दिल्ली हिंसा: फेसबुक के पूर्व अधिकारी ने लगाए धर्म-जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप, शांति-सद्भाव समिति के सामने देंगे गवाही

इसी साल फरवरी में हुए दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी. (PTI)
इसी साल फरवरी में हुए दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी. (PTI)

आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा (Raghav Chadha) इस कमेटी के चैयरमेन हैं. कमेटी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, फेसबुक के डिजिटल स्ट्रैटजिस्ट और लेखक मार्क एस लकी (Mark S Luckie) मंगलवार को कमिटी के सामने पेश होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 7:56 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव और दिल्ली दंगे (Delhi Riots) के दौरान हेटस्पीच (Hate Speech) को रोकने में नाकाम रहने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook Controversy) घिरता जा रहा है. दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव कमेटी (Delhi Assembly Peace and Harmony Committee) ने अब फेसबुक के पूर्व अधिकारी को समन जारी कर पेश होने को कहा है. इसी साल फरवरी में हुए दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा (Raghav Chadha) इस कमेटी के चैयरमेन हैं. कमेटी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, फेसबुक के डिजिटल स्ट्रैटजिस्ट और लेखक मार्क एस लकी (Mark S Luckie) बीजेपी नेताओं के भड़काऊ भाषण को लेकर मंगलवार को कमेटी के सामने पेश होंगे.

दरअसल लकी ने एक ईमेल में बताया, 'फेसबुक के एक पूर्व कर्मचारी के रूप में मैंने कंपनी के निर्णय निर्माताओं के साथ, आंतरिक नीतियों पर काम किया है. इसे अब तक बाहरी लोगों से बचाकर रखा गया था. सार्वजनिक रूप से इस बात के बारे में कम ही जाना जाता है कि फेसबुक जैसे बड़े मंच पर व्यवस्थित रूप से घृणा और हिंसक भाषा की अनुमति कैसे दी जाती है. दिल्ली दंगों जैसी घटनाओं को फिर से होने से रोकने के लिए बदलाव की जरूरत है. सरकारी एजेंसियों को सूचना और संसाधनों से लैस करने की जरूरत है.'



अब दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति फेसबुक को भेजेगी नोटिस, जानें वजह
दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव कमेटी ने मार्क एस लकी के बयान को इस मामले में एक बड़ा और प्रभावकारी सबूत बताया है. कमेटी ने एक बयान में कहा- 'पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय फेसबुक कर्मचारी भारत में एक समिति के सामने बोलने के लिए आगे आया है... उसने (मार्क लकी) ने दावा किया है कि फेसबुक भड़काऊ भाषणों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित विघटन का केंद्र रहा है. उन्होंने फ़ेसबुक द्वारा नीतियों और सामुदायिक मानकों के पक्षपातपूर्ण और चयनात्मक अनुप्रयोग की ओर भी इशारा किया है, जहां जाति और धर्म के आधार पर अंतर किया जाता है.'

समिति ने कहा है कि हाल ही में बीजेपी के एक नेता द्वारा एक फेसबुक पोस्ट किया गया था, जिसे मार्क जुकरबर्ग ने बहुत ही अपमानजनक और भड़काऊ श्रेणी का बताया था. फेसबुक अधिकारियों पर ऐसे भड़काऊ और असामाजिक पोस्ट को जानबूझ कर नजरअंदाज करने के आरोप लगते रहे हैं. इसके मद्देनजर समिति इस बात पर मजबूर हुई है कि जल्द से जल्द फेसबुक अधिकारियों द्वारा दिल्ली दंगों के दौरान बरती गई उदासीनता और इसके पीछे के मूल कारणों की जांच की जाए.

इस हफ्ते आगे की कार्यवाई के लिए फिर बैठक
समिति इस हफ्ते आगे की कार्यवाही के लिए फिर बैठक बुलाएगी. समिति की तरफ से जारी बयान में वाल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया हैं, जिसमें फेसबुक पर भारत मे चुनाव के दौरान बीजेपी नेताओं के भड़काऊ भाषणों को नजरअंदाज किया गया. दिल्ली सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि फेसबुक के अधिकारियों के खिलाफ दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा को बहुत सारी शिकायतें मिली हैं, जिनमें आरोप लगाए गए हैं कि भारत में जानबूझ कर फेसबुक द्वारा निहित कारणों से भड़काउ पोस्ट पर रोकथाम नहीं की जा रही है.

बता दें कि अमेरिका स्थित ऑनलाइन न्यूज प्लेटफार्म वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा 14 अगस्त 2020 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक जानबूझ कर भड़काउ पोस्ट के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के उस आर्टिकल में एक बीजेपी नेता का जिक्र किया गया है, जिनके द्वारा फेसबुक पर कई भड़काउ पोस्ट किए गए थे, लेकिन फेसबुक द्वारा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

दिलचस्प है कि हाल ही में मार्क जुकरबर्ग ने भी उस बीजेपी नेता द्वारा किए गए पोस्ट का जिक्र किया और कहा कि वह पोस्ट काफी भड़काऊ था. इसके बावजूद फेसबुक अधिकारियों पर ऐसे भड़काऊ और असामाजिक पोस्ट को जानबूझ कर नजरअंदाज करने के आरोप लगाते रहे हैं.
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