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Delhi Election Result 2020: मतगणना जारी, मुख्‍यमंत्री तय, लेकिन क्‍या असल में बदलेगी दिल्‍ली की किस्‍मत

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 2:57 PM IST
Delhi Election Result 2020: मतगणना जारी, मुख्‍यमंत्री तय, लेकिन क्‍या असल में बदलेगी दिल्‍ली की किस्‍मत
दिल्‍ली में मतगणना के अब तक के रुझान में बीजेपी बड़ी जीत हासिल कर फिर सत्‍ता पर काबिज होती नजर आ रही है.

Delhi Election Result 2020: इस चुनाव का सबसे दुखद पहलू यही है कि हम अब भी चर्चा कर रहे हैं कि शाहीद बाग (Shaheen Bagh) को क्‍या हो गया? शाहीन बाग आंदोलन का चुनाव पर कितना असर पड़ा है? इस बार के चुनाव में विकास (Development) का मुद्दा ज्‍यादातर सियासी दलों के लिए चुनावी नारा भर रहा है. किसी दल ने आगे की विकास योजनाओं पर चर्चा नहीं की.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 2:57 PM IST
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सिद्धार्थ मिश्रा

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2020 (Delhi Assembly Election 2020) के लिए शनिवार को हुई वोटिंग के बाद आज यानी मंगलवार को मतगणना (Vote Counting) शुरू हो चुकी है. सभी 70 सीटों के रुझान लगातार आ रहे हैं. अब तक के रुझानों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (AAP) फिर से दिल्‍ली की सत्‍ता पर काबिज होती नजर आ रही है. बीजेपी (BJP) पिछली बार से बहुत बेहतर प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस (Congress) फिर खाता खोलने में नाकाम होती दिख रही है. इस सबके बीच सवाल यही है कि क्‍या दिल्‍ली और दिल्‍ली वालों की किस्‍मत वास्‍तव में बदलेगी. दिल्‍ली हमेशा से विकास के नाम पर वोट करती आई है, लेकिन इस बार सभी दलों के लिए ये चुनावी नारा भर रहा.

केजरीवाल का दावा, पहली बार मांगे गए विकास कार्यों पर वोट
मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मतदान से पहले दर्जनभर हिंदी-अंग्रेजी मीडिया संस्‍थानों को दिए इंटरव्‍यू में दावा किया कि 70 साल में पहली बार दिल्‍ली के लोगों से किए गए विकास कार्यों (Development Work) के आधार पर वोट डालने की अपील की गई. बता दें कि मंडल कमीशन के दौर के बाद देश की राजनीति में विकास का मुद्दा हावी हुआ. दक्षिण भारत में चंद्रबाबू नायडू, वाईएस राजशेखर रेड्डी, पूर्व में नवीन पटनायक और बिहार में नीतीश कुमार विकास के नाम पर ही जीतकर सत्‍ता में आए. हिंदीभाषी राज्‍य मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) में दिग्विजय सिंह व शिवराज सिंह चौहान, छत्‍तीसगढ़ (Chhattisgarh) में रमन सिंह और दिल्‍ली (Delhi) में शीला दीक्षित 1998, 2003, 2008 में विकास के एजेंडा पर जीत हासिल की.

दिल्‍ली के सीएम ने अपने विकास कार्यों पर किया चुनाव प्रचार
लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में आम आदमी पार्टी को दिल्‍ली में महज 18 फीसदी वोट मिले. इससे उन्‍होंने सीख लेते हुए केंद्र सरकार (Central Government) से टकराव खत्‍म किया और अपने विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाया. उन्‍होंने बिजली और पानी के बिल में कमी करने के फैसलों का प्रचार किया. इस रणनीति ने लोगों का रुझान केजरीवाल के पक्ष में किया. जब बीजेपी को लगा कि केजरीवाल के विकास के दावों को झुठलाना मुश्किल होगा तो उन्‍होंने दिल्‍ली के सीएम को दूसरे मुद्दों में उलझाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया. इस दिशा में शाहीन बाग (Shaheen Bagh) के प्रदर्शन ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया. बीजेपी ने इसे हिंदुओं पर हमले के तौर पर प्रचारित किया.

