर घुल गया था, वहीं कुछ शहर ऐसे भी थे जिनकी आबोहवा की तारीफ के काबिल थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2020, 8:33 AM IST
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नई दिल्ली. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानीकर्ता संस्था सफर (SAFAR) की साइट पर दिल्ली के नक्शे का रंग गाढ़ा लाल हो गया है, जो प्रदूषण की गंभीर (Delhi Air Pollution) रूप से खतरनाक स्थिति को दर्शाता है. इसकी बड़ी वजह दीपावली (Diwali) की शाम चलाए गए पटाखे हैं. इन्हें चलाने पर प्रतिबंध के बावजूद लोगों ने उसकी धज्जियां उड़ाई गईं. नतीजा ये हुआ कि पहले से खराब दिल्ली की हवा और गंभीर स्थिति में पहुंच गई. औद्योगिक शहर फरीदाबाद में तो दिवाली की रात 10 बजे तक एक्यूआई (AQI) 965 तक पहुंच गया. जबकि, दिवाली के बाद रवीवार को देश के 96 शहरों में हवा बेहद खराब रही. लेकिन 9 ऐसे शहर भी हैं जिनकी हवा तारीफ के काबिल थी.

आईए जानते हैं कि आखिर वो नौ शहर हैं कौन? क्या उनमें लोगों ने पटाखे नहीं चलाए. आखिर ऐसा क्या था कि जब देश के तमाम जिलों के अखबारों के पन्ने बढ़ते प्रदूषण से रंगे पड़े थे तो इन शहरों की आबोहवा बहुत अच्छी स्थिति में थी. जिन शहरों में दिवाली के बाद ‘गुड क्वालिटी’ की हवा रिकॉर्ड की गई है उनमें कर्नाटक के 6 शहर हैं. इन शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से कम रहा है.

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दिवाली के बाद चार बड़े शहरों में प्रदूषण का हाल




पर्यावरणविद् एन. शिवकुमार का कहना है कि साउथ में भी दिवाली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन वहां उत्तर के मुकाबले पटाखे कम चलाए जाते हैं. दीपों पर ज्यादा जोर रहता है. इसके अलावा जिन शहरों की हवा दिवाली के बाद भी बहुत अच्छी रिकॉर्ड की गई है उनमें या तो फॉरेस्ट कवर बहुत अच्छा है या फिर वो कोस्टल एरिया में हैं. वहां हवा अच्छी चलती है. मुख्य बात यह है कि जब तक जंगल नहीं होगा तब तक प्रदूषण की दिक्कत बनी रहेगी. जब दिल्ली-एनसीआर में 2-4 फीसदी ही फॉरेस्ट कवर बचा है तो यहां प्रदूषण कैसे खत्म हो सकता है.
शिलांग की हवा सबसे साफ

दिवाली के बाद देश में सबसे साफ-सुथरी हवा शिलांग (Shillong) शहर की रिकॉर्ड की गई, जहां एक्यूआई सिर्फ 20 रहा. शिलांग मेघायल के ईस्ट खासी हिल्स जिले में पड़ता है और यहां 62.31 फीसदी फॉरेस्ट कवर (Forest Cover) है. यहां अक्सर बारिश होती रहती है.

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जबकि केरल के एर्नाकुलम जिले में आने वाले एलूर शहर में एक्यूआई सिर्फ 37 रिकॉर्ड किया गया. यहां 44.59 फीसदी फॉरेस्ट कवर है. इसी तरह आंध्र प्रदेश के तिरुपति (चित्तूर जिले) में यह 44 के स्तर तक ही रहा. चित्तूर जिले में फॉरेस्ट कवर 21.12 फीसदी है.

कर्नाटक के शहरों ने बनाया रिकॉर्ड

कर्नाटक में भी दिवाली धूलधाम से मनाई गई, लेकिन उसके 6 ऐसे जिले हैं जहां हवा देश में सबसे साफ रही है. इसमें चामराजनगर, चिकबलापुरा में 46-46, रामनगर और बीजापुर में 49-49, मादिकेरी (कोडगु) में 37 और मैसूर में एक्यूआई 39 रिकॉर्ड किया गया. चामराजनगर में 48.23 फीसदी, रामनगर  में 18.90, मैसूर में 16.69  और कोडगु में 79.56 फीसदी फॉरेस्ट कवर है.

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दिवाली की रात एनसीआर के फरीदाबाद में एक्यूआई


एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है?
प्रदूषण की समस्या मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स बनाया गया है. इंडेक्स बताता है कि हवा में पीएम-10, 2.5, PM10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) सहित 8 प्रदूषकों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए मानकों के तहत है या नहीं.

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एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच ‘बेहतर’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है.
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