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प्रदूषण से घुट रहा दिल्‍ली का दम, किसानों को पराली जलाने से नहीं रोक पाईं सरकारें

News18Hindi
Updated: October 30, 2019, 5:25 PM IST
प्रदूषण से घुट रहा दिल्‍ली का दम, किसानों को पराली जलाने से नहीं रोक पाईं सरकारें
करनाल का वायु गुणवत्‍ता सूचकांक (AQI) 20 अक्‍टूबर को 342 था. इस दिन दिल्‍ली का एक्‍यूआई भी इसी स्‍तर पर पहुंच गया था.

पंजाब (Punjab) में इस साल 23 सितंबर से 27 अक्‍टूबर के बीच पराली जलाने (Stubble Burning) के 12,027 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान पराली जलाने की घटनाओं से 2,427 ज्‍यादा हैं. वहीं, हरियाणा (Haryana) में इस साल 3,705 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए, जो पिछले साल 3,705 थे.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 5:25 PM IST
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अंगना चक्रवर्ती

नई दिल्‍ली. पिछले कुछ दिनों में राष्‍ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्‍तर बहुत बुरी तरह बिगड़ा है. ऐसे में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आप का कहना है कि केंद्र और दोनों राज्‍यों की सरकारें पराली जलाने (Stubble Burning) वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने में नाकाम रहीं. इसके बाद दिपावली पर जमकर हुई आतिशबाजी ने भी दिल्‍ली की 'हवा खराब' कर दी.

पंजाब-हरियाणा में बढ़े पराली जलाने के मामले
पंजाब (Punjab) में इस साल 23 सितंबर से 27 अक्‍टूबर के बीच पराली जलाने के 12,027 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान पराली जलाने की घटनाओं से 2,427 ज्‍यादा हैं. वहीं, हरियाणा (Haryana) में इस साल 3,705 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए, जो पिछले साल 3,705 थे. यही नहीं, पिछले 24 घंटे में ही पराली जलाने के 2,577 मामले रिकॉर्ड किए गए हैं. इससे एक दिन पहले पराली जलाने के 1,654 मामले सामने आए थे. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि धान की रोपाई जल्‍दी होने के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है.

आप ने राज्‍य सरकारों को ठहराया जिम्‍मेदार
आप नेता दिलीप पांडे (Dilip Pandey) और आतिशी (Aatishi) ने हरियाणा और पंजाब सरकारों को बढ़ते हुए वायु प्रदूषण व पराली जलाने से रोकने में नाकामी के लिए दोषी ठहराया है. उन्‍होंने हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश और पंजाब सरकार की ओर से इससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर चिंता जताई. इन तीनों राज्‍यों को 2018 में केंद्र सरकार ने 555 करोड़ रुपये राहत पैकेज (Relief Package) के तौर पर दिए थे. इनमें हरियाणा को 137.84 करोड़, उत्‍तर प्रदेश को 148.60 करोड़ और पंजाब को 269.38 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया गया था. वायु प्रदूषण बढ़ने और पराली जलाने में आई तेजी के कारणों की News18 ने पड़ताल की.

करनाल में सबसे ज्‍यादा जलाई गई पराली
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पराली जलाना आईपीसी (IPC) और वायु प्रदूषण नियंत्रण कानून, 1981 के तहत अपराध (Crime) है. बावजूद इसके पंजाब और हरियाणा में किसान (Farmers) पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. हरियाणा सरकार के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, करनाल (Karnal) में सबसे ज्‍यादा पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. इस क्षेत्र में 20 अक्‍टूबर तक 834 पराली जलाने के मामले रिकॉर्ड किए गए. करनाल का वायु गुणवत्‍ता सूचकांक (AQI) 20 अक्‍टूबर को 342 था. इस दिन दिल्‍ली का एक्‍यूआई भी इसी स्‍तर पर पहुंच गया था.

पिछले सप्‍ताह हरियाणा में किसानों के खिलाफ पराली जलाने की 85 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. इनमें 51 शिकायतें सिर्फ करनाल में ही दर्ज हुई थीं.


