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बल्लीमारान विधानसभा सीट से हारून युसूफ की दूसरी हार की ये है बड़ी वजह

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 3:59 PM IST
बल्लीमारान विधानसभा सीट से हारून युसूफ की दूसरी हार की ये है बड़ी वजह
दिल्ली विधानसभा चुनाव २०२०, नई दिल्ली विधानसभा सीट: हारून युसूफ, (Haroon Yusuf), कांग्रेस

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम 2020: हारुन युसूफ - बल्लीमारान विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं

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  • Last Updated: February 11, 2020, 3:59 PM IST
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दिल्ली में चांदनी चौक लोकसभा सीट के तहत आने वाली बल्लीमारान सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हारून युसूफ चुनाव हार गए हैं. हारून युसूफ को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है.

कांग्रेस के कद्दावर नेता हारून युसूफ बल्लीमारान से 5 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. 1993 से 2013 तक लगातार हारून युसूफ बल्लीमारान सीट से चुनाव जीतते रहे हैं.हालांकि 2015 में उनकी जीत के सिलसिले पर आम आदमी पार्टी ने ब्रेक लगा दिया था. आप उम्मीदवार इमरान हुसैन के हाथों उनकी हार हुई थी और वो तीसरे नंबर पर रहे थे.

सेंट्रल दिल्ली की मुस्लिम बहुल सीट पर हारून युसूफ कांग्रेस का मजबूत चेहरा रहे हैं. लेकिन इमरान हुसैन को सत्ताधारी आप के कामों और बिजली-पानी पर सब्सिडी देने का फायदा साफतौर पर जहां मिला तो वहीं सीएए के मुद्दे पर शाहीन बाग को लेकर आप के रुख का भी फायदा मिला. जबकि हारून युसूफ कांग्रेस की पुरानी विरासत के बूते अपने जनाधार को वोट में तब्दील नहीं कर सके.

हारुन युसूफ कांग्रेस पार्टी के वो वफादार सिपाही हैं जो साल 1988 से लगातार कांग्रेस पार्टी में बने हुए हैं. पिछले 25 साल से जनता का विश्वास जीतते आ रहे हारुन युसूफ वर्तमान में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. छात्र जीवन से ही हारुन युसूफ राजनीति में रूचि रखते थे और पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1988 में ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के सेक्रेट्री चुने गए. साल 1989 में हारुन युसूफ को ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस का ज्वाइंट सेक्रेट्री बनाया गया. युवावस्था से ही हारून युसूफ को कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं और वो बखूबी निर्वाह करते रहे.

हारुन पहले वो शख्स हैं जो वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के तौर पर साल 1999 में चुने गए और साल 2004 तक इस पद पर बने रहे. साल 2001 में उनकी प्रतिभा और लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें दिल्ली सरकार में सिंचाई,रेवेन्यू और फ्लड कंट्रोल जैसे विभाग की जिम्मेदारी सौंपी. हारुन का सियासी इतिहास ये साबित करता है कि इलाके के लोगों की पहली पसंद 'हरून भाई' ही रहे लेकिन बदलती सियासत और कांग्रेस के हालात के चलते हारून को अपनी ही विरासत को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा.

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First published: February 11, 2020, 1:44 PM IST
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