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Delhi Election Result 2020: पटेल नगर (PATEL NAGAR) सीट से कृष्णा तीरथ की हार की ये रही बड़ी वजह

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 6:55 PM IST
Delhi Election Result 2020: पटेल नगर (PATEL NAGAR) सीट से कृष्णा तीरथ की हार की ये रही बड़ी वजह
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 - कृष्णा तीरथ पटेल नगर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 - कृष्णा तीरथ पटेल नगर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं

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  • Last Updated: February 11, 2020, 6:55 PM IST
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पटेल नगर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार और कद्दावर नेता कृष्णा तीरथ चुनाव हार गई हैं. पटेलनगर सीट पर आप उम्मीदवार राजकुमार आनंद ने जीत हासिल की है. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी प्रवेश रत्न को 30935 मतों से हराया.  कृष्णा तीरथ तीसरे नंबर पर रहीं. इस हार के साथ ही कृष्णा तीरथ का कांग्रेस में वापसी के बाद अपने पुराने गढ़ से जीत का सपना चूर-चूर हो गया.

पटेल नगर कभी कृष्णा तीरथ का अभेद्य दुर्ग हुआ करता था लेकिन कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने से उनके समर्थका और प्रभाव इलाके में कम होता चला गया. कुछ समय बाद कांग्रेस में वापसी के बावजूद कृष्णा तीरथ इलाके में पुराना रुतबा हासिल नहीं कर सकीं और इस बार भी चुनाव में उन्हें अपने ही घर में हार का स्वाद चखना पड़ा.

पटेल नगर सीट से कृष्णा तीरथ लगातार साल 1993,1998 और 2003 में तीन बार कांग्रेस पार्टी की तरफ से विधायक बनीं. पटेल नगर सीट से वो लगातार बीजेपी को पटखनी देने का काम कर रही थीं. लेकिन साल 2015 में कृष्णा तीरथ ने कांग्रेस का हाथ झटक कर बीजेपी का कमल थाम लिया था. हालांकि बीजेपी में शामिल होने का  फैसला उन्हें भारी पड़ा और वो साल 2015 का विधानसभा चुनाव हार गई. पटेल नगर सीट से उन्हें पहली बार 2015 में आम आदमी पार्टी के हजारी लाल चौहान से हार का सामना करना पड़ा. हजारी लाल चौहान ने कृष्णा तीरथ को 34,638 वोटों से हराया था. लेकिन 4 साल बाद उन्होंने घर वापसी की और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा.

कृष्णा तीरथ का जन्‍म 3 मार्च 1955 को दिल्‍ली के करोलबाग में हुआ. उन्होंने साल 1983 में महानगर पार्षद के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. 1984 में वो पहली बार दिल्ली से विधायक चुनी गईं. इसके बाद वो साल 2004 तक दिल्ली में विधानसभा की सदस्य रहीं. साथ ही उन्होंने दो बार लोकसभा का चुनाव भी जीता.

दिल्ली की राजनीति में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ही उन्हें शीला सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री बनने का मौका मिला. बाद में उन्होंने दिल्ली विधानसभा स्पीकर की भी जिम्मेदारी संभाली. ऐसा कहा जाता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ मतभेदों की वजह से उन्हें मंत्रीपद छोड़ना पड़ा था. बाद में पार्टी में अनदेखी की वजह से कृष्णा तीरथ ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी लेकिन 4 साल में ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया था.

कृष्णा तीरथ को दो बार दिल्ली से लोकसभा सांसद बनने का गौरव हासिल हुआ. 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी की अनीता आर्या को हराया जबकि 2009 में बीजेपी की मीरा कांवरिया को हराकर वो सांसद बनीं. कृष्णा तीरथ को यूपीए सरकार के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री बनाया गया. उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई.

दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष ने कृष्णा तीरथ को दिल्ली की राजनीति में एक पहचान दी. एक समय दिल्ली के कांग्रेस के टॉप लीडर्स में कृष्णा तीरथ शुमार करती थीं.

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First published: February 11, 2020, 12:04 PM IST
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