यूनीफॉर्म सिविल कोड पर मंगलवार को सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट

नई याचिका में लैंगिक न्याय, समानता और महिलाओं की गरिमा की सुरक्षित करने के लिए यूसीसी का मसौदा बनाने के वास्ते केन्द्र को न्यायिक आयोग बनाने या उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया गया है.

भाषा
Updated: August 26, 2019, 11:13 PM IST
यूनीफॉर्म सिविल कोड पर मंगलवार को सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट
नई याचिका में लैंगिक न्याय, समानता और महिलाओं की गरिमा की सुरक्षित करने के लिए यूसीसी का मसौदा बनाने के वास्ते केन्द्र को न्यायिक आयोग बनाने या उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया गया है.
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Updated: August 26, 2019, 11:13 PM IST
दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को दाखिल उस नई जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है जिसमें समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के मसौदे के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किये जाने का अनुरोध किया गया है. इस जनहित याचिका को इसी तरह की एक अन्य याचिका के साथ संलग्न कर दिया गया है.

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति हरिशंकर की एक पीठ ने कहा कि इन दोनों याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी. पहली याचिका भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की थी. याचिका में एकता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का अनुरोध किया था. यह याचिका अभी अदालत के समक्ष लंबित है.

वकील अभिनव बेरी द्वारा दायर नई याचिका का उल्लेख पीठ के समक्ष उपाध्याय ने किया और दोनों याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई होगी.

नई याचिका में किया गया ये अनुरोध

नई याचिका में लैंगिक न्याय, समानता और महिलाओं की गरिमा की सुरक्षित करने के लिए यूसीसी का मसौदा बनाने के वास्ते केन्द्र को न्यायिक आयोग बनाने या उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया गया है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर, एकता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का अनुरोध करने वाली उपाध्याय की याचिका का विरोध किया था.

एआईएमपीएलबी ने उपाध्याय की याचिका में एक पक्ष के रूप में उसे शामिल किये जाने की मांग की और दावा किया कि यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है.
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भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किया था यूसीसी का उल्लेख
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में यूसीसी का उल्लेख करते हुए कहा था कि संविधान का अनुच्छेद 44 इसे राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक के रूप में सूचीबद्ध करता है. उपाध्याय ने दावा किया कि 1952 में जनसंघ के समय से भाजपा के घोषणापत्र में यूसीसी का मुद्दा है. उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी थी कि केंद्र संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित, समान नागरिक संहिता को बनाने में ‘विफल’ रहा है.

समान नागरिक संहिता विभिन्न धार्मिक समुदायों की प्रथाओं और धर्मग्रंथों पर आधारित सभी निजी कानूनों की जगह लेगी और देश के हर नागरिक के लिए एक समान नियम होंगे. उच्च न्यायालय ने 31 मई को केंद्र को नोटिस जारी किया था और इस जनहित याचिका पर केन्द्र से उसका जवाब मांगा था.

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First published: August 26, 2019, 11:13 PM IST
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