क्या अरविंद केजरीवाल के मुरीद हो गए हैं उनके साथ विवादों में रहे नजीब जंग!

न्यूज़18 के साथ बातचीत में पूर्व आईएएस अधिकारी जंग ने केजरीवाल की आप सरकार द्वारा किए गए कामों की सराहना की

सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) संग चले अपने लंबे विवाद के बाद दिसंबर 2016 में अचानक एलजी के पद से इस्तीफा देने वाले नजीब जंग (Najeeb Jung) ने कहा मुझे लगता है कि केजरीवाल का दिल बिल्कुल ठीक जगह पर है.

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    (इरम आगा)

    नई दिल्ली.
    दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग (Former LG Najeeb Jung) और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के संबंधों को भयंकर सत्ता संघर्ष का उदाहरण माना जाता है और भारतीय संघवाद के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद युग भी करार दिया जाता है. लेकिन पद छोड़ने के तीन साल बाद जंग, केजरीवाल को लेकर कोई बैर नहीं रखते. न्यूज़18 के साथ बातचीत में पूर्व आईएएस अधिकारी जंग ने केजरीवाल की आप सरकार द्वारा किए गए कामों की सराहना की और कहा कि उन्होंने पिछले एक साल में अपने प्रदर्शन को काफी सुधारा है.

    केजरीवाल संग विवादों के बाद छोड़ा था पद
    सीएम केजरीवाल संग चले अपने लंबे विवाद के बाद दिसंबर 2016 में अचानक एलजी के पद से इस्तीफा देने वाले जंग ने कहा मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल का दिल बिल्कुल ठीक जगह पर है. उन्होंने कहा कि उन दोनों के बीच अब मधुर संबंध हैं और किसी भी प्रकार की कटुता सिर्फ एक अफवाह है.

    उन्होंने कहा कि जब उनके और केजरीवाल के बीच पहले भी मतभेद थे, वे संविधान की व्याख्या के मुद्दों पर थे. उन्होंने कहा, "हमने चीजों को अलग तरह से देखा. मैं उसके लिए उनका सम्मान करता हूं क्योंकि राजनेता अक्सर अपने जैसे प्रशिक्षित सिविल सेवकों से चीजों को अलग तरह से देखते हैं."

    'बेहतर प्रशासक बन गए हैं केजरीवाल'
    केजरीवाल में उन्होंने जो ग्रोथ देखी है उसके बारे में बताते हुए, जंग ने कहा कि वह पिछले एक साल में "बहुत-बहुत बेहतर" प्रशासक बन गए हैं, क्योंकि उन्होंने सरकार के लिए सिविल सेवकों को अपने साथ रखने के लिए महत्व के बारे में बात की है. उन्होंने कहा मुझे लगता है "उन्होंने छह साल में सीखा है."

    69 वर्षीय जंग ने कहा कि अगर केजरीवाल ने शुरू से ही सिविल सेवकों को अपने साथ रखा होता तो दिल्ली के सीएम आज से कहीं अधिक सफल रहे होते. उन्होंने News18 को बताया "इतनी कम उम्र में 67 सीटें हासिल करने बाद उनका शुरुआती उत्साह आक्रामकता में तब्दील हो गया. मुझे लगता है कि यह आवश्यक नहीं था." लेकिन अगर इसको दरकिनार कर दें तो उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है. मैं मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयासों की तहे दिल से इज्जत करता हूं.

    'और बेहतर काम कर सकती थी दिल्ली सरकार'
    दिल्ली एलजी के रूप में कई मुद्दों पर जंग और केजरीवाल के बीच तनातनी देखने को मिली थी. इनमें से सबसे अधिक दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार-निरोध ब्यूरो, नौकरशाहों की नियुक्ति और अधिकारियों के स्थानांतरण, दोनों पक्षों को अक्सर अदालतों का रुख करने के लिए मजबूर करना और दिल्ली के शासन में होने वाली मुश्किलें सबसे विवादास्पद रहीं.

    इस पर विचार करते हुए जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के कुलपति रह चुके नजीब जंग ने कहा कि AAP सरकार ने और भी बेहतर प्रदर्शन किया होगा, अगर उनके साथ उनकी पसंद की ब्यूरोक्रेसी होती.

    जंग ने कहा "यह उनके (केजरीवाल) के लिए केवल एक बाधा थी क्योंकि सिविल सेवकों के साथ उनके संबंध कभी भी अच्छे नहीं थे. उन्हें जल्दी काम करने की इच्छा थी: सिस्टम को जल्दी काम करना चाहिए लेकिन सिस्टम की अपनी गति है. आप शॉर्टकट प्रक्रिया नहीं अपना सकते हैं." जंग ने यह भी कहा, "हम जल्दी काम करने के लिए सिस्टम विकसित कर सकते हैं, लेकिन उस समय सिविल सेवक अरविंद के मुताबिक काम करने के लिए तैयार नहीं थे. यह उनके अपने प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है."

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