दिल्ली हाईकोर्ट ने हार्पर कॉलिंस को आसाराम पर किताब छापने की छूट दी

किताब में यह भी खुलासा किया गया है किस तरीके से आसाराम पुलिस अफसरों को खरीदने की कोशिश की थी (फाइल फोटो)
किताब में यह भी खुलासा किया गया है किस तरीके से आसाराम पुलिस अफसरों को खरीदने की कोशिश की थी (फाइल फोटो)

हालांकि प्रकाशन के दौरान हार्पर कॉलिंस को एक फ्लायर छापना होगा, जिस पर लिखा होगा कि संचिता गुप्ता की अपील राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है, और किताब की प्रतियों को बेचते हुए यह जानकारी वाला फ्लायर किताब में आगे या पीछे के कवर के पीछे होना चाहिये.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 4:22 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हार्पर कॉलिंस को आसाराम बापू (Asaram Bapu) पर किताब छापने की अनुमति दे दी है. इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट (High Court) ने निचली अदालत के एक्स पार्टे इन्जंक्शन (ex parte injunction) के आधार पर दिये गये फैसले को खारिज कर दिया है. हालांकि प्रकाशन के दौरान हार्पर कॉलिंस (Harper Collins) को एक फ्लायर छापना होगा, जिस पर लिखा होगा कि संचिता गुप्ता की अपील राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) में लंबित है, और किताब की प्रतियों (Copies of the Books) को बेचते हुए यह जानकारी वाला फ्लायर (Flyer) किताब में आगे या पीछे के कवर के पीछे होना चाहिये.

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi high Court) ने प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसमें आसाराम बापू (Asaram Bapu) पर आधारित एक पुस्तक के प्रकाशन पर लगी अंतरिम रोक को हटाने का अनुरोध किया गया था. 'गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम बापू कन्विक्शन' नाम की किताब के प्रकाशन पर एक्स पार्टे इन्जंक्शन के आधार पर अदालत ने अंतरिम रोक लगायी हुई थी. बता दें कि इस तरह की सुनवाई के आधार पर कोर्ट (Court) बहुत जरूरी मामलों में एक पार्टी के पक्ष को सुनकर निर्देश या रोक (Commanding or restraining) की प्रक्रिया को अंजाम दे देती है और बाद में दोनों पक्षों की बात को एक बाद की मामले पर अंतिम फैसले के लिए एक बाद की तारीख पर अंतिम फैसले के लिए सुनवाई का दोनों पक्षों (both parties) को साथ रखकर फैसला लिया जाता है.

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पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है 500 कॉपी


सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि दोनों पक्ष इस मामले में बीच का रास्ता तलाश करें जैसे कि किताब की शुरुआत में ही ‘घोषणा’ प्रकाशित की जाए. न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि किताब की 5,000 प्रति पहले ही प्रकाशित हो चुकी हैं और अब इसे बदला नहीं जा सकता.
हालांकि, महिला की वकील संचिता गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अपनी मुवक्किल से निर्देश ले लिया है और अदालत इस मामले को गुण-दोष के आधार पर तय कर सकती है. प्रकाशक ने निचली अदालत द्वारा चार सितंबर को किताब के प्रकाशन पर लगायी गई अंतरिम रोक को उच्च न्यायालय में चुनौती दी
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