हाईकोर्ट ने कहा- कोरोना वायरस के कारण अंतरिम जमानत और पैरोल पर छूटे कैदियों को जेल वापस लाने का वक्त आ गया है

दिल्ली हाईकोर्ट
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मार्च में कोरोना वायरस महामारी के कारण दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर छोड़ा गया था. मंगलवार को हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि छोड़े गए कैदियों को सरेंडर करने दें या उन्हें वापस जेल लेकर आया जाए. इस मामले में दिल्ली दंगे के अभियोजन पक्ष ने अर्जी दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि आरोपी पक्ष अदालत के निर्देशों का दुरुपयोग कर रहा है.

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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस के कारण पैरोल (Parole) और अंतरिम जमानत (Interim Bail) पर छोड़े गए कैदियों को वापस जेल लाया जाना चाहिए. कोर्ट ने ऐसा इस बात को ध्यान में रखते हुए कहा कि दिल्ली की जेलों में केवल तीन ही संक्रमित बचे हैं.

मार्च में दिल्ली की जेलों में कोरोना वायरस (Coronavirus) फैलने से रोकने के लिए कैदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर छोड़ दिया गया था. दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष ने अदालत से 13 और 24 जुलाई के जमानत और पैरोल बढ़ाने के आदेश को संशोधित करने की मांग की थी. जेल महानिदेशक के मुताबिक, अदालत के आदेश के अनुसार इस समय 6700 से ज्यादा कैदी पैरोल और अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं. जबकि, राष्ट्रीय राजधानी के तिहाड़ (Tihad), रोहिणी (Rohini) और मंडोली (Mandoli) जेलों में कैदी क्षमता करीब 10,000 है, लेकिन फिलहाल इन जेलों में 15,900 कैदी बंद थे.

बाद में फैसला लेंगे कि जमानत और पैरोल जाए या नहीं
चीफ जस्टिस डीएन पटेल (Chief Justice DN Patel) की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, 'हमने महामारी को देखते हुए आदेश जारी किया था. अब कोविड अध्याय को समाप्त करते हैं. इन लोगों को सरेंडर करने दें या जेल वापस लेकर आया जाए. हमारे आदेश का जेलों की भीड़ से लेना देना नहीं है. अपराध की गंभीरता हमारा विषय नहीं है.' इसके अलावा बेंच ने कहा कि जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह समेत बेंच के सभी सदस्य जमानत और पैरोल बढ़ाने को लेकर विचार करेंगे.



आवेदन में आरोपी पक्ष पर लगाया था आदेश के दुरुपयोग का आरोप
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी नियमित जमानत के बजाए पारिवारिक बीमारी और दूसरे कारणों को बताकर जमानत बढ़ाने को लेकर अदालत के आदेशों का दुरुपयोग कर रहे थे. वकील के अनुसार, दंगों के मामले में सुनवाई के दौरान करीब 20 आरोपियों ने कुछ बहाने से अंतरिम जमानत ली थी और अब आदेश के जमानत बढ़ाने के आदेश का लाभ ले रहे थे.
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