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OTT-डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए नए नियम को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब (सांकेतिक तस्वीर)

New Guideline for OTT & Digital Platform: सरकार ने गाइडलाइंस की घोषणा करते हुए कहा था कि नए नियमों से सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने की जरूरत है.

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नई दिल्ली. OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया पर केन्द्र सरकार के द्वारा बनाए गए नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जसमीत की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है. दिल्ली हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को करेगा. दिल्ली हाइकोर्ट में यह याचिका फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट ट्रस्ट की तरफ से दायर की गई है. दरअसल केंद्र सरकार ने OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया के लिए 25 फरवरी को तकनीकी सूचना (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 जारी की थी.

दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील नित्या रामाकृष्णन ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से नए नियमों को लेकर दिए गए हलफनामे और गूगल के नियम अलग है. नियमों में अखबारों और समाचार-संस्थाओं के बारे में नहीं बताया गया है. ऐसा नहीं है कि समाचार माध्यम नियंत्रण से परे हैं, लेकिन इसका नियंत्रण एक कानून के माध्यम से किया जाना चाहिए.

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सरकार ने गाइडलाइंस की घोषणा करते हुए कही थी ये बात
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते एक मामले कि सुनवाई करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों में अनुचित कार्यक्रम दिखाने वाले या नियमों का उल्लंघन करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ अभियोजन या सजा को लेकर उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है. सरकार ने गाइडलाइंस की घोषणा करते हुए कहा था कि नए नियमों से सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने की जरूरत है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन प्लेटफॉर्म पर अनुपयुक्त सामग्री को नियंत्रित करने के लिए नियमों में कुछ भी नहीं है और बगैर किसी कानून के इसे नियंत्रित करना संभव नहीं हो सकता. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा था नियमों का अवलोकन करने से यह संकेत मिलता है कि नियम दिशानिर्देश के रूप में हैं और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ छानबीन या उपयुक्त कार्रवाई के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है.
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