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मध्‍य प्रदेश के सीधी में गैंगरेप की घटना ने फिर दिलाई दिल्‍ली की निर्भया की याद...

मध्‍य प्रदेश के सीधी में हुआ निर्भया जैसा कांड. (File Pic)

2012 में हुए 'निर्भया गैंगरेप' (Nirbhaya Gangrape) जैसी हैवानियत मध्‍य प्रदेश के सीधी में सामने आई है. वहां तीन लोगों ने महिला से गैंगरेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की सरिया डाल दी.

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    नई दिल्‍ली. 16 दिसंबर, 2012. यह वो तारीख है, जिस दिन दिल्‍ली की सड़कों पर रात में 6 हैवानों ने एक 23 साल की युवती के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं. पहले इन लोगों ने बारी-बारी से उससे गैंगरेप किया था और बाद में उसे मारने के इरादे से उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल दी थी. कुछ दिनों के संघर्ष के बाद 'निर्भया' (Nirbhaya Gangrape) ने दम तोड़ दिया था. लेकिन यह पहली और आखिरी ऐसी घटना नहीं है. शनिवार को ऐसी ही एक हैवानियत मध्‍य प्रदेश के सीधी (Sidhi Gangrape) में एक बार फिर सामने आई.

    सीधी में 3 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
    सीधी में तीन हैवानों ने एक महिला के साथ गैंगरेप किया. महिला अपने दो बच्‍चों के साथ झोपड़ी में रहती है. तीनों ने उससे गैंगरेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की सरिया डाल दी. महिला की हालत काफी गंभीर है. पीड़िता का बहता खून रुक नहीं रहा था. ऐसे में उसे बेहतर इलाज के लिए रीवा रे‍फर किया गया है. दिल्‍ली की निर्भया के दोषियों को 2020 में फांसी दे दी गई थी. वहीं सीधी की 'निर्भया' के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

    2012 में हुआ था निर्भया कांड
    16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ 6 लोगों ने गैंगरेप किया था. उसे बुरी तरह मारा-पीटा था. फिर भी उन हैवानों का जी नहीं भरा था तो उन्‍होंने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में लोहे का रॉड डाला था. बाद में सर्दी की रात में चलती बस से उसे नीचे फेंक दिया था. इस अमानवीय घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था और निर्भया के लिए न्याय की मांग करते हुए लोग सड़कों पर उतर आए थे.



    6 दोषियों में एक नाबालिग भी था
    कुछ दिन तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद अंतत: सिंगापुर के अस्पताल में निर्भया ने दम तोड़ दिया था. इस मामले में मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह सहित छह व्यक्ति आरोपी बनाए गए थे. इनमें से एक नाबालिग भी शामिल था. एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. नाबालिग को सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया और उसे सुधार गृह भेज दिया गया था. तीन साल तक सुधार गृह में रहने के बाद उसे 2015 में रिहा कर दिया गया था.

    3 डेथ वारंट पर लगी थी रोक
    निर्भया मामले में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी. यह निचली अदालतों से होकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची. अंत में राष्‍ट्रपति तक के पास यह मामला पहुंचा था. कोर्ट की ओर से दोषियों का तीन बार डेथ वारंट रोका गया था क्‍योंकि दोषियों ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया था. सभी दोषियों ने बारी-बारी से राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी. पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मौत का नया वारंट जारी किया, जिसमें फांसी की अंतिम तारीख 20 मार्च, 2020 को सुबह साढ़े पांच बजे तय की गई थी. इसी दिन चारों दोषियों को फांसी दी गई थी.

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