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  • DELHI POLICE INSPECTOR MOHAN CHAND SHARMA WAS MARTYRED DURING THE BATLA HOUSE ENCOUNTER NSNG NODARK

बटला हाउस एनकाउंटर के शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम हो सकता है एक और पदक

अभी 9 गैलेन्ट्री वीरता पुरस्कार शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम हैं.

बता दें अगर बाटला हाउस एनकाउंटर के शहीद मोहन चंद शर्मा ने नाम एक और गैलेन्ट्री पदक की घोषणा होती है तो उनका नाम देश में सबसे ज्यादा गैलेन्ट्री पदक पाने वाले पुलिस अधिकारी की लिस्‍ट में शुमार हो जाएगा.

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मरणोपरांत असाधारण वीरता के लिए अशोक चक्र से सम्मानित दिल्ली पुलिस के दिवंगत अधिकारी मोहन चंद शर्मा के नाम एक और पदक होने वाला है. दरअसल, गृह मंत्रालय इस बार 15 अगस्त से पहले शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम एक और गैलेन्ट्री पदक की घोषणा कर सकता है. 5 जुलाई 2005 को अयोध्या में हुए हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन बटला हाउस के दौरान वह शहीद हुए थे.

दरअसल, ये मामला साल 2008 के एक एनकाउंटर से जुड़ा हुआ है, जिसके खिलाफ कोर्ट में सुनवाई के अलावा आतंरिक रूप से जांच चल रही थी. हालांकि अब उस मामले में कोर्ट ने उस आरोपी को भी दोषी करा दिया है, लिहाजा इसी मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की तरफ से गैलेन्ट्री पदक के लिए योग्य उम्मीदवारों को लिस्ट भेजी गई है.

शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम बनेगा ये रिकॉर्ड
अगर शहीद मोहन चंद शर्मा ने नाम इस गैलेन्ट्री पदक की घोषणा होती है तो उनका नाम देश में सबसे ज्यादा गैलेन्ट्री पदक पाने वाले पुलिस अधिकारी की लिस्‍ट में शुमार हो जाएगा. अभी तक 9 गैलेन्ट्री वीरता पुरस्कार शहीद मोहन चंद शर्मा के नाम हैं. उसके बाद स्पेशल सेल में ही डीसीपी पद पर कार्यरत संजीव कुमार यादव का स्थान है, जिनको आठ बार गैलेन्ट्री पदक प्राप्त हो चुका है. यही नहीं, दिल्ली पुलिस के तरफ से अभी एक मात्र अशोक चक्र पदक विजेता के तौर पर मोहन चंद शर्मा का नाम दर्ज है.

अयोध्या में राम जन्मभूमि में फिदाइन हमला
साल 2005 में यूपी के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद वाली लोकेशन में जो आतंकियों ने फिदाइन हमले की साजिश रची थी. उस मामले की तफ्तीश में में यूपी पुलिस के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम भी जांच में जुटी हुई थी. जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की घटना को पाकिस्तानी आतंकियो ने अंजाम दिया था. इस फिदाइन हमले को अंजाम देने वाले और साजिश रचने में पाकिस्तानी आतंकी आसिफ उर्फ कारी उर्फ सैफुल्ला भी शामिल था. हालांकि इस फिदाइन हमले का मुख्य आरोपी सैफुल्ला कारी उर्फ आसिफ के खिलाफ भी गैर जमानती धारा के तहत वारंट जारी किया गया था और उसको गिरफ्तार करने का फरमान जारी किया गया था. जबकि सैफुल्ला सहित अन्य आरोपियों को इलाहाबाद कोर्ट ने इसी साल 18 जून को आरोपी माना, जिसके बाद ये प्रमाणित हो गया कि वो एनकाउंटर भी सही था और वो आतंकी भी था.

ऐसे हुए थे शहीद
साल 2007 में स्पेशल सेल में कार्यरत तत्‍कालीन इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक वांछित आतंकी आसिफ उर्फ कारी उर्फ सैफुल्ला और आतंकी जफर इकबाल के साथ आमना-सामना हो गया, जिसमें दोनों तरफ से गोलीबारी हुई. इस दौरान आतंकी आसिफ को गोली भी लग गई थी तो एनकाउंटर में आतंकी जफर इकबाल को गिरफ्तार कर लिया गया था. आतंकी कारी उर्फ आसिफ मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला था. स्पेशल सेल के मुताबिक आसिफ जैश-ए-मोहम्मद के डिवीजन कमांडर के तौर जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था और वह दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश में जुटा हुआ था.

इसी मामले की जानकारी मिलने के बाद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और उनकी टीम मामले की तफ्तीश में जुटी थी. मोहन चंद शर्मा को विशेष जानकारी मिलते ही जम्मू-कश्मीर के रमजानपुरा इलाके में अपनी टीम के साथ पहुंचे और मामले की जानकारी जम्मू की स्थानिय पुलिस को दी. उसके बाद आसिफ जिस घर में छुपा हुआ था उस घर को घेर लिया गया. इस ज्वाइंट ऑपरेशन में पुलिस की टीम ने उन आतंकियों को सरेंडर करने का मौका दिया लेकिन वो घर के अंदर से ही फायरिंग करने लगे और भागने की कोशिश करने लगे.

एनकाउंटर में ये चीजें हुई बरामद
इस एनकाउंटर के बाद आतंकियों के पास से स्पेशल सेल की टीम ने 8 मोबाइल फोन, कई चाईनीज हथियार, एक सैटेलाइट फोन, जम्मू-कश्मीर के नाम से फर्जी पहचान पत्र और तीन गुप्त मैट्रिक्‍स कोड भी बरामद हुए थे, जो जैश के कोड वर्ड थे.

और बाटला हाउस में...
राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में 13 सितंबर 2008 में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन द्वारा सीरियल ब्लास्ट किए गए थे. इसी मामले की तफ्तीश के दौरान मोहन चंद शर्मा और उनकी टीम के सदस्य कैलाश बिस्ट और रविन्द्र त्यागी को कुछ विशेष इनपुट मिले थे, जिसके एक ऑपरेशन चलाने का प्‍लान बनाया गया था. इस सिलसिले में बाटला हाउस इलाके में ऑपरेशन के लिए मोहन चंद शर्मा खुद हेड कांस्टेबल बलवंत सहित कई जवानों के साथ रेकी कर रहे थे. 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने घर में छुपे हुए आतंकियों के खिलाफ चलाए इस ऑपरेशन के दौरान मोहन चंद शर्मा को लग गई थी. इसके बाद उनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

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