सेंट्रल विस्टा पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी बोले- झूठा नैरेटिव फैलाया जा रहा

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने कोविड-19 (Covid-19) वैश्विक महामारी के बीच सेंट्रल विस्टा परियोजना (Central Vista) का काम रोकने का अनुरोध करने वाली याचिका को एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया.

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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने सेंट्रल विस्टा परियोजना (Central Vista) के निर्माण कार्य को जारी रखने की सोमवार को अनुमति देते हुए कहा कि यह एक ‘अहम एवं आवश्यक’ राष्ट्रीय परियोजना है. अदालत ने ‘किसी मकसद से प्रेरित’ याचिका के लिए याचिकाकर्ताओं पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक प्रेस वार्ता की.

पुरी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट एक बड़ा प्रोजेक्ट है. यह अगले 250-300 साल के लिए बन रहा है. यह प्रोजेक्ट अभी शुरू हुआ है. पुरी ने दावा किया कि 'राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक जैसी धरोहरों को छेड़ा नहीं जा रहा है. किसी भी ऐतिहासिक भवन को नहीं छुआ जाएगा.'

साल 2022 में तैयार हो जाएगा प्रोजेक्ट- पुरी

उन्होंने कहा कि नए संसद भवन और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. साल 2022 में 75वें स्वतंत्रता दिवस के समय तक यह तैयार हो जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि 'जब 2012 में मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष थीं तो उनके एक OSD थे जिन्होंने आवास मंत्रालय के सचिव को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि एक फैसला ले लिया गया है कि एक नया संसद भवन बनना चाहिए.'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर एक गलत कहानी गढ़ी जा रही है. इस पर महामारी के बहुत पहले फैसला ले लिया गया था. संसद का नया भवन बनाना इसलिए जरूरी है क्योंकि पुराना भवन सेस्मिक ज़ोन 2 में आता था, अगर तेज भूंकप आए तो अब ये भवन सेस्मिक ज़ोन 4 में है

इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस परियोजना को पहले ही वैध ठहरा चुका है. उसने कहा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इसे जारी रखने की अनुमति दी है, कर्मी पहले से ही स्थल पर मौजूद हैं और इसलिए ‘हमें काम रोकने का कोई कारण नजर नहीं आता.’

कोर्ट ने क्या कहा?



चीफ जस्टिस डी एन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान परियोजना रोके जाने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका किसी मकसद से ‘प्रेरित’ थी और ‘वास्तविक जनहित याचिका’ नहीं थी. अदालत ने कहा कि शापूरजी पालोनजी ग्रुप को दिए गए ठेके के तहत काम नवंबर 2021 तक पूरा किया जाना है और इसलिए इसे जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए.

परियोजना रोके जाने की मांग करते हुए यह याचिका अनुवादक अन्य मल्होत्रा और इतिहासकार एवं वृत्तचित्र फिल्मकार सोहेल हाशमी ने दायर की थी. यााचिका में दलील दी गई थी कि यह परियोजना आवश्यक गतिविधि नहीं है और इसलिए महामारी के दौरान अभी इसे टाला जा सकता है.


परियोजना के तहत एक नए संसद भवन और एक नए आवासीय परिसर के निर्माण की परिकल्पना की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री और उप-राष्ट्रपति के आवास के साथ-साथ कई नए कार्यालय भवन और मंत्रालयों के कार्यालयों के लिए केंद्रीय सचिवालय का निर्माण होना है.

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