दिल्ली में कांस्टेबल रहते हुए की पढ़ाई, अब DSP बनकर अरुणाचल में संभालेंगे कमान

दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल बना डीएसपी. (सांकेतिक फोटो)
दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल बना डीएसपी. (सांकेतिक फोटो)

लिंगों ने अब अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर लिया है और अपने ही प्रदेश में पुलिस उपाधीक्षक बनने जा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 13, 2020, 11:55 AM IST
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नई दिल्ली. कहते हैं न अगर दिल में जज्बा और जुनून हो तो एक दिन सपना जरूर पूरा होता है. ऐसा ही कुछ दिल्ली (Delhi Police) के पुलिस कांस्टेबल (constable) के साथ हुआ. दिल्ली में कांस्टेबल रह चुके ​केकडम लिंगो ने अपनी कड़ी मेहनत से वो कर दिखाया, जिसे देखकर अब उनके सीनियर ऑफिसर ने भी उन्हें सलूट कर रहे हैं. दरअसल ​लिंगा ने कांस्टेबल रहते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज वह डीएसपी बन गए हैं.

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले में रहने वाले 24 साल के केकडेम लिंगो का चयन जब दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ तो उनके पिता उन्हें जाने नहीं देना चाहते थे. साल 2015 में लिंगो ने दिल्ली पुलिस में नौकरी शुरू की. लेकिन कहते हैं न कि जब सपना आपने बड़ा देखा हो तो वो आपको सोने भी नहीं देता है. लिंगो के साथ ही ऐसा ही कुछ हुआ. उन्होंने दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल का पद तो ज्वाइन कर लिया लेकिन जब भी उन्हें टाइम मिलता तो वह पढ़ाई में जुट जाते. तीन साल बाद लिंगों ने अब अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर लिया है और अपने ही प्रदेश में पुलिस उपाधीक्षक बनने जा रहे हैं.

लिंगो ने बताया कि दिल्ली पुलिस की परीक्षा में बैठने से पहले उन्होंने ईटानगर में राजीव गांधी विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातकोत्तर किया था. उनका परिवार काफी साधारण है और उनके पिता गांव में ही एक चर्च की देखभाल करते हैं. उनके घर पर जीविका चलाने का एकमात्र यही साधन है. पुलिस बल में शामिल होना मेरा सपना था और जैसे ही मुझे मौका मिला मैंने उसे संभाल लिया. उन्होंने कहा कि मेरा सपना पुलिस अधिकारी बनकर टीम का नेतृत्व करना था. परिवार को देखते हुए मैं दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तुरंत ज्वाइन किया और पढ़ाई जारी रखी.



नौकरी से मिलने वाले वेतन का काफी बड़ा हिस्सा वह अपने घर पर भेजते हैं. घर पर पिता के इलाज के साथ ही उन पर अपने भाई और बहन की पढ़ाई की भी जिम्मेदारी है. वेतन का दूसरा हिस्सा वह किताबें खरीदने में करते हैं. उन्होंने पिछले एक साल में मैंने फिजूल खर्च पूरी तरह से रोककर उन रुपयों को परीक्षा की तैयारी में लगाया है. उन्होंने कहा, दिल्ली में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में उन्होंने एक कमांडो कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरा किया.
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