बीजेपी ने आखिरी समय पर आक्रामक चुनाव प्रचार किया. खुद गृह मंत्री अमित शाह मैदान में उतरे और लोगों से संवाद किया. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी जनसभाएं कीं.
आक्रामक प्रचार से बीजेपी को मिली थोड़ी ऑक्‍सीजन
आप ने दिल्‍ली में कानून-व्‍यवस्‍था (Law and Order) केंद्र सरकार के अधीन होने का हवाला देकर गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी. इसके बाद शाहीन बाग के प्रदर्शन में आप विधायक अमानतुल्‍ला खान (Amanatullah Khan) का नजर आए तो बीजेपी अरविंद केजरीवाल पर हमलावर हो गई. इस सबके बीच आप को कभी नहीं लगा कि शाहीन बाग से बीजेपी को किसी तरह की ऑक्‍सीजन मिल सकती है. हालांकि, बीजेपी नेताओं का आक्रामक प्रचार, गृह मंत्री अमित शाह समेत पूरी पार्टी का एकसाथ मैदान में उतरना और संघ (RSS) कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल को थोड़ा हिला दिया था. इस दौरान बीजेपी कुछ हावी नजर आई.

केजरीवाल ने राममंदिर ट्रस्‍ट पर टिप्‍पणी से किया परहेज
केजरीवाल ने बीजेपी के हिंदुत्‍व के एजेंडे से बचने के लिए राम मंदिर ट्रस्‍ट (Ram Mandir Trust) के गठन पर कोई बयान नहीं दिया. इसके अलावा अपने चुनाव घोषणापत्र में स्‍कूली पाठ्यक्रम में देशभक्ति पढ़ाने का प्रस्‍ताव शामिल कर दिया. कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पूर्व मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के नाम पर वोट मांगे. ये उन्‍होंने उनके बेटे संदीप दीक्षित (Sandeep Dikshit) को पूरी तरह किनारे करने के बाद किया, जबकि वह कांग्रेस के लिए प्रभावशाली प्रचारक साबित हो सकते थे.

केंद्र सरकार और दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में लगातार टकराव की स्थिति बने रहने का नुकसान दिल्‍ली को हुआ. अब देखना होगा ि‍कि इस बार क्‍या होता है.


प्रदूषण, डीटीसी की बसों का जैसे मुद्दे रहे गायब
इस सब के बीच सबसे दुखद बात यही है कि हम अब भी शाहीन बाग पर चर्चा कर रहे हैं. हम यह चर्चा नहीं कर रहे कि मेट्रो प्रोजेक्‍ट (Metro Projects) कैसे पूरे होंगे. हम दिल्‍ली को गैस चैंबर बनने से रोकने के लिए सरकार की योजना पर चर्चा नहीं कर रहे हैं. चुनाव के दौरान और यहां तक कि आज भी हम इस पर बात नहीं कर रहे कि दिल्‍ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) के बेड़े में बसों की संख्‍या कैसे और कब बढ़ेगी. बीजेपी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार और आम आदमी पार्टी की दिल्‍ली सरकार के बीच सियासी टकराव के कारण राष्‍ट्रीय राजधानी के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से जुड़े काम अटके रहे. यही नहीं राजधानी की फाइनेंशियल ग्रोथ (Financial Growth) भी प्रभावित हुई. अब जब साफ है कि दिल्‍ली में फिर केजरीवाल सरकार होगी तो ये भी साफ है कि हालात फिर पुराने ही होंगे. कहा जा सकता है कि दिल्‍ली के भविष्‍य पर अगले पांच साल तक आशंकाओं के बादल मंडराते रहेंगे.
(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्‍लेषक हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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First published: February 11, 2020, 2:48 PM IST
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