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चांदनी चौक विधानसभा सीट से अलका लांबा की हार, नहीं चली राजनीति की पुरानी स्टाइल

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 3:56 PM IST
चांदनी चौक विधानसभा सीट से अलका लांबा की हार, नहीं चली राजनीति की पुरानी स्टाइल
दिल्ली विधानसभा चुनाव २०२०, नई दिल्ली विधानसभा सीट : अलका लांबा (Alka Lamba), कांग्रेस

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम 2020: दिल्ली चुनाव में चांदनी चौक विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं अलका लांबा

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  • Last Updated: February 11, 2020, 3:56 PM IST
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दिल्ली की हाईप्रोफाइल सीट चांदनी चौक से कांग्रेस उम्मीदवार अलका लांबा को हार का सामना करना पड़ा है. चांदनी चौक से आप उम्मीदवार प्रहलाद साहनी चुनाव जीत गए हैं. चांदनी चौक में इस बार बीजेपी और आप की कड़ी टक्कर की वजह से अलका लांबा के लिए मुकाबला मुश्किल हो गया था.

हालांकि साल 2015 के विधानसभा चुनाव में अलका लांबा चांदनी चौक से चुनाव जीती थीं लेकिन उस वक्त वो आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार थीं. लेकिन इस बार घर वापसी करते हुए कांग्रेस के टिकट पर चांदनी चौक से दोबारा चुनाव लड़ना उन्हें जीत नहीं दिला सका. इस बार कांग्रेस में उनकी घरवापसी उनके लिए बेहतर हालात नहीं बना सकीं. अलका को स्थानीय वोटरों ने स्थानीय मुद्दों पर खारिज़ कर दिया.

अल्का लांबा ने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर शुरु की. 1994 में वो एनएसयूआई से जुड़ी और ऑल इंडिया गर्ल कन्वेनर के रूप में काम किया. एक साल बाद ही 1995 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष का चुनाव जीता. इसके बाद 1997 में अलका एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं. साल 2002 में अलका लांबा को राजनीति का बड़ा ब्रेक मिला. उन्हें अखिल भारतीय महिला कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया. इसके बाद साल 2006 में वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हिस्सा बनीं और उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया. 2007 इन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का भी सचिव बनने का मौका मिला.

लेकिन साल 2013 में दिल्ली में आई आप की आंधी को देखकर अलका लांबा ने राजनीति की राह बदलने का फैसला किया. उन्होंने कांग्रेस का हाथ झटक कर आप की झाड़ू थाम ली. 2015 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी ने टिकट दिया. अलका लांबा चांदनी चौक से चुनाव जीतकर पहली दफे विधायक बनीं. हालांकि साल 2003 में अलका लांबा को मोती नगर से कांग्रेस ने टिकट दिया था. लेकिन उन्हें बीजेपी के कद्दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

अलका लांबा का विवादों के साथ भी रिश्ता काफी गहराया. कभी निजी तो कभी सार्वजनिक जीवन की कुछ विवादित घटनाओं ने उनकी राजनीतिक पारी पर असर डाला.

आम आदमी पार्टी में अलका लांबा प्रवक्ता के पद पर रहीं. लेकिन आप के वरिष्ठ नेता गोपाल राय को लेकर उनके विवादित बयानों की वजह से उन्हें प्रवक्ता पद से हाथ धोना पड़ गया था. उससे पहले 2012 में गुवाहाटी छेड़छाड़ मामले में उन्होंने पीड़ित लड़की का नाम सार्वजनिक कर नया विवाद खड़ा कर दिया था. वहीं साल 2015 में अलका लांबा पर बीजेपी विधायक ओपी शर्मा की दुकान में तोड़फोड़ करने का भी आरोप लगा था. राजनीति के अलावा अलका लांबा 'गो इंडिया फाउंडेशन' नाम का एनजीओ भी संचालित करती हैं. 15 अगस्त 2010 को उनके एनजीओ ने एक रक्त दान अभियान के जरिए 65 हज़ार लोगों को रक्त दान किया था. इसका अलका के एनजीओ को बॉलीवुड से भी भरपूर समर्थन मिला था.

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First published: February 11, 2020, 3:51 PM IST
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