फोटो हटाने के लिए लगाई थी याचिका, गूगल बोला- नए आईटी नियम हम पर लागू नहीं होते

दिल्‍ली हाईकोर्ट में हुई गूगल संबंधी मामले की सुनवाई. (File pic)

दिल्‍ली हाईकोर्ट में हुई गूगल संबंधी मामले की सुनवाई. (File pic)

गूगल (Google) की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा. हरीश साल्वे ने कोर्ट में दलील दी कि गूगल सर्च इंजन है, वो कोई सोशल मीडिया नहीं है. नए आईटी नियम गूगल पर लागू नहीं होते हैं.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में गूगल (Google) संबंधी एक मामले की सुनवाई बुधवार को हुई. गूगल ने दिल्‍ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के एक फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी थी. मामला एक याचिकाकर्ता द्वारा लगाई याचिका का है, जिसमें उसने मांग की थी कि गूगल अपने गूगल उसकी निजी तस्‍वीर वैश्विक स्‍तर पर हटाए. इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्‍ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया है. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी.

दरअसल गूगल ने हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी है. जिसमें याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उसके प्राइवेट फोटोग्राफ्स को गूगल ग्‍लोबली तुरंत हटाए. याचिकाकर्ता के मुताबिक उसने अपने पर्सनल फोटोग्राफ फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डाले थे. उसका कहना है कि बिना उसकी इजाजत के गूगल पर वो फोटोग्राफ पोर्नोग्राफिक वेबसाइट पर दिखाए जा रहे हैं. इस पर सिंगल बेंच ने गूगल को तुरंत फोटोग्राफ हटाने का ग्लोबली निर्देश जारी किया था.

गूगल की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में पक्ष रखा. हरीश साल्वे ने कोर्ट में दलील दी कि गूगल सर्च इंजन है, वो कोई सोशल मीडिया नहीं है. इसलिए 2021 आईटी नियम के अंतर्गत वो नहीं आता है. कोई गूगल पर ये आरोप नहींं लगा सकता कि हमने 24 घंटे में फोटोग्राफ नहीं हटाए.

हरीश साल्वे ने कोर्ट में ये भी कहा कि कुछ कंटेंट इंडिया में ऑफेंसिव हो सकते हैं लेकिन दूसरे देशों में वो जायज होते हैं. इसलिए ग्लोबली नहीं हटाये जा सकते हैं.
एकल न्यायाधीश की पीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया था, जिसमें एक महिला की तस्वीरें कुछ बदमाशों ने अश्लील (पॉनग्रैफिक) सामग्री दिखाने वाली एक वेबसाइट पर अपलोड कर दी थीं और उन्हें अदालत के आदेशों के बावजूद वर्ल्ड वाइड वेब से पूरी तरह हटाया नहीं जा सका था एवं इन तस्वीरों को अन्य साइट पर फिर से पोस्ट किया गया था.

प्रधान न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र, दिल्ली सरकार, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, फेसबुक, अश्लील सामग्री दिखाने वाली (पॉर्नग्रैफिक) साइट और उस महिला को नोटिस जारी किए, जिसकी याचिका पर एकल न्यायाधीश ने आदेश जारी किया था.  अदालत ने यह भी कहा कि वह इस चरण अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं देगी.

गूगल ने याचिका में कहा, ‘एकल न्यायाशीश ने याचिकाकर्ता सर्च इंजन पर नए नियम 2021 गलत तरीके से लागू किए और उनकी गलत व्याख्या की. इसके अलावा एकल न्यायाधीश ने आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं और विभिन्न नियमों को समेकित किया है और ऐसे सभी आदेशों एवं प्रावधानों को मिलाकर आदेश पारित किए है, जो कानून में सही नहीं है.’




गूगल ने याचिका में कहा, ‘एकल न्यायाशीश ने याचिकाकर्ता सर्च इंजन पर नए नियम 2021 गलत तरीके से लागू किए और उनकी गलत व्याख्या की. इसके अलावा एकल न्यायाधीश ने आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं और विभिन्न नियमों को समेकित किया है और ऐसे सभी आदेशों एवं प्रावधानों को मिलाकर आदेश पारित किए है, जो कानून में सही नहीं है.’ (भाषा इनपुट के साथ)

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