चुनावों में व्‍यस्‍तता के कारण कार्रवाई में देरी
पिछले सप्‍ताह हरियाणा में किसानों के खिलाफ पराली जलाने की 85 शिकायतें (Complaints) दर्ज कराई गई थीं. इनमें 51 शिकायतें सिर्फ करनाल में ही दर्ज हुई थीं. करनाल के कृषि विभाग (Agriculture Department) के उप-निदेशक आदित्‍य डबास ने कहा कि राजस्‍व विभाग (Revenue Department) चुनाव कार्यक्रम (Election Duty) में व्‍यस्‍त था. इसलिए दर्ज 51 शिकायतों पर कार्रवाई करने में देरी हुई. आंकड़े मिलने के बाद हम हर किसान के खिलाफ जांच शुरू करेंगे. शेखपुरा गांव के नजदीकी थाने के अधिकारी भी इलेक्‍शन ड्यूटी और पराली जलाने की शिकायतों के बढ़ते बोझ के बीच झूल रहे थे. थाने के एसएचओ ने कहा कि पराली जलाने वाले खेतों (Fields) की पहचान कर ली गई है.

एफआईआर दर्ज करने को ढूंढे जा रहे खेतों के मालिक
एसएचओ ने कहा कि अब इन मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज करने के लिए इन खेतों के मालिकों के नाम ढूंढे जा रहे हैं. इसमें राजस्‍व विभाग हमारी मदद कर रहा है. हम हर किसाने के पास जा रहे हैं. इस बीच किसानों का कहना है कि उनके पास पराली में आग लगाने के अलावा कोई दूसरा विकल्‍प ही नहीं है. उनका कहना है कि एक माचिस एक रुपये में आ जाती है, जबकि हैप्‍पी सीडर्स 1.5 लाख रुपये लेते हैं. आप हमसे किसे चुनने की उम्‍मीद करते हैं. स्‍थानीय किसान सूरज सिंह ने कहा कि हम मशीनें किराये पर लेना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए हमें अतिरिक्‍त डीजल और नए ट्रैक्‍टरों की जरूरत होगी.

किसानों का कहना है कि धान की कटाई और गेहूं की बुआई के बीच बहुत कम समय मिलता है. ऐसे में हैप्‍पी सीडर्स का इंतजार नहीं किया जा सकता.


'हम हैप्‍पी सीडर्स का इंतजार नहीं कर सकते हैं'
सूरज सिंह कहते हैं कि धान की कटाई और गेहूं की बुआई के बीच बहुत कम समय मिलता है. हमें गेहूं की बुआई के लिए जल्‍द से जल्‍द खेत खाली करना होता है. हम हैप्‍पी सीडर्स (Happy Seeders) का इंतजार नहीं कर सकते हैं. वहीं, पंजाब में भी पराली जलाने के मामलों में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है. बावजूद इसके कोई चालान जारी नहीं किया गया है. राज्‍य के अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव विश्‍वजीत खन्‍ना का कहना है कि चालान और एफआईआर के बजाय किसानों को इस मामले में शिक्षित करना ज्‍यादा जरूरी है.

हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं हैं सभी मशीनें
पंजाब और हरियाणा की सरकारें केंद्र सरकार की ओर से मिले राहत पैकेज से ज्‍यादातर राशि खर्च कर चुकी हैं. पंजाब में कृषक समूह और कस्‍टम हायरिंग सेंटर्स को 43,000 मशीनें बांटी जा चुकी हैं, जो पराली प्रबंधन के लिए इस्‍तेमाल की जाती हैं. पंजाब सरकार इस साल 10,000 नई मशीनें भी सौंपने वाली है. हरियाणा में 232 सेंटर्स और 2,000 किसानों को मशीनें दी जा चुकी हैं. कुरुक्षेत्र कृषि विभाग के उप-निदेशक प्रदीप मील ने कहा कि सभी मशीनें हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं हैं. ये मशीनें सब्‍जी की पैदावार वाले खेतों में प्रभावी नहीं हैं. वहीं, हैप्‍पी सीडर्स को अपने काम के लिए तय नमी की जरूरत होती है. अगर उसे कम या ज्‍यादा नमी होगी तो बची हुई पराली मशीनों से काटना मुश्किल है.
(News18 के रौनक कुमार गुंजन के इनपुट के साथ)

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First published: October 30, 2019, 5:25 PM IST
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