दिल्ली हिंसा: चार्जशीट में दावा- 2019 के नतीजों के बाद ही शुरू हो गई थी हिंसा की प्लानिंग

दिल्ली दंगों के दौरान एक तस्वीर (PTI Photo)
दिल्ली दंगों के दौरान एक तस्वीर (PTI Photo)

Delhi Riots Charge sheet: दिल्ली में इस साल फरवरी में भड़की हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसमें कहा गया है कि साल 2019 में हुए संसदीय चुनावों के बाद ही हिंसा की प्लानिंग शुरू हो गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 2:23 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित उत्तर पूर्वी दिल्ली (Delhi riots)में इस साल फरवरी में हुए दंगों में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट फाइल कर दी है. चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि साल 2019 आए संसदीय चुनाव के परिणामों के बाद से ही इसकी तैयारी शुरू हो गई थी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने  चार्जशीट के निष्कर्ष में कहा है कि 'जब 2019 के संसदीय चुनावों के परिणाम घोषित किए गए थे उस दिन से मौजूदा मामले के प्रमुख षड्यंत्रकारियों के सार्वजनिक बयानों के स्वर और तेवर ने लोगों को हिंसा के प्रति भड़काया और इसने लोगों के दिमाग से खेलना शुरू किया.'

डीसीपी (स्पेशल सेल) पीएस कुशवाह और एसीपी (स्पेशल सेल) आलोक कुमार ने इस फाइनल रिपोर्ट पर दस्तख़त की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है 'सरकार द्वारा अपनी मांगों को मनाने के लिए हिंसा का सहारा लिया गया.' दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की रिपोर्ट में कहा गया कि 'सभी साजिशकर्ताओं का अंतिम उद्देश्य था कि हिंसा और आतंकी गतिविधियों के जरिए एक चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका जाए.'

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दिल्ली पुलिस ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में अदालत में दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में कहा है कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन स्थलों का प्रबंधन करने और साम्प्रदायिक हिंसा की साजिश को अंजाम देने के लिये पांच लोगों को कथित तौर पर 1.61 करोड़ रुपये मिले थे.


कहां खर्च हुए 1.61 करोड़ रुपए?
पुलिस ने आरोपपत्र में कहा है कि कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, कार्यकर्ता खालिद सैफी, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया एलुमनाई एसोसिएशन अध्यक्ष शिफा उर रहमान और जामिया के छात्र मीरन हैदर को सीएए के खिलाफ प्रदर्शन स्थलों के प्रबंधन और फरवरी में हुए दिल्ली दंगों की साजिश को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर 1.61 करोड़ रुपये मिले थे.



पुलिस ने फरवरी में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है. आरोपपत्र के मुताबिक, 'जांच के दौरान यह पता चला है कि एक दिसंबर 2019 से 26 फरवरी, 2020 के दौरान आरोपी इशरत जहां, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन, शिफा-उर रहमान और मीरन हैदर को बैंक खाते और नकदी के माध्यम से कुल 1,61,33,703 रुपये मिले थे.' आरोप पत्र में कहा गया है कि कुल 1.61 करोड़ रुपये में से 1,48,01186 रुपये नकद निकाले गए और प्रदर्शन स्थलों के प्रबंधन के लिए खर्च किए गए.
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