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रिलायंस फाउंडेशन किसानों को दिखा रहा उन्‍नति की राह, बदल रहा जीवन स्‍तर

reliance foundation programme

reliance foundation programme

बुधवार को दिल्‍ली में रिलायंस फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में किसानों ने बताया कि फाउंडेशन की मदद से उन्‍होंने न केवल फसल के लिए बाजार तलाशे बल्कि आमदनी को भी दोगुने से चार गुने तक पहुंचाया. वहीं टोल-फ्री नंबर से हर समस्‍या का हल तत्‍काल मिलने से फायदा हुआ.

  • News18Hindi
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    किसानों को खेती के दौरान कई दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है. पानी की कमी और अन्‍य समस्‍याओं से जूझते किसानों की मदद के लिए रिलायंस फाउंडेशन गांव-गांव पहुंच रहा है. इसी संदर्भ में बुधवार को दिल्‍ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

    खेती में समस्‍याओं के समाधान के किए गए कार्यों पर आयोजित कार्यक्रम में पांच राज्‍यों से आए किसानों ने अपनी सफलता की कहानियां सुनाईं. उन्‍होंने बताया कि किस प्रकार रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड के रिलायंस फाउंडेशन की मदद से उन्‍होंने बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया. पानी की कमी को दूर किया और बेहतर बीज का उपयोग कर उन्‍नत किस्‍म की खेती की.

    किसानों का कहना था कि विशेषज्ञों की मदद से उन्‍होंने न केवल फसल के लिए बाजार तलाशे बल्कि आमदनी को भी दोगुने से चार गुने तक पहुंचाया. इसमें फाउंडेशन की ओर से बनाई गई समितियों, प्रोड्यूसर कंपनियों और समूहों का विशेष सहयोग मिला. वहीं टोल-फ्री नंबर से हर समस्‍या का हल तत्‍काल मिलने से फायदा हुआ.

    वहीं फाउंडेशन में ग्रामीण ट्रांस्‍फॉर्मेशन के लिए पानी विषयक मुद्दों के विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्‍तव ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी और संक्रमित पानी की समस्‍या मिली. लेकिन राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश सहित कई जगहों पर वाटर हार्वेस्टिंग के माध्‍यम से किसानों की इस समस्‍या को भी हल किया जा रहा है. फिलहाल विशेषज्ञ पानी के लिए खड़े किए जा रहे ढांचे की लागत कम करने पर काम कर रहे हैं.

    Reliance foundation beneficiary chandra kunwar


    सिर्फ किसान ही नहीं महिलाओं के लिए भी काफी काम हुआ है. राजस्‍थान के सवाई माधोपुर से आई चंदा कंवर ने बताया कि महिलाओं के जीवन स्‍तर में काफी बदलाव आया है. सवाई माधोपुर में मासिक धर्म स्‍वच्‍छता को लेकर काफी काम हो रहा है. जो महिलाएं छोटी-छोटी बीमारियों को भी इसलिए छुपा जाती थीं क्‍योंकि वे पूरी तरह मर्दों पर आश्रित थीं और अस्‍पताल तक नहीं जा पाती थीं. वे आज मासिक धर्म पर बोल रही हैं और सेनिटरी पैड के इस्‍तेमाल को लेकर जागरुक कर रही हैं.

    उन्‍होंने बताया कि आज फाउंडेशन के सहयोग से महिलाएं आजीविका के साधन जैसे आटा-चक्‍की लगाना, भैंस पालकर दूध का व्‍यापार करना जैसे काम कर रही हैं. आज घूंघट हट रहा है. वहीं इलाके में लगे हेल्‍थ कैंप से महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया की जानकारी मिली. इन बीमारियों का इलाज कराया जा रहा है. खानपान पर ध्‍यान दिया जा रहा है.

    reliance foundation beneficiary Satyashree Singh


    झारखंड के टिटमोह स्थित देवघर से आई सत्‍यश्री सिंह ने बड़ी बेबाकी से बताया कि उनके इलाके में जब रिलायंस फाउंडेशन की टीम आई तो सभ्‍ाी गांव वालों में डर पैदा हुआ कि ये कहीं उनका खेत न ले लें. लेकिन वे आगे आईं और जुड़ने का फैसला किया. गांव के कुछ लोगों ने विशेषज्ञों से मिले परामर्श से खेती करना शुरू किया. जो खेत वर्षा होने पर भी एक ही फसल देता था, उन्‍होंने दो फसलें की. इसका अच्‍छा लाभ उन्‍हें मिला.

    इसके बाद उनके पति ने मौत के कूए में मोटरसाइकिल चलाने का काम छोड़कर खेती करना शुरू किया. आज सत्‍यश्री झारखंड त्रिकूट कृषक प्रोड्यूसर कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर में शामिल हैं. उन्‍होंने कहा कि उनका लक्ष्‍य 19 गांवों से कम से कम 70 गांवों तक पहुंचकर लोगों को लाभ पहुंचाना है.

    भोपाल से आए विशाल मीणा ने बताया कि उनके पास 4 एकड़ कृषि भूमि थी. उसमें बारिश का पानी भर जाता था. घर की आर्थिक हालत बेहद खराब थी लेकिन फाउंडेशन के टोल फ्री नंबर पर बात कर उन्‍होंने ग्‍लैडियोलस फूल की खेती की. आज वे मुंबई से दुबई तक फूल भेजते हैं. वहीं महाराष्‍ट्र के भरत भोसले ने बताया कि उन्‍होंने भी सहजन की खेती कर दो लाख रुपये सालाना की आय अर्जित की.

    reliance foundation beneficiary tofan ram


    राजस्‍थान के जमवारामगढ़ से आए तूफान राम मीणा बीएड कर पढ़ाने के साथ ही घर चलाने के लिए मजदूरी भी करते थे. वहीं एक हेक्‍टेयर कृषि भूमि पर खेती भी करते थे. तब कहीं जाकर सालाना 40 हजार रुपये कमा पाते थे. उन्‍होंने बताया कि 2012 में गांव में रिलायंस फाउंडेशन के परामर्श से खेती करना शुरू किया. खेत में तालाब की मिट्टी और एफवाईएम लगाया. तब उनके खेत की मिट्टी उपजाऊ हुई. आज उनकी आमदनी खेती से ही एक से सवा लाख रुपये सालाना के करीब हो गई है.

    बता दें कि नीता एम. अंबानी के नेतृत्‍व में रिलायंस फाउंडेशन ग्रामीण परिवर्तन के लिए 14500 गांवों में काम कर रही है. फाउंडेशन के सदस्‍य, कृषि, बागवानी एवं विभिन्‍न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ सीधे तौर पर ग्रामीण लोगों से मिलकर उन्‍हें बेहतर खेती की जानकारी देते हैं और समस्‍याओं के समाधान करते हैं.

    डिस्क्लेमर: हिंदी न्यूज़ 18 डॉट कॉम रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.

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