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हार के बाद तू-तू-मैं-मैं : पीसी चाको ने कहा- शीला के समय से ही कमजोर हुई पार्टी, तो मिलिंद देवड़ा ने दिया यह जवाब

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 12:26 PM IST
हार के बाद तू-तू-मैं-मैं : पीसी चाको ने कहा- शीला के समय से ही कमजोर हुई पार्टी, तो मिलिंद देवड़ा ने दिया यह जवाब
शीला दीक्षित की फाइल फोटो

कांग्रेस (Congress) की करारी शिकस्त के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 12:26 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में विधानसभा चुनाव के परिणाम (Delhi Results 2020) आने के बाद कांग्रेस (Congress) के नेता पीसी चाको  (PC Chacko) ने पार्टी के कमजोर होने का आरोप दिवंगत नेता और राज्य की सीएम रहीं शीला दीक्षित (sheila dikshit) पर लगाया है. चाको ने कहा है कि कांग्रेस की खराब स्थिति की शुरुआत साल 2013 में ही हो गई थी. उन्होंने कहा कि आप के उदय ने कांग्रेस का वोटबैंक उसकी ओर शिफ्ट कर दिया.

विधानसभा चुनाव परिणाम पर चाको ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी का पतन 2013 में शुरू हुआ जब शीला जी सीएम थीं. एक नई पार्टी AAP के उदय ने कांग्रेस के पूरे वोट बैंक को छीन लिया. हम इसे कभी वापस नहीं पा सके. यह अभी भी AAP के साथ बना हुआ है.'

चाको के इस बयान पर मुंबई कांग्रेस (Mumbai Congress) के नेता मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) ने ट्वीट कर जवाब दिया है. देवड़ा ने कहा, 'शीला दीक्षित जी एक शानदार राजनीतिज्ञ और प्रशासक थीं. मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, दिल्ली का कायापलट हो गया और कांग्रेस पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई. उनके निधन के बाद उन्हें दोषी ठहराते हुए देखना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कांग्रेस और दिल्ली के लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.'



बता दें दिल्ली विधानसभा चुनाव के मंगलवार को आए नतीजों के मुताबिक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने सत्ता बरकरार रखने के साथ-साथ 2015 के प्रदर्शन को करीब-करीब दोहराया है. पार्टी को 70 सदस्यीय विधानसभा में 62 सीटों पर जीत मिली है जबकि भाजपा ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की है. आम आदमी पार्टी को 2015 में 67 सीटों पर जीत मिली थी.

 दिल्ली विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी कांग्रेस
चुनाव आयोग की ओर से घोषित अंतिम नतीजों के मुताबिक आप ने 53.57 फीसदी मतों के साथ कुल 62 सीटों पर जीत दर्ज की है. भाजपा को 38.51 प्रतिशत मत और आठ सीटों पर जीत मिली. वहीं, कांग्रेस लगातार दूसरी बार दिल्ली विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी.पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में 15 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही. पार्टी के तीन उम्मीदवार-- गांधी नगर से अरविंदर सिंह लवली, बादली से देवेंद्र यादव और कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त ही अपनी जमानत बचा पाए हैं.

दिल्ली में कांग्रेस ने पहली बार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा. पार्टी ने 66 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि चार सीटें सहयोगी दल के लिए छोड़ी थीं. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की बेटी शिवानी चोपड़ा की कालकाजी सीट से जमानत जब्त हो गई.

'मैं अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करती हूं'
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 22.46 फीसदी वोट मिले थे और पार्टी ने आप को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था. इसके मद्देनजर कई लोगों को इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद थी. हालांकि, पार्टी का वोट प्रतिशत 2015 के 9.7 से घटकर इस बार 4.2 रह गया. वहीं, 2013 के विधानसभा चुनाव में उसे 24.55 फीसदी वोट मिले थे.

दिवंगत शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा कि नतीजों ने उन्हें हैरान नहीं किया और अंदरुनी राजनीति की वजह से पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई.

दिल्ली महिला कांग्रेस की प्रमुख और पार्टी प्रवक्ता शर्मिष्ठा ने कहा, ‘हम दिल्ली में फिर हार गए. आत्ममंथन बहुत हुआ अब कार्रवाई का समय है. शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने में देरी, राज्य स्तर पर रणनीति और एकजुटता का अभाव, कार्यकर्ताओं का निरुत्साह, नीचे स्तर से संवाद नहीं होना आदि हार के कारण हैं. मैं अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करती हूं.’

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: February 12, 2020, 12:07 PM IST
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