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दिल्ली दंगा: उमर खालिद की जमानत का विरोध, पुलिस बोली- केंद्र सरकार को बेबस करना था दंगाइयों का मकसद

दिल्ली दंगा: उमर खालिद की जमानत का विरोध, पुलिस बोली- केंद्र सरकार को बेबस करना था दंगाइयों का मकसद

उमर खालिद (फाइल फोटो)

उमर खालिद (फाइल फोटो)

Delhi Riots and Umar Khalid bail plea: दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में पुलिस ने छात्र नेता उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध किया है. विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि उमर खालिद का मुख्य मकसद केंद्र सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना और लोकतंत्र की बुनियादी को अस्थिर करने का था. जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA)के तहत मामला दर्ज है.

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दिल्ली: दिल्ली दंगों (Delhi Riots) से जुड़ी साजिश के मामले में छात्र नेता उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने कहा कि उमर खालिद का मुख्य मकसद केंद्र सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना और लोकतंत्र की बुनियादी को अस्थिर करने का था. जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है. फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर पिछले 5 महीने से सुनवाई चल रही है. विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर खालिद के उन दावों का विरोध किया जिसमें उसने जांच एजेंसी द्वारा दाखिल आरोप पत्र को एक कल्पना बताया था.

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित प्रसाद ने एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत के समक्ष कहा कि, दंगों के जरिए इन लोगों को मुख्य उद्देश्य नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर लोकतंत्र की बुनियाद को अस्थिर करने का था. यह लोग चाहते थे कि केंद्र सरकार पर सीएए को वापस लेने के लिए कैसे दबाव बनाया जाए.

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विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि, इस बात के सबूत इनकी चैट्स के आधार पर मिले हैं जिसमें यह कहा गया था कि केंद्र सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करना है. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों का जिक्र करते हुए अमित प्रसाद ने कहा कि, चार्जशीट के अनुसार, प्रदर्श के लिए 23 विरोध स्थल बनाए गए थे. कुछ विरोध स्थलों पर एक जैसी तख्तियों और बैनर्स का इस्तेमाल किया गया और निगरानी के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था. इससे यह स्पष्ट होता है कि योजनाबद्ध तरीके से दंगे की योजना बनाई गई थी.

अमित प्रसाद ने कहा कि उमर खालिद ने अपने वकील के माध्यम से अदालत का ध्यान भटकाने के लिए जमानत याचिका पर बहस करते हुए “अप्रासंगिक सामग्री” पर ध्यान केंद्रित किया है. पिछली सुनवाई के दौरान उमर कालिद ने अपने वकील के जरिए कहा था कि सीएए जैसे कानून के खिलाफ प्रदर्शन
करना कोई अपराध नहीं है और पुलिस ने गवाहों पर उनके खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया.

Tags: CAA protest, Delhi police, Umar khalid

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