समलैंगिक जोड़े ने कहा- बैंक खाता खुलवाने तक में होती है दिक्कत, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) में जस्टिस आर एस एंडलॉ और जस्टिस आशा मेनन की बेंच ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करके अपना रुख बताने को कहा है.

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  • Last Updated: October 14, 2020, 12:42 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने दो समलैंगिक जोड़ों (Same sex marriage) की अलग-अलग याचिकाओं पर बुधवार को केंद्र से जवाब मांगा. एक याचिका में विशेष विवाह कानून (SMA) के तहत विवाह की अनुमति देने और एक अन्य याचिका में अमेरिका में हुए विवाह को विदेश विवाह कानून (FMA) के तहत पंजीकृत किए जाने का अनुरोध किया गया है.

जस्टिस आर एस एंडलॉ और जस्टिस आशा मेनन की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करके उनसे एसएमए के तहत विवाह की अनुमति मांगने वाली दो महिलाओं की याचिका पर अपना रुख बताने को कहा है.

अदालत ने अमेरिका में विवाह करने वाले दो पुरुषों की एक अन्य याचिका पर केंद्र और न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास को भी नोटिस जारी किया है. इस जोड़े के विवाह का एफएमए के तहत पंजीकरण किए जाने से इनकार कर दिया गया था. पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए आठ जनवरी 2021 की तारीख तय की है.



विशेष विवाह अधिनियम के तहत उन्हें शादी करने की अनुमति देने की मांग 
बता दें एक समलैंगिक जोड़े ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर विशेष विवाह अधिनियम के तहत उन्हें शादी करने की अनुमति देने की मांग की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि वे आठ साल से दंपति की तरह साथ रह रही हैं, एक-दूसरे से प्यार करती हैं, साथ मिलकर जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं, लेकिन विवाह नहीं कर सकतीं, क्योंकि दोनों महिला हैं.

इसी तरह की याचिका एक समलैंगिक पुरुष जोड़े ने भी दायर की है. दोनों ने अमेरिका में विवाह किया था लेकिन समलैंगिक होने के कारण भारतीय वाणिज्य दूतावास ने विदेशी विवाह अधिनियम, 1969 के तहत उनकी शादी का पंजीकरण नहीं किया.

दोनों याचिकाएं सुनवाई के लिए जस्टिस नवीन चावला की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिये आयीं, जिन्होंने रजिस्ट्री से दोनों अर्जियों को चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी एन पटेल समलैंगिक विवाह को हिन्दू विवाह अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम के तहत वैध घोषित करने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं.

परिवार स्वास्थ्य बीमा लेने में होती है दिक्कत
याचिकाकर्ताओं का पक्ष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अधिवक्ता अरुंधति काटजू, गोविंद मनोहरण और सुरभि ने रखा. याचिका दायर करने वाली दोनों महिलाओं (47 और 36 वर्ष की) का कहना है कि सामान्य विवाहित जोड़े के लिए जो बातें सरल होती हैं, जैसे... संयुक्त बैंक खाता खुलवाना, परिवार स्वास्थ्य बीमा लेना आदि, उन्हें इसके लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.

दोनों ने अपनी याचिका में कहा है, ‘विवाह सिर्फ दो लोगों के बीच बनने वाला संबंध नहीं है, यह दो परिवारों को साथ लाता है. इससे कई अधिकार भी मिलते हैं. विवाह के बगैर याचिका दायर करने वाले कानून की नजर में अनजान लोग हैं. भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के अधिकार की रक्षा करता है और यह अधिकार विषम-लिंगी जोड़ों की तरह ही समलैंगिक जोड़ों पर भी पूरी तरह लागू होता है.’

दोनों ने अनुरोध किया है कि समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देने वाले विशेष विवाह अधिनियम के प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर दिया जाए. उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि अदालत यह घोषणा करे कि विशेष विवाह अधिनियम के प्रावधान सभी जोड़ों पर लागू होते हैं, चाहे उनकी लैंगिक पहचान और सेक्सुअल ओरिएंटेशन कुछ भी हो और वह कालकाजी के उप संभागीय मजिस्ट्रेट को कानून के तहत उनका विवाह पंजीकृत करने का आदेश दे. कालकाजी के उपसंभागीय मजिस्ट्रेट दिल्ली के दक्षिण पूर्वी जिला के विवाह अधिकारी भी हैं.
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