किसान बिल का विरोध करने वाले रिटायर्ड अधिकारियों को मनाने की बीजेपी की अनूठी पहल

सेवानिवृत अदिकारी सुरेश गोयल के घर पहुंचे दिल्ली बीजेपी के महासचिव  कुलजीत चहल.

सेवानिवृत अदिकारी सुरेश गोयल के घर पहुंचे दिल्ली बीजेपी के महासचिव कुलजीत चहल.

सुरेश गोयल से मिलने के बाद उत्साहित बीजेपी की टीम ने इसी लिस्ट में शामिल अशोक वाजपेयी और राजू शर्मा से बात कर मिलने का समय मांगा. लेकिन इन दोनों रिटायर्ड अधिकारियों ने किसी न किसी बहाने से बीजेपी की टीम से मिलने से इनकार कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 8:47 PM IST
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जैसा कि पिछले कई आंदोलनों में हुआ जब कई रिटायर्ड अधिकारियों से लेकर बुद्धिजीवियों ने खुला खत लिखकर मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया था. इस बार फिर कुछ ऐसा ही हुआ. किसानों का आंदोलन शुरू होते ही एक बार फिर पुराना सिलसिला चल पड़ा. शुरुआत दिसंबर में ही हो गयी जब 78 रिटायर्ड अधिकारियों ने मोदी सरकार के खिलाफ़ खुला खत लिख दिया.

इस बार बीजेपी तैयार थी. किसान बिल के समर्थन में न सिर्फ रिटायर्ड अधिकारी बल्कि रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश तक सामने आए. लेकिन मुहिम सिर्फ समर्थकों को सामने लाने पर नही रुकी. दिल्ली बीजेपी के महासचिव कुलजीत चहल और उनकी टीम ने माथापच्ची की. उन्होंने माना कि किसानों को लेकर इन रिटायर्ड अधिकारियों की चिंता तो ठीक है लेकिन इस एजेंडा पर आधारित प्रोपेगैंडा को फैलने से रोकना है.

इसका जवाब मिल गया. कुलजीत चहल और उनकी टीम ने इन रिटायर्ड अधिकारियों को ढूंढ कर उनसे मिलने का कार्यक्रम बनाया. शुरुआत इन्होंने की दिल्ली और एनसीआर के इलाके से. सबसे पहले शुरुआत की रिटायर्ड विदेश सेवा के अधिकारी सुरेश गोयल के घर जाकर. बीजेपी की टीम ने उनसे कृषि सुधार बिल को लेकर चर्चा की. उन्हें सरकार द्वारा जारी पुस्तिका भी भेंट की. गोयल साहब ने उन्हें बताया कि उन्होंने इस बिल को पूरा नहीं पढ़ा है. वो इसे तसल्ली से पूरा पढ़ेंगे और अपनी राय बनाएंगे.

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सुरेश गोयल से मिलने के बाद उत्साहित बीजेपी की टीम ने इसी लिस्ट में शामिल अशोक वाजपेयी और राजू शर्मा से बात कर मिलने का समय मांगा. लेकिन इन दोनों रिटायर्ड अधिकारियों ने किसी न किसी बहाने से बीजेपी की टीम से मिलने से इनकार कर दिया.

लेकिन दिल्ली बीजेपी के इन नेताओं ने हिम्मत नहीं हारी है. वे पूरी लिस्ट में से एक-एक नाम से संपर्क साधने में लगे हैं. कुलजीत चहल का मानना है कि इस आउटरीच के कार्यक्रम से विरोध करने वालों को भी साथ लाया जा सकता है. अगर दिल्ली और एनसीआर में ये सफल रहते हैं तो आने वाले दिनों में बीजेपी भी ऐसे प्रयास देश के बाक़ी हिस्सों में करेगी. आखिर विरोध करने वालों को समझना और समझाना भी तो राजनीति ही है.
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