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1984 सिख दंगे: जब फैसला सुनाते वक्त रो पड़े जज और वकील

1984 सिख दंगे: जब फैसला सुनाते वक्त रो पड़े जज और वकील

प्रदर्शन करते पीड़ित परिवार (फाइल फोटो)

प्रदर्शन करते पीड़ित परिवार (फाइल फोटो)

ये मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक नवंबर 1984 का है. दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी.

    1984 में हुए सिख विरोधी दंगे के मामले में दोषी सज्जन कुमार पर फैसला सुनाते वक्त दिल्ली हाईकोर्ट के जज रो पड़े. इसके अलावा पीड़ित पक्ष के वकील भी कोर्ट में फैसले के दौरान रोने लगे. बता दें कि 2013 में सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. उन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा. उम्रकैद के अलावा सज्जन कुमार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इसके अलावा बाकी दोषियों को जुर्माने के तौर पर एक-एक लाख रुपये देने होंगे.

    सजा सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि कई दशक से लोग न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं, ये जांच एजेसिंयों की नाकामी है कि अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है.

    यह भी पढ़ें-  1984 के सिख विरोधी दंगे : कैसे भड़की हिंसा और उसके बाद क्या-क्या हुआ?

    ये मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक नवंबर 1984 का है. दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दी गई थी. मामले में बाक़ी लोगों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है. जस्टिस एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 29 अक्टूबर को सीबीआई, दंगा पीड़ितों और दोषियों की ओर से दायर अपीलों पर दलीलें सुनने का काम पूरा करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.

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    Tags: 1984 sikh riots, Congress, DELHI HIGH COURT, Sajjan kumar

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