सिख दंगा मामले की सुनवाई तीन सप्ताह में पूरा करना चाहती है दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली होईकोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों की सुनवाई शुरू करते हुए कहा कि बुधवार से रोजाना सुनवाई होगी और वह तीन सप्ताह में सुनवाई को पूरा करना चाहता है.

भाषा
Updated: September 11, 2018, 11:38 PM IST
सिख दंगा मामले की सुनवाई तीन सप्ताह में पूरा करना चाहती है दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट
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Updated: September 11, 2018, 11:38 PM IST
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपीलों की सुनवाई तीन सप्ताह में पूरा करना चाहता है. इन अपीलों में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किया गया था. बुधवार से रोजाना सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने मामले को सूचीबद्ध किया है.

न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने सीबीआई, दंगा पीड़ितों और दोषियों द्वारा दायर अपीलों की सुनवाई शुरू की और कहा कि वह सुनवाई को 20 दिनों में पूरा करना चाहता है. मामले के एकमात्र दोषी कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर की जमानत याचिका जब सुनवाई के लिए आई तो कोर्ट ने वकील से कहा कि यदि तीन सप्ताह में अपीलों पर फैसला नहीं किया जाता है तो वह जमानत याचिका पर जोर दे सकते हैं.

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मई 2013 में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद पूर्व कांग्रेसी पार्षद खोखर तिहाड़ जेल में बंद है. खोखर ने राहत दिये जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसे दंगा मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों के लंबित रहने तक नियमित जमानत दी जानी चाहिए.

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गौरतलब है कि निचली अदालत ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया था लेकिन बलवान खोखर, एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल को आजीवन कारावास की सजा और दो अन्य पूर्व विधायक महेन्द्र यादव और किशन खोखर को तीन वर्ष जेल की सजा सुनाई थी. दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपनी अपीलें दायर की थी.
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